मिथिला ने विश्व को पढ़ाया व्यवस्थित रहने का पाठ
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Apr 2017 7:30 AM (IST)
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दरभंगा : दार्शनिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक विकास के क्षेत्र में मिथिला का महत्वपूर्ण योगदान है. यह ज्ञानियों की भूमि है. मिथिला ने विश्व को व्यवस्थित ढंग से रहने कापाठ पढ़ाया है. वरीय पत्रकार एवं लेखक अरविंद मोहन ने डॉ़ प्रभात दास फाउंडेशन एवं सीएम साइंस कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ”कंटीब्यूशन ऑफ मिथिला इन द […]
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दरभंगा : दार्शनिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक विकास के क्षेत्र में मिथिला का महत्वपूर्ण योगदान है. यह ज्ञानियों की भूमि है. मिथिला ने विश्व को व्यवस्थित ढंग से रहने कापाठ पढ़ाया है. वरीय पत्रकार एवं लेखक अरविंद मोहन ने डॉ़ प्रभात दास फाउंडेशन एवं सीएम साइंस कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ”कंटीब्यूशन ऑफ मिथिला इन द मेकिंग ऑफ इंडिया” विषयक राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए यह बात कही.
श्री मोहन ने कहा कि महर्षि याज्ञवल्क्य, गार्गी, मैत्रयी, मंडन मिश्र, विद्यापति आदि की ज्ञान-उर्जा को वर्तमान में भी तेजस विमान के निर्माता वैज्ञानिक मानव बिहारी वर्मा और देश की पहली लड़ाकू विमान पायलट भावना कंठ जैसे लोग परवान चढ़ा रहे हैं. मिथिला में प्रतिभा का सम्मान सदा से होता रहा है. सत्ताधारी वर्ग में ज्ञान की कोई कद्र नहीं बची है.
तनिक भी उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि आमलोगों को उच्च स्तर का ज्ञान मिल रहा है या नहीं. ऐसी स्थिति में भी मिथिला के लोग अपने ज्ञान का परचम फहरा रहे हैं. ज्ञान की यह धारा सदैव प्रवाहित होती रहे, इसकी कोशिश यहां के बुद्धिजीवियों को करनी होगी. श्री मोहन ने दरभंगा महाराज की दानशीलता का उल्लेख करते हुए कहा कि बीएचयू के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. बीएचयू की नीव दरभंगा महाराज ने ही रखी थी और उसके लिए मुक्त हाथों से दान भी दिया था.
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