कैंपस- भारत लोक रंग महोत्सव संपन्न प्रतिभागियोें का मिला प्रमाण पत्र
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Dec 2015 9:52 PM
कैंपस- भारत लोक रंग महोत्सव संपन्न प्रतिभागियोें का मिला प्रमाण पत्र फोटो- 15 व 16परिचय- मणिपुर एवं सिक्किम के कलाकारों ने नाटक मंचन किया. एवं कार्यक्रम में उपस्थित प्रति कुलपति प्रो. सैयद मुमताजुद्दीन व अपरसमाहर्त्ता रवींद्र कुमार दिवाकर व अन्य.दरभंगा : लनामिवि पीजी संगीत विभाग में चल रहे तीन दिवसीय भारत लोक रंग महोत्सव के […]
कैंपस- भारत लोक रंग महोत्सव संपन्न प्रतिभागियोें का मिला प्रमाण पत्र फोटो- 15 व 16परिचय- मणिपुर एवं सिक्किम के कलाकारों ने नाटक मंचन किया. एवं कार्यक्रम में उपस्थित प्रति कुलपति प्रो. सैयद मुमताजुद्दीन व अपरसमाहर्त्ता रवींद्र कुमार दिवाकर व अन्य.दरभंगा : लनामिवि पीजी संगीत विभाग में चल रहे तीन दिवसीय भारत लोक रंग महोत्सव के अंतिम दिन इसके समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रतिकुलपति प्रो. सैयद मुमताजुद्दीन ने बतौर मुख्यअतिथि कहा कि इस तरह क ेआयोजन के माध्यम से मिथिला की संस्कृति का विस्तार को बल मिलता है. साथ ही अन्य राज्यों की संस्कृति से मिथिला के लोग भी परिचित होते हैं. इधर अपर समाहर्त्ता रवींद्र कु मार दिवाकर ने कहा कि देश की राजधानी भले ही दिल्ली है मगर संस्कृति की राजधानी दरभंगा है. क्योंकि शाही संगीत, नृत्य सहित लोक संस्कृति के प्रति यहां के लोगों की भावना इसके प्रति समर्पित है. इधर कार्यक्रम कीअध्यक्षता एवं अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष डा. पुष्पम नारायण ने की. समापन समारोह के दौरान लगभग 125 प्रतिभागियाें को प्रमाण पत्र प्रतिकुलपति के हाथों दिया गया. इसके उपरांत मणिपुर एवं सिक्किम के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी. इससे पूर्व तकनीकि सत्र को संबोधित करते हुए लोक नाट्य के सिद्धस्त डा. अनिल पतंग ने लोककला के विभिन्न आयाम जट-जटिन, लोक नृत्य के परिधान व झिझिया पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि लोक संग हमारे जीवन का महासमुद्र है. जिसमें हमारे भूत, वर्त्तमान एवं भविष्य तीनों शामिल है. भारत का नाट्य शास्त्र मानवजीवन का निर्माण करनेवाला शास्त्र है. डा. पतंग ने दृष्टिक्षम नाटक की विशेषता बताते हुए कहा कि इसने विभिन्न कै रेक्टर के माध्यम से लंबी को छोटी और पतले को मोटा दिखाया जाता है. वहीं डा. महेंद्रनारायण राय ने कहा कि प्रवृति एवं बुद्धि के संयोग से संस्कृति का निर्मांण होता है. लोक संस्कृति को भारतीय इतिहास में जनता का इतिहास कहा जाता है. कला जीवन के प्रत्येक पहल को पूर्णता प्रदान करती है. इसके विकास का क्रम निरंतर चलता है. इसके अलावा उन्होंने जट जटिन के कथानक गीत एवं पात्र पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. प्रफूल्ल कुमार मौन ने कहा कि लोक विद्या धर्म, लोक विद्या लोक नाट्य एवं लोक जीवन में जन्म से मृत्यु तक 16 संस्कार शास्त्रकारों ने बताया है. परंतु वर्त्तमान में तीन संस्कार ही देखने को ही मिलता है. तकनीकि सत्र की शुरुआत छात्राओं की ओर से जय जय भैरवि मंगलाचरण से हुई. अतिथियों का स्वागत अध्यक्षता कर ही डा. पुष्पम नारायण ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. वेद प्रकाश ने किया. संचालन सागर सिंह ने किया. यह कार्यक्रम भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृ तिक केंद्र कोलकाता तथा दक्षिण क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र नागपुर व लनामिवि की पीजी संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित थी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










