कचरे से कमाई और खेती को फायदा, नालंदा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मिली मजबूती, 226 यूनिट का लक्ष्य, 173 बनकर तैयार

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जिला कृषि कार्यालय, बिहारशरीफ

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Bihar Sharif News : स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान-2 के तहत गीले कचरे को नाडेप विधि से खाद में बदला जा रहा है, जिससे स्वच्छता के साथ किसानों को भी लाभ मिल रहा है.

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नालंदा (बिहारशरीफ) से रणजीत सिंह की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान-2 के तहत नालंदा जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूती मिली है. जिले में 226 अपशिष्ट प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था. जिसमें से अब तक 173 यूनिट बनकर तैयार हो चुकी हैं, जबकि 49 यूनिट का निर्माण कार्य जारी है. डीआरडीए के अधिकारियों के अनुसार इन यूनिटों में गांवों से एकत्रित गीले कचरे को नाडेप विधि द्वारा जैविक खाद में बदला जा रहा है. इस प्रक्रिया में 45 से 50 दिन का समय लगता है और तैयार खाद पूरी तरह प्राकृतिक होती है, जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मददगार है.

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12 पंचायतों में शुरू हुआ उत्पादन

फिलहाल परवलपुर, नगरनौसा, बेन और करायपरसुराय प्रखंड की 12 पंचायतों में जैविक खाद का उत्पादन शुरू हो चुका है. मई पंचायत से तैयार हुई पहली खेप का नमूना गुणवत्ता जांच के लिए भेजा गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद को किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि शेष प्रखंडों में भी जल्द उत्पादन शुरू हो जाएगा. इससे एक ओर गांवों में जमा हो रहे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा होगा, वहीं दूसरी ओर किसानों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद उपलब्ध हो सकेगी.

स्वच्छता और कृषि दोनों को फायदा

जिला प्रशासन का मानना है कि इन यूनिटों के चालू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्थित होगा और खुले में कचरा फेंकने की समस्या कम होगी. इससे गांवों में स्वच्छता का स्तर बढ़ेगा और बीमारियों का खतरा भी घटेगा. कृषि के लिहाज से यह पहल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। रासायनिक खाद की बढ़ती कीमतों और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच जैविक खाद खेती की लागत घटाने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी.

लक्ष्य की ओर बढ़ रहा जिला

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत नालंदा को स्वच्छ और कचरा मुक्त जिला बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है. जिला प्रशासन ने निर्माणाधीन 49 यूनिटों को भी जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है ताकि सभी पंचायतों में कचरा प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध हो सके. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना की है. उनका कहना है कि अगर नियमित रूप से कचरे का संग्रहण और प्रसंस्करण होता रहा तो गांव साफ-सुथरे होंगे और किसानों को खेती में भी लाभ मिलेगा. जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में नालंदा के हर प्रखंड में अपशिष्ट प्रसंस्करण यूनिट पूरी तरह क्रियाशील हो जाए, जिससे स्वच्छता अभियान को जमीनी स्तर पर नई गति मिले.

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