Darbhanga news: गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही 102 एंबुलेंस सेवा

Edited by PRABHAT KUMAR
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Darbhanga news:सरकारी एंबुलेंस सेवा 102 जिले में स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत कड़ी बनकर उभरी है.

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Darbhanga news: दरभंगा. सरकारी एंबुलेंस सेवा 102 जिले में स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत कड़ी बनकर उभरी है. सीमित संसाधनों के बावजूद यह सेवा जरूरतमंदों तक त्वरित सहायता पहुंचाकर मानव जीवन की रक्षा में अहम भूमिका निभा रही है. खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह जीवनदायिनी साबित हो रही है. आपात स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचाकर यह सेवा न सिर्फ जच्चा- बच्चा की जान बचा रही है, बल्कि आम लोगों के लिए भी भरोसेमंद सहारा बन गयी है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले दिसंबर माह में 102 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से 124 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया. इनमें प्रसव पूर्व जटिलता, प्रसव पीड़ा, एनीमिया, ब्लड प्रेशर, रक्तस्राव सहित कई गंभीर स्थितियां शामिल रही. विदित हो कि एंबुलेंस सेवा 102 का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क एवं सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि समय पर इलाज मिलने के साथ मातृ मृत्यु दर कम किया जा सके. ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के लिये यह सेवा वरदान साबित हो रही है,

समय से अस्पताल पहुंचने पर कई मरीजों की बची जान

दिसंबर माह में इस सेवा के माध्यम से कुल 170 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया. इनमें 33 गंभीर चिकित्सीय मामले थे. अचानक तबीयत बिगड़ना, हृदय एवं सांस संबंधी समस्याएं प्रमुख देखी गयी. इसके अलावा पांच एक्सीडेंट के मामले, तीन न्यू बार्न बेबी से जुड़े केस भी शामिल रहे. नवजात शिशुओं को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई. समय पर अस्पताल पहुंचने से कई मरीजों की जान बचाई जा सकी.

47 बेसिक लाइफ सपोर्ट वाहन का किया जा रहा परिचालन

स्वास्थ्य विभाग जिले में 70 एंबुलेंस का संचालन कर रहा है. इनमें 20 वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस शामिल है, जो गंभीर और रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए उपयोग में लाया जाता है. इसके अलावा तीन मर्चूरी वैन का संचालन किया जा रहा है, जिससे मृतकों को गंतव्य तक पहुंचाया जाता है. 47 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मरीजों, गर्भवती महिलाओं और प्राथमिक आपात मामलों के लिए लगातार सेवा दे रहा है.

24 घंटे अलर्ट मोड पर रहते कर्मी

एंबुलेंस सेवा में तैनात प्रशिक्षित चालक और मेडिकल स्टाफ 24 घंटे अलर्ट मोड में रहते हैं. कॉल मिलते ही बतायी जगह के लिये एंबुलेंस रवाना हो जाता है. जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लोकेशन तक पहुंचने में मदद करता है. विभाग का दावा है कि औसतन 15 से 20 मिनट के भीतर मरीज के पास एंबुलेंस पहुंच जाता है. इससे कीमती समय की बचत होती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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