कड़वा सच बोलने के लिए फांसी पर चढ़ा दिया जाये तो गम नहीं

Published at :27 Aug 2017 7:58 AM (IST)
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कड़वा सच बोलने के लिए फांसी पर चढ़ा दिया जाये तो गम नहीं

दरभंगा : पदाधिकारियों ने बाढ़ पीड़ितों के साथ जो छल किया है वह बरदाश्त के काबिल नहीं है. इस कड़वे सच कहने के लिए मुझे फांसी पर चढ़ा दिया जाए तो कोई गम नहीं है. यह बात भाजपा सांसद कीर्ति आजाद ने कटहलबाड़ी स्थित अपने आवास पर पत्रकारो को कही. उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों […]

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दरभंगा : पदाधिकारियों ने बाढ़ पीड़ितों के साथ जो छल किया है वह बरदाश्त के काबिल नहीं है. इस कड़वे सच कहने के लिए मुझे फांसी पर चढ़ा दिया जाए तो कोई गम नहीं है. यह बात भाजपा सांसद कीर्ति आजाद ने कटहलबाड़ी स्थित अपने आवास पर पत्रकारो को कही. उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को अब तक प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की सहायता मुहैया नहीं करायी गयी है.

बाढ़ के 11 दिन बीतने के बाद भी बाढ़ प्रभावित प्रखंडो की स्थिति की सही-सही रिपोर्ट भी जिला प्रशासन को प्राप्त नहीं हो सकी है. पदाधिकारी आपस में ही उलझे हुए हैं कि बाढ़ पीड़ितों के बीच सहायतार्थ राशि निकासी एवं व्ययन के लिए किन्हें प्राधिकृत किया गया है. उन्होंने कहा कि आपके समक्ष कोई भूख से तड़पते रहे और आप तब तक इंतजार करेंगे जब तक कि उसे भोजन देने का आदेश न मिल जाए. इस चक्कर में उसका दम ही बाहर निकल जाए. जनप्रतिनिधि इसके लिए आवाज उठाता है तो क्या लोकतंत्र में बोलने का अधिकार नहीं है.
आखिर जनप्रतिनिधि का क्या कर्तव्य रह गया है. अब तो प्रशासनिक पदाधिकारी से ही बोलना सीखना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी घर आंगन में घुसने एवं घरों के गिरने के कारण बाढग्रस्त गांव के विस्थापित परिवारों को पॉलीथिन या भोजन सामग्री का पैकेट भी सरकारी स्तर पर नहीं दिया गया है. यहां तक कि चारा की भी व्यवस्था जिला स्तर पर नहीं हो सकी.
राहत एवं बचाव को लेकर सरकार का जो आंकड़ा है वह बिल्कुल गलत है. सांसद श्री झा ने कहा कि मेडिकल भ्रमणशील टीम कहीं नही नजर आ रही है और ना ही उनके शिविर का कोई बैनर ही दिख रहा है. नाव अगर उपलब्ध होता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी. किसानों एवं मजदूर बरबाद हो चुके हैं.
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