बरसात के बहाने . वार्डों में बारिश के पानी से बर्बाद हो गये सैकड़ों चादर, पर्दा व अन्य सामान
अधीक्षक की जांच में सिस्टर इंचार्जों के दावे पर उठ रही उंगली
दरभंगा : जुलाई महीने में भारी बारिश के कारण डीएमसीएच के विभिन्न वार्डों में रखे सैकड़ों चादर, किवाड़ व खिड़की का पर्दा, मेट्रस, कंबल व अन्य सामान पूरी तरह से बर्बाद हो गये. समय रहते लाखों की सामग्री का बचाव के कोई प्रयास नहीं हुए. और सब अधिकारियों के सामने पानी में भींगने से चादर, पर्दा, कंबल आदि सड़ कर बर्बाद हो गया.
यह हम नहीं विभिन्न वार्ड में तैनात सिस्टर इंचार्ज ने डीएमसीएच अधीक्षक को लिखित पत्र में कही है. कुल मिलाकर कहा जाये, तो बारिश के बहाने बड़े पैमाने पर घपला का प्रयास किया गया.
हालांकि सिस्टर इंचार्जों का पत्र मिलने पर डीएमसीएच अधीक्षक को भी घपले की आशंका है. सिस्टर इंचार्जों का पत्र मिलते ही अधीक्षक ने स्वास्थ्य प्रबंधक शंभु नाथ झा से पूरे मामले की जांच करायी. जांच में स्वास्थ्य प्रबंधक श्री झा ने जो रिपोर्ट अधीक्षक को सौंपी उसके अनुसार, अनुपयोगी सामान जिसे सही तरीके से नहीं रखा गया था, सिर्फ वही सामान बारिश के पानी में भींगा, जो क्षतिग्रस्त नहीं हुआ. जांच रिपोर्ट में वर्तमान में उपयोग में लाये गये सामान की क्षति नहीं पहुंचने की बात कही गयी है. स्वास्थ्य प्रबंधक की जांच रिपोर्ट के बाद अधीक्षक ने संबंधित सिस्टर इंचार्जों से स्पष्टीकरण पूछा.
स्पष्टीकरण के जवाब में भी सिस्टर इंचार्जों ने पुन: सामान के क्षतिग्रस्त होने का दावा किया है. यहां सवाल यह उठता है कि अधीक्षक द्वारा किये गये जांच सही है, तो उन्होंने इस मामले में क्या कार्रवाई की गयी. वैसे चर्चा है कि पहले से गायब चादर, पर्दा व अन्य सामान को पचाने की नीयत से इस तरह के हथकंडे अपनाये गये हैं.
अगर यह बात सही है, तो अस्पताल प्रशासन को बारीकी से इसकी जांच करानी चाहिए. जबकि अस्पताल प्रशासन स्पष्टीकरण पूछने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की. इससे अस्पताल प्रशासन पर भी उंगली उठ रही है.
डीएमसीएच में चादर की कमी नहीं है. हरेक मरीजों के लिए वार्ड में चादर की व्यवस्था है. अगर मरीजों को चादर नहीं दिया जाता है, तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जायेगी.
डॉ संतोष कुमार मिश्र, अधीक्षक डीएमसीएच
बिना चादर के सोने को मजबूर भर्ती मरीज
डीएमसीएच में प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये की चादर खरीद होने के बाद भी मरीजों को सतरंगी चादर नहीं मिलता है. यहां भर्ती मरीज या तो अपने घर से चादर लेकर आते हैं अथवा मरीज बिना चादर के ही मेट्रस पर सोने को मजबूर होते हैं. लेकिन डीएमसीएच प्रशासन इस मामले में पूरी तरह आंख मूंदे रहता है. बताया जाता है कि इस भी करीब 50 लाख रुपये मूल्य के सतरंगी चादर की खरीदारी हुई. मगर डीएमसीएच में भर्ती अधिकांश मरीजों को चादर नहीं मिलता है. मरीज के परिजन बताते हैं, मांगने पर बताया जाता है कि सभी चादर बारिश की पानी में गल गया.
