बिहार में ताइगा फ्लायकैचर का पहली बार रिकॉर्ड, नालंदा डीएफओ कार्यालय में दिखा प्रवासी पक्षी

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नालंदा डीएफओ कार्यालय परिसर में ताइगा फ्लायकैचर

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बिहार के नालंदा में ताइगा फ्लायकैचर का दुर्लभ अवलोकन हुआ है. यह छोटा प्रवासी पक्षी एशिया और रूस के जंगलों से आता है. शहरी हरित क्षेत्र इसके लिए महत्वपूर्ण ठिकाना बनते हैं.

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Migratory Bird Nalanda: बिहार की पक्षी विविधता में एक महत्वपूर्ण प्रवासी पक्षी का दस्तावेजीकरण हुआ है. ताइगा फ्लायकैचर को शुक्रवार, 18 सितंबर को नालंदा डीएफओ कार्यालय परिसर में देखा गया. अवलोकन के दौरान इसकी कॉल भी रिकॉर्ड की गयी. वन विभाग के अनुसार, बिहार में ताइगा फ्लायकैचर का यह अवलोकन प्रवासी पक्षियों की आवाजाही के अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है.

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डीएफओ राजकुमार एम ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि ताइगा फ्लायकैचर छोटा कीटभक्षी प्रवासी पक्षी है. इसका प्रजनन क्षेत्र मुख्य रूप से उत्तरी एशिया और रूस के विस्तृत वन क्षेत्रों में माना जाता है. प्रवास और शीतकाल के दौरान यह दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देता है.

हरित क्षेत्रों में बनाता है अस्थायी ठिकाना

डीएफओ ने बताया कि प्रवास के दौरान ताइगा फ्लायकैचर पेड़ों और झाड़ियों से युक्त विभिन्न स्थानों में आश्रय लेता है. बगीचे, खुले वन क्षेत्र, नदी और जलस्रोतों के आसपास की हरित पट्टियां तथा शहरों के शांत और पेड़ों से घिरे परिसर इसके लिए अनुकूल पड़ाव हो सकते हैं.

नालंदा डीएफओ कार्यालय परिसर में इस पक्षी का दिखना शहरी क्षेत्रों में मौजूद हरित परिसरों की उपयोगिता को भी रेखांकित करता है. ऐसे परिसर प्रवासी पक्षियों के लिए विश्राम और भोजन के अस्थायी स्थल की भूमिका निभा सकते हैं.

छोटे कीटों को बनाता है भोजन

ताइगा फ्लायकैचर मुख्य रूप से छोटे कीटों और सूक्ष्म अकशेरुकी जीवों को भोजन के रूप में ग्रहण करता है. यह पेड़ की शाखा या झाड़ी पर बैठकर आसपास उड़ने वाले कीटों पर नजर रखता है. मौका मिलते ही अचानक उड़ान भरकर कीट को पकड़ता है और फिर अपनी पूर्व बैठने की जगह पर लौट आता है.

प्रवास के दौरान इस तरह के हरित क्षेत्र पक्षी को भोजन और ऊर्जा प्राप्त करने में मदद करते हैं. यही वजह है कि प्रवासी पक्षियों के लिए शहरों के भीतर मौजूद पेड़-पौधों से युक्त स्थान भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

कॉल रिकॉर्ड होने से मजबूत हुआ दस्तावेजीकरण

विशेषज्ञों के लिए पक्षी की कॉल उसकी पहचान का महत्वपूर्ण आधार होती है. शुक्रवार को नालंदा डीएफओ कार्यालय परिसर में अवलोकन के दौरान ताइगा फ्लायकैचर की कॉल रिकॉर्ड की गयी. इससे इस अवलोकन के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण में अतिरिक्त मदद मिली है.

डीएफओ ने बताया कि बिहार में ऐसे प्रवासी पक्षियों की नियमित निगरानी से प्रदेश की पक्षी विविधता, उनके प्रवास मार्ग और बदलते आवासों को समझने में मदद मिल सकती है. साथ ही, अलग-अलग मौसम में प्रवासी पक्षियों के पड़ाव और उनके लिए उपलब्ध प्राकृतिक एवं शहरी हरित क्षेत्रों की उपयोगिता का भी अध्ययन किया जा सकेगा.

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