स्वास्थ्य महक को प्रधान सचिव का फरमान, चिकत्सिा में नही हो कोताही

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स्वास्थ्य महक को प्रधान सचिव का फरमान, चिकित्सा में नही हो कोताही समय पर हो उपचारदवाओं का रखे पुख्ता इंतजामउपचार की हो हमेशा समीक्षा दरभंगा. स्वास्थ्य के प्रधान सचिव ब्रजेश मेेहरोत्रा ने स्वास्थ्य महकमा को एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया है कि इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के तत्क्षण इलाज में जुट जायें. […]

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स्वास्थ्य महक को प्रधान सचिव का फरमान, चिकित्सा में नही हो कोताही समय पर हो उपचारदवाओं का रखे पुख्ता इंतजामउपचार की हो हमेशा समीक्षा दरभंगा. स्वास्थ्य के प्रधान सचिव ब्रजेश मेेहरोत्रा ने स्वास्थ्य महकमा को एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया है कि इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के तत्क्षण इलाज में जुट जायें. उन्हें बराबर शिकायत मिल रही है कि मरीजों का ससमय पर न तो इलाज होता है, न ही दवा दी जाती है. प्रधान सचिव ने इसे गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि प्रत्येक स्वास्थ्य प्रशासन की यह जिम्मेवारी है कि मरीजों के उपचार में किसी तरह की कोताही नहीं हो. बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो ताकि डॉक्टरों को मरीजों के उपचार में कोई परेशानी नहीं हो. इधर अस्पताल अधीक्षक डॉ. एसके मिश्र ने 14 अक्टूबर को सभी एचओडी को प्रधान सचिव का फरमान भेज दिया है. कर्मियों की तैनातीस्वास्थ्य संस्थानों मेें समय पर डॉक्टर, पारामेडिकल समेत अन्य कर्मी की तैनाती 24 घंटें रहे. हरेक पाली में उपचार के तय नेटवर्क के सभी कर्मी रहे. परीक्षण कक्ष या मरीजों के सामने दवाओं का पुख्ता इंतजाम हो. एक भी मरीज बिना दवा का नही रहे, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों का काम है. डॉक्टरों की सलाह पर तय पैथोलॉजिकल व रेडियोलॅाजिकल जांच के लिए मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़े. एम्बुलेंस की तैनाती वार्ड के समक्ष रहेे. जरूरत पड़ने पर दूसरे जगह मरीजों को रेफर किया जा सके. इस एम्बुलेंस में प्रशिक्षित डॉक्टर , कर्मी और जीवन रक्षक दवा और मशीन उपकरण की मौजूदगी रहे. ऑन काल रहे डॉक्टर गंभीर हालत को लेकर वार्ड में ऑन काल का पुख्ता इंतजाम रहे. मसलन डॉक्टर्स ऑन काल को लाने के लिए एक वाहन की व्यवस्था हो. ताकि डॉक्टरों को मरीजों के पास आने में कोई परेशानी नहीं हो. पीएचसी में भी 24 घंटें गंभीर मरीजों के लिए डॉक्टर्स ऑन काल की तैनाती सुनिश्चित करें ताकि गंभीर मरीजों को शहर नहीं आना पड़े. इसके लिए हरेक पीएचसी पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित हो. यह व्यवस्था रेफरल व अनुमंडल अस्पतालों में भी डॉक्टर्स आॅन कॉल की तैनाती हो. ऐसे अस्पतालों के समक्ष एम्बुलेंस सेवा के साथ दवाओं समेत अन्य चिकित्सा सामग्री उपलब्ध हो. ऐसे अस्पतालों में रात में मेडिकल टीम गठित करे ताकि रात में आने वाले मरीजों की उपचार में कोई परेशानी नहीं हो.

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