तेज बारिश होते ही स्कूल में हो जाती छुट्टी

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बेनीपट्टी : प्रखंड क्षेत्र के प्लस टू लोरिक उच्च विद्यालय तिसियाही के सैकडों छात्र व छात्रओं को विद्यालय में व्याप्त संसाधनों की कमी का दंश ङोलना पड़ रहा है. स्कूल में कमरों के अभाव व संसाधन की घोर कमी के कारण छात्र-छात्रओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इससे स्कूल के तकरीबन […]

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बेनीपट्टी : प्रखंड क्षेत्र के प्लस टू लोरिक उच्च विद्यालय तिसियाही के सैकडों छात्र व छात्रओं को विद्यालय में व्याप्त संसाधनों की कमी का दंश ङोलना पड़ रहा है. स्कूल में कमरों के अभाव व संसाधन की घोर कमी के कारण छात्र-छात्रओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इससे स्कूल के तकरीबन 400 छात्र-छात्रओं का पठन पाठन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
बता दें कि विद्यालय अपने स्थापना काल से ही उपेक्षा का शिकार है. सरकार शिक्षा में विकास के चाहे जितना भी दावा कर ले, लेकिन विकास कार्यों के तमाम दावे यहां आकर दम तोड़ती दिख रही है. जबकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के करीब आधे दर्जन पंचायत के सैकड़ों गरीब बच्चे पढ़ाई की खानापूरी करने को विवश हैं.
यहां आधे दर्जन से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त रहने के कारण कई विषयों की पढ़ाई नहीं हो पाती है. यहां न केवल कमरे और संसाधनों का घोर अभाव है. बल्कि चहारदीवारी नहीं होने के वजह से विद्यालय परिसर लावारिस मवेशियों, जुआड़ियों व शराबियों के अड्डा में तब्दील रहता है. इससे खासकर छात्रएं विद्यालय आने से हिचकती है. छात्रों का कहना है कि विद्यालय में उपस्थिति नहीं दर्ज होगी तो सरकार की योजनाओं से उन्हें वंचित रहना होगा.
स्वर्णिम इतिहास रहा
1972 में स्थापित इस विद्यालय ने एक से बढ़कर एक होनहार छात्र दिये. ये सभी आज देश व विदेश में कई पदों को सुशोभित कर समाज का नाम रोशन कर रहे हैं, लेकि न वर्तमान में विद्यालय की स्थिति इतनी बदतर हो गयी है कि छात्रों का पढ़ना तो दूर सही से खड़े भी नहीं हो सकते हैं. तीन कमरों में महज पांच शिक्षकों के सहारे छात्र को भेड़-बकरियों की तरह बैठाकर पढ़ाया जाता है.
वर्षा के दिनों में इन कमरों से पानी टपकने लगती है. लिहाजा तेज बारिश होने की स्थिति में छुट्टी दे दी जाती है. पूर्व विद्यालय प्रभारी के द्वारा वर्तमान प्रभारी श्री झा को वित्तीय प्रभार ससमय नहीं देने के कारण विद्यालय के सभी विकास कार्य बाधित है. विभाग को इस समस्या से बार-बार अवगत कराये जाने के बावजूद समस्या जस का तस बना है.
क्या कहते हैं प्रभारी प्रधानाध्यापक
प्रवीण कुमार झा ने बताया कि ससमय अगर विद्यालय के साथ वित्तीय प्रभार मिल गया होता तो शायद स्कूल का ये हाल नहीं होता. स्कूल के कमरों की स्थिति के संबंध में विभाग को कई बार पत्र प्रेषित कर उक्त समस्या से अवगत कराया जा चुका है. तीन कमरों को छोड़कर किसी भी कमरे में पढ़ाई कराना संभव नहीं है.
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