शहर में महामारी का बढ़ा खतरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Aug 2017 5:14 AM (IST)
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जीना हुआ मुहाल. बाढ़ के पानी का रंग हुआ काला, उठने लगी दुर्गंध मोहल्लों में कहीं कमर तो कहीं घुटने तक पानी दरभंगा : बागमती नदी के जलस्तर में उफान थम गया है. शहर में पानी प्रवेश करने की रफ्तार कम हो गयी है, बावजूद शहर के करीब दो दर्जन मुहल्ले बाढ़ की चपेट में […]
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जीना हुआ मुहाल. बाढ़ के पानी का रंग हुआ काला, उठने लगी दुर्गंध
मोहल्लों में कहीं कमर तो कहीं घुटने तक पानी
दरभंगा : बागमती नदी के जलस्तर में उफान थम गया है. शहर में पानी प्रवेश करने की रफ्तार कम हो गयी है, बावजूद शहर के करीब दो दर्जन मुहल्ले बाढ़ की चपेट में हैं. करीब पांच सौ घरों में अभी भी तीन से पांच फुट पानी जमा है. सड़कें डूबी हुई हैं. कहीं कमर भर तो कहीं घुटने भर पानी जमा है. प्रशासन की ओर से नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गयी है. राहत वितरण का कार्य भी चालू नहीं हुआ है. पीड़ित परिवार बाढ़ की त्रासदी झेलने के लिए मजबूर हैं.
जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी से बीच से आवागमन कर रहे हैं. इधर बाढ़ का पानी स्थिर हो जाने के कारण इससे दुर्गंध उठने लगा है. रंग काला पड़ गया है. पीड़ितों को महामारी फैलने की आशंका सताने लगी है. प्रशासन ने अभी तक इस ओर तवज्जो नहीं दी है.
घरों में घुसी जलकुंभी
बाढ़ के पानी के साथ पीड़ित के घरों में जलकुंभी प्रवेश कर गया है. ऐसा लगता है मानो तालाब के बीच में मकान बना दिया गया हो. इधर कीड़े-मकोड़े व सांप की चहलकदमी भी तेज हो गयी है. रत्नोपट्टी, शुभंकरपुर, वाजितपुर, महदौली आदि मोहल्लों की बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि कई विषैले सांप बाढ़ के पानी में डूबे घरों के छप्पर पर नजर आ रहे हैं. इससे हमेशा जान सांसद में फंसी महसूस हो रही है.
काला पड़ा पानी का रंग
बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित मोहल्लों में पानी स्थिर हो गया है. न इसमें वृद्धि हो रही है न ही तेजी से कमी ही आ रही है. पिछले एक सप्ताह से जमा पानी अब सड़ने लगा है. जगह-जगह पानी का रंग काला पड़ गया है. इससे दुर्गंध उठना शुरू हो गया है. बुधवार को तीखी धूप निकलने के साथ ही दुर्गंध तेज हो गया. यहां पहुंचने पर सांस लेना भी मुश्किल होने लगा. इस विषम परिस्थिति के बीच बाढ़ पीड़ित वक्त गुजार रहे हैं.
शहर में चल रही नाव
स्थिति इतनी भयावह है कि एक सप्ताह गुजर जाने के बावजूद शहर की गलियों में नाव चल रही है. शुभंकरपुर, वाजितपुर, रत्नोपट्टी, सतिहारा, महदौली, चतरिया सहित दो दर्जन मोहल्लों में तीन से पांच फीट पानी अभी भी जमा है. लोगों को आवागमन करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. हालांकि प्रशासन की ओर से शुभंकरपुर के लोगों के लिए महज तीन नाव ही अभी तक उपलब्ध कराये गये हैं. क्षेत्रवासी पड़ोसियों के नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं.
खुले आसमान के
नीचे बिता रहे दिन
वार्ड संख्या आठ के सतिहारा टोला से विस्थापित दुर्गा देवी, चांदनी देवी, काजल देवी, आशा कुमारी, नीलम देवी, माया देवी आदि ने बताया कि बाढ़ ने उनका सब कुछ लील लिया है. विस्थापितों की जिंदगी जी रहे हैं. खुले आसमान के नीचे बच्चों के साथ दिन बिता रहे हैं. प्रशासन की ओर से अब तक हाल पूछने के लिए भी कोई नहीं पहुंचा है.
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