तापमान पहुंचा 13 पर, बढ़ सकती है कनकनी

दरभंगा : पिछले चार दिनों से मौसम के बदलते मिजाज ने आमजन की जिंदगी को कमरे में कैद कर दिया है. लगातार घट रहे तापमान गुरुवार को 13 पर पहुंच गया. आज सुबह लगभग तीन-चार घंटे ओस के बदले ऐसी बूंदाबांदी (पाला) हुई जिससे लोगों के आवासीय परिसर सहित सड़कें भी गिली हो गयी थी. […]
दरभंगा : पिछले चार दिनों से मौसम के बदलते मिजाज ने आमजन की जिंदगी को कमरे में कैद कर दिया है. लगातार घट रहे तापमान गुरुवार को 13 पर पहुंच गया. आज सुबह लगभग तीन-चार घंटे ओस के बदले ऐसी बूंदाबांदी (पाला) हुई जिससे लोगों के आवासीय परिसर सहित सड़कें भी गिली हो गयी थी.
यह सिलसिला दिन के दस बजे तक चला. इसके कारण सुबह से सड़कों पर लगभग सन्नाटा ही था. इस शीतलहर के बीच सर्वाधिक परेशानी उन स्कूली बच्चों की दिखी, जो सुबह आठ बजे गुप्प कुहासा एवं कनकनी के बीच बस्ता लटकाये स्कूल जा रहा था. दोपहर दो बजे के बाद पुन: हवा के चलने से तापमान में और गिरावट आ गयी. इसके बाद तो स्थिति यह हो गयी कि शाम पांच बजे सड़कें लगभग वीरान दिखने लगी. 8 दिसंबर से मौसम का मिजाज बदला.
कुहासा के कारण तीन दिनों से सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे. लोग कहीं भी घर से बाहर निकलने के पहले कई बार सोचते हैं. अति आवश्यक स्थिति में ही लंबी यात्रा के लिए अपने आपको तैयार कर पाते हैं. राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर के वैज्ञानिक के अनुसार अगले दो दिनों तक मौसम यथास्थिति ही रहेगी. 13 दिसंबर से कुहासा के छटने पर धूप खिलने की संभावना है. इससे कनकनी में थोड़ी कमी आयेगी.
उन्होंने बताया कि आज अधिकतम तापमान 16 तथा न्यूनतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस पर आ गया. रात दस बजे के बाद इसमें और गिरावट आयेगी. /इउलेन कपड़ों की मांग बढ़ी /इशीतलहर का प्रकोप शुरू होने के बाद सर्वाधिक मांग रेडीमेड दुकानों में इनर, ट्राउजर, ग्लब्स, टोपी, मौजा आदि की हो गयी है.
दरभंगा टावर के आसपास दो दर्जन से अधिक रेडीमेड दुकानें हैं. इसके अलावा टावर के ईद-गिर्द करीब चार दर्जन से अधिक ठेलावाले कम बजट वाले खरीददारों के लिए गर्म कपड़े बेच रहे हैं. आज दिनभर इन दुकानों पर खरीददारों की अच्छी खासी भीड़ देखी गयी. लगभग यही स्थिति मिर्जापुर, सीआइडी चौक, सिनेमा चौक, मौलागंज, बाकरगंज, लहेरियासराय टावर, कॉमर्शियल चौक के रेडीमेड दुकानों में भी दिखी.
कई दुकानदारों ने बताया कि इस शीतलहर से जूझने के लिए सर्वाधिक जरूरी इनर, ट्राउजर, मौजा, टोपी के ही अधिक ग्राहक हैं. इसीमें जिनका बजट अच्छा है, वे नामचीन कंपनियों के सामानों की खरीददारी तथा अन्य लोग लोकल निर्मित सामानों की खरीददारी करते हैं.
/इमौसम का असर कार्यालय पर भी /इकंपकंपाते हाथ एवं ठंड से शरीर समुचित स्थिति में काम नहीं करने की जो मानसिकता है, उसका असर पिछले तीन दिनों से कार्यालय में कर्मियों की उपस्थिति की कमी से देखी जा रही है. कार्यालय चाहे सरकारी, अर्द्धसरकारी या शैक्षणिक संस्था हो, अधिकांश कार्यालयों में यदि कर्मी पहुंचते भी हैं
तो शीतलहर के कारण अपने आपको पूर्ण तंदुरूस्त स्थिति में नहीं पाकर तन्मयता से काम में नहीं जुट पाते. विगत तीन दिनों से नगर निगम कार्यालय सहित समाहरणालय स्थित कई प्रशाखाओं की यही स्थिति है.
जो प्रशाखा पदाधिकारी अपने कार्यालय में उपस्थित हो मातहतों पर सक्रिय रहते हैं वहां तो दैनन्दिनी का कार्य चल रहा है अन्यथा 12 बजे लेट नहीं, 3 बजे भंेट नहीं वाली कार्य संस्कृति ही कार्यालय में दिख रही है. /इकहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं /इइस शीतलहर से सर्वाधिक परेशानी सार्वजनिक स्थलों पर रात बिताने वाले यात्रियों की है.
दरभंगा रेलवे जंकशन पर सर्वाधिक संख्या में यात्री रात में इस शीतलहर से जूझते हैं. प्लास्टर पर कोई कपड़ा बिछा सीमित कपड़े शरीर पर रख समय व्यतीत करना कितना कष्टदायी होता होगा, यह सहज ही अनुमान किया जा सकता है. जिला प्रशासन एवं नगर निगम प्रशासन प्रत्येक वर्ष शीतलहर पर शहर के सार्वजनिक स्थलों रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंडों के ईद-गिर्द अलाव की व्यवस्था करती थी.
लेकिन विगत चार दिनों से जारी शीतलहर के बाद भी अबतक प्रशासन की तंद्रा नहीं टूटी है. दरभंगा स्टेशन के प्लेटफार्म पर कुहासा का आलम यह है कि 15 से 20 फीट की दूरी के बाद कुछ भी दिखाई नहीं देता.
इस कुहासा एवं ठंड के थपेड़ों को झेलकर यात्री प्लेटफार्म पर कैसे रात गुजारते होंगे, इसकी कल्पना से ही शरीर में सिहरन होने लगती है. /इक्या कहते हैं अधिकारी /इशहर के सार्वजनिक स्थलों एवं चौराहों पर अलाव जलाने का आदेश नगर आयुक्त को दिया गया है. पूर्व के वर्षों में जिन स्थलों पर अलाव की व्यवस्था की गयी थी,
उन स्थलों पर वार्ड जमादार को लकड़ी हस्तगत कराकर पार्षदों की सहमति से इसे शीघ्र जलाया जायेगा. गौड़ी पासवान, मेयर, नगर निगम दरभंगा नवजात शिशुओं में निमोनिया का खतरा ठंड आते ही बढ़ जाती है संभावना डाक्टर की सलाह, ठंड से बचाएं बच्चों को शिशु रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ अशो कुमार दरभंगा : ठंड के आते ही नवजात शिशुओं में मौसमी रोग सौगात के रूप में दस्तक दी है. ऐसे बच्चों मेंं निमोनिया, सर्दी, खांसी व डायरिया आम बीमारी है. ऐसे रोगियों का डीएमसीएच व निजी नर्सिंग में आने का सिलसिला शुरू हो गया है.
ऐसे रोगियों के बचाव एवं इलाज पर विस्तृत जानकारी दे रहे डीएमसीएच शिशु रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ अशोक कुमार./इठंड में रेाग :/इइस मौसम में मुख्य रूप से बच्चों में निमोनिया, सर्दी, खांसी और डायरिया अटैक करता है. इसके अलावा अन्य रोग सामान्य है जो बिना दवा के ही रोगमुक्त हो जाते हैं.
/इनिमोनिया रोग /इनवजात शिशुओं में निमोनिया आम बतों हैं. तय तापमान के अभाव में यह रोग होता है. इस रोग में पसली धंसना, तेज सांस चलना, मां के दूध से मोहभंग और सुस्ती आ जाना. वह लक्षण छह माह तक के नवजात शिशुओं में अधिक आता है. /इबचाव/इऐसे रोगों से बचाव के लिए बच्चों के स्थल का तापमान 28 से 30 डिग्री होना जरूरी है. गरम कपड़ों से नवजात शिशुओं को ढककर रखें. टोपी व मौजा पहनाना नहीं भूलें.
खुले हवा से परहेज करें. बच्चों को धुंआ से दूर रखें. /इउपचार /इऐसे रोग के लक्षण होने पर बच्चों को ले शीघ्र शिशु रोग विशेषज्ञ से मिलें./इकोल्ड डायरिया/इबच्चों को सामान्य शौच हो, अधिक पतला शौच बार-बार होता हो तो सतर्क हो जायें. इसमें कै की भी शिकायत होती है. /इलक्षण : /इइस डायरिया में बच्चे सुस्त या बेहाश होना, खून में मल आना, धंसी हुई आंखें, पेट की त्वचा पर चिकोटी का धीरे वापस आना. /इबचाव :/इऐसे डायरिया होने पर एकमा. बचाव ओआरएस का घोल है.
डायरिया होने पर बच्चों को चम्मच से ओआरएस का घोल दें. ऐसे रोग में कोई दवा नहीं दें. मां का दूध इस रोग में अत्यधिक लाभदायक होता है. ऐसे बच्चों कों मां का दूध हमेशा पिलाते रहें. ठंड से बचें वृद्ध व रोगी फोटो संख्या- 45परिचय- डॉ एके गुप्ता की तसवीर दरभंगा ;’ ठंड वृद्ध व गंभीर मरीजों के लिए जानलेवा होता है.
ऐसे लोगों को ठंड में अधिक परहेज की आवश्यकता है. ठंड में रोगों से बचाव व उपचार के लिए डीएमसीएच मेडिसीन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ एके गुप्ता ने कई नुस्खे बताये हैं. ठंड में रेाग : ठंड में वृद्धों में लकवा की शिकायत अधिक होती है. श्वसन संबंधी रोग का प्रभाव भी बढ़ जाता है. इसके साथ ही हर्ट अटैक की शिकायत आम बात है.
इसके अलावा हाथ की धमनियों में खून संकूचित हो जाता है. इस मौसम में हाथ व उंगलियां लाल हो जाता है. कमर दर्द बढ़ जाती है. 70 से अधिक आयुवाले ल९ागों में ब्रेन स्टॉक होने की अधिक संभावना रहती है.
बचाव 70 से अधिक आयु वाले वृद्ध को ऐसे मौसम के सुबह में टहलने से परहेज करें. बंद कमरे में स्नान करें. गरम पकड़ा, मॉुलर, जूता के साथ मौजा का उपयोग जरूर करें. ताजा व गरम खाना का सेवन करें. प्रोटिनयुक्त खाद्य पदार्थ खाएं.
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