छह हजार रुपये के लिए पति-पत्नी ने बदला वार्ड

Published at :19 Sep 2017 5:38 AM (IST)
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छह हजार रुपये के लिए पति-पत्नी ने बदला वार्ड

दरभंगा : शहरी क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को राहत मुहैया कराना नगर निगम प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गयी है. सर्वेक्षण सूची में गड़बड़ी की वजह से जहां एक ओर एक महीना से अधिक गुजर जाने के बाद भी पीड़ित राहत की आस में बैठे हैं, वहीं मिली सूची में सुधार कराना निगम […]

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दरभंगा : शहरी क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को राहत मुहैया कराना नगर निगम प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गयी है. सर्वेक्षण सूची में गड़बड़ी की वजह से जहां एक ओर एक महीना से अधिक गुजर जाने के बाद भी पीड़ित राहत की आस में बैठे हैं, वहीं मिली सूची में सुधार कराना निगम के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

खामियाजा प्राकृतिक आपदा से त्रस्त शहर के बाढ़ पीड़ित भुगत रहे हैं. कारण सर्वेक्षण सूची में निर्धारित मानक से काफी अधिक परिवार का नाम शामिल कर दिया गया है. अब निगम पसोपेश में है कि आखिर पीड़ितों को किस आधार पर राहत उपलब्ध कराया जाये. सूची की फिर से समीक्षा कर इसे दुरुस्त कराने की कोशिश में निगम प्रशासन जुटा है.

एक माह पूर्व ही शुरू हुआ सर्वेक्षण
बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए डीएम डाॅ. चंद्रशेखर सिंह के आदेश पर सीओ राकेश कुमार ने 22 अगस्त को ही नगर क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों की सर्वेक्षण सूची तैयार करने की कवायद शुरू कर दी थी. इसके लिए स्कूल के शिक्षकों, वार्ड तहसीलदार एवं निगम के जेई को पर्यवेक्षक एवं नगर प्रबंधक नरोत्तम कुमार साम्राज्य व नगर सहायक अभियंता सऊद आलम को नोडल पदाधिकारी बनाया गया था.
दो बिंदुओं पर सर्वेक्षण का निर्देश :पीड़ितों की सर्वेक्षण सूची बनाये जाने को लेकर जारी पत्र में दो बिंदुओं पर सर्वेक्षण करने के लिए कहा गया था. बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकान की क्षति पूर्ति के लिए पीड़ितों का क्षतिग्रस्त मकान के साथ फोटो लेकर सूची तैयार करनी थी. वहीं उस बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का सर्वे करना था जहां पांच दिनों से बाढ़ का पानी व जलजमाव से जनजीवन प्रभावित हुआ हो.
इन पर थी जिम्मेवारी : सर्वेक्षण के लिए प्रत्येक वार्ड में छह से आठ स्कूल के शिक्षक व वार्ड के तहसीलदार को लगाया गया. वहीं पर्यवेक्षण के लिए जेई उदयनाथ झा, अनिल कुमार चौधरी, संजय शरण सिंह को लगाया गया. साथ ही किये जा रहे सर्वेक्षण के लिए नोडल पदाधिकारी नगर प्रबंधक नरोत्तम कुमार साम्राज्य एवं नगर सहायक अभियंता सऊद आलम को प्रतिनियुक्त किया गया.
पति-पत्नी का अलग-अलग जगह नाम : बाढ़ राहत के लिए तैयार की जा रही पीड़ितों को सूची में इस तरह की गड़बड़ी के लिए कई दबाव वजह बने. सर्वे कार्य में जुटे कर्मियों पर राजनीतिक दबाव था. छह हजार का लाभ लेने के लिए कर्मियों पर अनावश्यक दबाव बनाकर पति ने एक से तो पत्नी दूसरे कर्मी से तो परिवार के अन्य सदस्य तीसरे कर्मी के माध्यम से अपना नाम सूची में दर्ज करवाया है. सूची में सर्वेक्षण जनगणना-2011 से अधिक नाम आने से निगम के पास समस्या खड़ी हो गई है, आखिर कैसे इसे कम किया जाये. वही सूत्रों की मानें तो नाम दर्ज करवाने के लिए 200 से 400 रुपये का खेल भी हुआ है.
शत-प्रतिशत से भी लंबी हो गयी प्रभावितों की सूची
पारिवारिक सर्वेक्षण सूची 2011 के अनुसार वार्ड की जनसंख्या को आधार मानकर तैयार करना था. जनगणना के अनुसार वार्ड एक में 1559, दो में 1309, तीन में 1201, चार में 1401, छह में 1140, सात में 1549, आठ में 1458, नौ में 1382, 10 में 1091, 20 में 1185, 21 में 1142, 22 में 1533, 23 में 1116, 24 में 1141, 25 में 657, 29 में 779 तथा 30 में 1318 परिवार हैं. सूत्रों के अनुसार तैयार की गयी सूची में वार्ड नंबर आठ में 1956, नौ में 1782, 23 में 1604, छह में 950, सात में 657, 25 में 614, तीन में 337, 40 में 540, 30 में 1000 के अलावा अन्य वार्डों का भी आंकड़ा कमोबेश ऐसा ही है.
शहर के तीन वार्ड पूर्ण रूप से बाढ़ प्रभावित
सर्वेक्षण को लेकर प्रशासन ने वार्ड नंबर 8, 9, 23 को बाढ़ से पूर्ण प्रभावित माना, वही आंशिक रूप से बाढ़ प्रभावित वार्डों में वार्ड संख्या 1, 2, 3, 4, 6, 7, 10, 20, 21, 22, 24, 25, 29, 30, 31, 32, 38, 39 व 40 को शामिल किया गया.
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