ढाई हजार यात्रियों का दिल्ली व मुंबई जाना हुआ मुश्किल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Nov 2017 6:47 AM (IST)
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रेल यात्रा. दो ट्रेनों के रद्द होने से आरक्षण करा कर फंसे यात्री रेलवे को लगी लाखों रुपये की चपत बमुश्किल दो मांग पत्र पर ही बन पाता आरक्षण दरभंगा : लगातार बढ़ती जा रही लेटलतीफी को देखते हुए रेलवे ने इस क्षेत्र से चलनेवाली दो ट्रेनों को रद्द घोषित कर दिया है. ससमय गाड़ी […]
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रेल यात्रा. दो ट्रेनों के रद्द होने से आरक्षण करा कर फंसे यात्री
रेलवे को लगी लाखों रुपये की चपत
बमुश्किल दो मांग पत्र पर ही बन पाता आरक्षण
दरभंगा : लगातार बढ़ती जा रही लेटलतीफी को देखते हुए रेलवे ने इस क्षेत्र से चलनेवाली दो ट्रेनों को रद्द घोषित कर दिया है. ससमय गाड़ी के परिचालन के नजरिये से यह निर्णय लिया गया है. इस निर्णय से एक झटके में ढाई हजार यात्री बेटिकट हो गये हैं. महीनों पूर्व आरक्षण लेकर निश्चिंत यात्रियों के सामने ऐन मौके पर फिर से आरक्षण की समस्या खड़ी हो गयी है. उनकी यात्रा को रद्द हो ही गयी है, अब आगे सफर की समस्या ने चिंता में डाल दिया है. कारण किसी भी ट्रेन में आरक्षण उपलब्ध नहीं है.
तत्काल टिकट मिलना टेढ़ी खीर है. ऐसे में जरूरी काम से जानेवाले यात्री फंस गये हैं. बता दें कि विभाग ने नई दिल्ली जानेवाली 12561 स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस तथा अमृतसर जानेवाली 14649 सरयु यमुना एक्सप्रेस को कैंसिल कर दिया है. इसमें स्वतंत्रता सेनानी गुरूवार को जहां रद्द रही, वहीं शुक्रवार को सरयु यमुना कैंसिल रहेगी.
झटके में हो गये बेटिकट
विशेषकर इस क्षेत्र की ट्रेनों में यात्रियों के दबाव को देखते हुए यात्रियों ने महीनों पहले ही अपना आरक्षण इन ट्रेनों में करवा रखा था.
रेलवे के नियमानुसार किसी भी लंबी दूरी की ट्रेन में चार महीना यानी 120 दिन पूर्व आरक्षण करवाया जा सकता है. इसे देखते हुए यात्रियों ने काफी पहले ही अपना बर्थ बुक करा रखा था. इसी बीच गत आठ नवंबर को पूर्व मध्य रेल की ओर से मिले आदेश के आलोक में समस्तीपुर रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक वीरेंद्र कुमार ने इन दोनों ट्रेनों के रद्द रहने की सूचना सार्वजनिक कर दी. अचानक आये इस आदेश से आरक्षण करा चुके यात्री बिना टिकट के हो गये.
ढाई हजार यात्री हलकान
नयी दिल्ली जानेवाली स्वतंत्रता सेनानी में स्लीपर क्लास के 11 बोगी हैं. एक बोगी में 80 यात्रियों के लिए बर्थ आरक्षण की व्यवस्था है. इस नजरिये से 880 यात्री तो सिर्फ इस श्रेणी के बेटिकट हो गये.
वहीं सरयू यमुना एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की सात बोगियां हैं. इसमें प्रत्येक बोगी में 72-72 यात्रियों का आरक्षण होता है. यानी इस श्रेणी के ही करीब पांच सौ यात्री इस ट्रेन में बिना टिकट के हो गये. इसके अलावा सरयू यमुना में एसी थ्री के कंपोजिट कोच को शामिल कर दो बोगियां हैं.
वहीं स्वतंत्रता सेनानी में दो एसी थ्री व एक एसी टू कंपोजिट व एक पूरी बोगी एसी टू की है. करीब ढाई हजार लोगों के समक्ष आरक्षण करवाने की समस्या खड़ी हो गयी है.
बढ़ी यात्रियों की भीड़
छठ के बाद जैसे ही जावक ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ में इजाफा हुआ, वैसे ही ट्रेनों की लेटलतीफी आरंभ हो गयी. समय के साथ में इसमें वृद्धि शुरू हो गयी. लगातार बढ़ती जा रही इस लेटलतीफी के कारण दूसरी ट्रेनों के परिचालन पर भी असर पड़ने लगा. मेंटेनेंश के साथ ही ट्रेन की धुलाई प्रभावित होने लगी. समय पर परिचालन कराने के लिए इसे रद्द कर दिया गया है.
रतजगा के बाद भी लोगों को नहीं मिल रहा तत्काल टिकट
विभाग को हुआ 15 लाख रुपये का नुकसान
इन दोनों ट्रेनों के रद्द हो जाने से विभाग को लगभग 15 लाख का नुकसान हुआ है. स्वतंत्रता सेनानी में अगर सिर्फ दरभंगा से स्लीपर क्लास के आरक्षण से होनेवाली आय को देखें तो करीब चार लाख 70 हजार का नुकसान हुआ है. इसी तरह तीन लाख दो हजार का चूना सरयू यमुना एक्सप्रेस से लगा है. यहां बता दें कि इस श्रेणी में तत्काल कोटा के लिए बर्थ निर्धारित है, जिसका किराया सामान्य से अधिक है. इसके अतिरिक्त वातानुकूलित श्रेणी से भी मोटी रकम की हानि हुई है.
इन दोनों ट्रेनों में वेटिंग टिकट की लंबी फेहरिस्त तो चल ही रही है, साथ ही सामान्य कोच में भी सैकड़ों की संख्या में यात्री सफर करते हैं.
पैसा वापस, वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
रेलवे ने ट्रेन कैंसल होने के बाद यात्रियों को टिकट लेने के समय ली गयी पूरी राशि विभाग ने वापस कर दी, लेकिन यात्रा से वंचित हुए यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है. लिहाजा यात्रियों के सामने समस्या विकराल हो गयी है.
तत्काल टिकट टेढ़ी खीर
ऐसी स्थिति में यात्रियों के सामने तत्काल टिकट के अतिरिक्त कोई दूसरा चारा नहीं रह गया है. तत्काल टिकट की स्थिति ऐसी है कि मुश्किल दो मांग पत्र पर ही आरक्षण टिकट निकल पाता है. वह भी तब जब मांग पत्र पर पूरे चार यात्रियों के नाम शामिल न हों, अगर ऐसा होता है तो दूसरे मांग पत्र पर आरक्षण नहीं बन पाता. वेटिंग आ जाता है. यात्रियों को रतजगा करना पड़ता है़
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