स्वाधीनता आंदोलन में संस्कृत समेत अन्य भारतीय भाषाओं की रही महती भूमिका

Published by :RANJEET THAKUR
Published at :12 Jan 2026 6:12 PM (IST)
विज्ञापन
स्वाधीनता आंदोलन में संस्कृत समेत अन्य भारतीय भाषाओं की रही महती भूमिका

मौके पर प्रो. अग्रवाल ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन में संस्कृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं की महती भूमिका रही है.

विज्ञापन

दरभंगा. मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान में सोमवार को निदेशक डॉ सुरेंद्र प्रसाद सुमन की अध्यक्षता में ‘संस्कृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं का साहित्य और स्वाधीनता आंदोलन’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. नवीन कुमार अग्रवाल ने उदघाटन किया. मौके पर प्रो. अग्रवाल ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन में संस्कृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं की महती भूमिका रही है. भारतीय सन्दर्भ में ‘स्वतंत्रता’ का अर्थ केवल औपनिवेशिक दासता का विरोध भर नहीं, बल्कि हमारी सुदीर्घ बौद्धिक परम्परा में यह आत्मस्वतंत्रता के विराट अर्थों में वैदिक साहित्य और उपनिषदों में मिलता है. यही दीर्घ वैचारिक परम्परा आजादी के आंदोलन में राजनीतिक स्वतंत्रता का नैतिक आधार बनी. कहा कि राष्ट्र और समाज की स्वाधीनता पर जब भी संकट छाता है, तो भाषाएं आगे आकर खड़ी हो जाती है.

स्वाधीनता आंदोलन में भागीदारी से बना भारतीय भाषाओं का आधुनिक साहित्य

मुख्य वक्ता सह दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि स्वाधीनता साहित्य की मूल चेतना है. भारतीय भाषाओं का आधुनिक साहित्य, स्वाधीनता आंदोलन में भागीदारी से बना है. संस्कृत साहित्य में स्वाधीनता के प्रश्न बहुत गहराई से आए हैं. वहां यह समझा गया कि स्वतंत्रता केवल भावनाओं का मामला नहीं है. आर्थिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है.

स्वतंत्रता आंदोलन में संस्कृत की भूमिका चमत्कृत करती

रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष रविभूषण ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में संस्कृत की भूमिका चमत्कृत करती है. ब्रिटिश शासन के खिलाफ अनेक संस्कृत पत्रिकाएं निकलती थी, जिनमें अरुणोदय, संस्कृत चंद्रिका, संस्कृत संजीवनम, ज्योतिष्मती आदि प्रमुख है.

संस्कृत साहित्य ने स्वाधीनता आंदोलन को गति प्रदान की

लनामिवि के प्रो. प्रभाकर पाठक ने कहा कि तत्कालीन संस्कृत साहित्य से ही नहीं बल्कि प्राचीन संस्कृत साहित्य से भी स्वाधीनता आंदोलन को प्रेरणा मिल रही थी. संस्कृत साहित्य ने नेपथ्य से मुख्य भूमिका में आकर स्वाधीनता आंदोलन को गति प्रदान की है. निदेशक डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि भारत की जितनी भाषाएं हैं, सबका केंद्रीय प्रश्न स्वाधीनता है. कार्यक्रम के दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रभाकर पाठक तथा संचालन डॉ रामबाबू आर्य ने किया. दूसरे सत्र में कवि शंकर प्रलामी, इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक संतन कुमार राम आदि ने विचार रखा. मौके पर शोध संस्थान के पूर्व निदेशक देव नारायण यादव, हीरालाल सहनी, डॉ विनीता कुमारी, मनोज झा, विनोद विनीत, डॉ गौतम कुमार, डॉ अनामिका सुमन, डॉ संतोष कुमार यादव आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
RANJEET THAKUR

लेखक के बारे में

By RANJEET THAKUR

RANJEET THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन