वाजितपुर में कई घर जमींदोज

Published at :27 Aug 2017 7:59 AM (IST)
विज्ञापन
वाजितपुर में कई घर जमींदोज

बदतर हालात. मोहल्ले की कई सड़कों पर कमरभर पानी दरभंगा : बाढ़ के कहर ने नगर निगम के वार्ड 23 के वाजितपुर मोहल्ले को क्षत विक्षत कर दिया है. जिन इलाके से पानी उतर रहा है वहां अब बाढ़ की बर्बादी का मंजर साफ-साफ दिखने लगा है. कच्चे मकान लगातार धराशायी होते जा रहे हैं. […]

विज्ञापन

बदतर हालात. मोहल्ले की कई सड़कों पर कमरभर पानी

दरभंगा : बाढ़ के कहर ने नगर निगम के वार्ड 23 के वाजितपुर मोहल्ले को क्षत विक्षत कर दिया है. जिन इलाके से पानी उतर रहा है वहां अब बाढ़ की बर्बादी का मंजर साफ-साफ दिखने लगा है. कच्चे मकान लगातार धराशायी होते जा रहे हैं. जो बचे हैं, उसमें रहना खतरे से खाली नहीं है. इस कारण कई परिवार घर से पानी उतर जाने के बाद भी वर्तमान स्थिति में लौटने को तैयार नहीं है. मोहल्ले में अधिकांश कम आयवर्ग के लोग रहते हैं. इनमें दैनिक मजदूरी, ठेला-रिक्शा आदि चलाने एवं खोमचा आदि लगाने वालों की संख्या सर्वाधिक है.
11 दिन बाद भी पानी दो से चार फीट तक मोहल्ले के अधिकांश भाग में जमां है. बागमती नदी के किनारे बसे इसे मोहल्ले में बाढ़ ने इस कदर तांडव मचाया कि कई झोपड़ियां जमींदोज हो गयी. रोजाना किसी न किसी का घर गिर रहा है. अबतक पानी का दर्द झेल रहे लोग, घर विहीन होने से टूटते जा रहे हैं. पीड़ितों के आंखों से निकल रहे आंसू उनके दर्द को बयां कर रहा है. मुहल्ला उजार सा दिख रहा है. पानी के कारण आवाजाही करने वालों की नामात्र की संख्या नजर आती है.
कई लोग जान बचाने के लिये मोहल्ले से पलायन कर चुके हैं. कुछ लोग घरों पर नजर रखने के लिये टेन्ट हाउस से पन्नी तिरपाल भारा पर ले किसी तरह छत पर टांग जैसे-तैसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं. अधिकांश लोग सीएम कॉलेज, मदरसा हमीदिया आदि में शरण लिये हुए हैं. अधिकांश चापाकल पानी में डूबे रहने से पानी पीने के लिए भी लोग तरस रहे हैं. अधिकांश बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन या जनप्रतिनिधि में से कोई अब तक हाल लेने नहीं पहुंचा है. न ही कोई मदद ही मिली है.
धराशायी हो रहे कच्चे मकान
बाढ़ का पानी प्रवेश किये 10 दिन बीत चुका है, लेकिन पीड़ितों की परेशानी कम होंने का नाम नही ले रही है. बाढ़ ने घर को घर नहीं रहने दिया. अधिकांश कच्चे मकान गिर गये हैं. घर का सामान भी जमींदोज हो चुका है. बाढ़ पीड़ितों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. पानी में कुछ कमी आने के साथ ही रोजाना झोपड़ी गिरने का क्रम जारी है. पीड़ित अपनी आंखों के सामने घर गिरते देख आंसू को रोक नही पा रहे.
अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मोहल्लेवासी नाराज
मोहल्ले में छाई
है वीरानगी
बाढ़ के तांडव से मोहल्ला विरान पड़ा है. अधिकांश घरों में अभी भी पानी भरे रहने के कारण शरण स्थल से लोग वापस नहीं लौटे हैं. जिन घरों के आंगन में दस दिन पहले तक चहल-पहल हुआ करता था, वह सुनसान पड़ा है. घरों में ताले लटक रहे हैं. जरूरी काम होने पर ही लोग सड़कों पर जमे पानी में प्रवेश करते हैं.
लंबी दूरी तय
कर लाते हैं पानी
बाढ़ के पानी में अधिकांश चापाकल डूब जाने से पेयजल की व्यवस्था मुसीबत बनी है. लोगों को लंबी दूरी तय कर पेयजल लाना पड़ता है. अन्न की कमी के साथ पेयजल की मार लोगों को परेशान किये है. स्थानीय परीक्षण सदा, टुनटुन दास आदि ने बताया कि सभी चापाकल पानी में डूबा हुआ है. पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन