डीएमसीएच का हाल: वेंटीलेटर पर आइसीयू, ओटी की हालत ठीक नहीं

दरभंगा : उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल डीएमसीएच पिछले दो दशक से अपनी बदहाली पर आंसू बहा है. एक जमाने में नेपाल की तराई से लेकर उत्तर बिहार के मरीजों के बेहतर इलाज के लिये डीएमसीएच का देश-विदेश में डंका बजता था. लेकिन आज हालात बिल्कुल उलट है. अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और सरकार […]
दरभंगा : उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल डीएमसीएच पिछले दो दशक से अपनी बदहाली पर आंसू बहा है. एक जमाने में नेपाल की तराई से लेकर उत्तर बिहार के मरीजों के बेहतर इलाज के लिये डीएमसीएच का देश-विदेश में डंका बजता था. लेकिन आज हालात बिल्कुल उलट है. अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और सरकार की उदासीनता के कारण डीएमसीएच का बुरा हाल है. चारो तरफ गंदगी का अंबार, समय से वरीय चिकित्सकों का नहीं आना और नर्सिंग स्टाफ द्वारा मरीजों का फॉलोअप नहीं करना,
मशीन उपकरणों का कबारखाना में तब्दील होने के कारण अब डीएमसीएच के इलाज पर मरीजों को भी भरोसा उठ गया है. सबसे बुरा हाल तो यह है कि गंभीर मरीजों के इलाज के लिये डीएमसीएच के सर्जरी, मेडीसीन, स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग में करोड़ो रुपये की लागत से इंटेंसिव केयर यूनिट का स्थापना किया लेकिन, स्थापना काल से ही आईसीयू की स्थिति बदहाल है.
आईसीयू की बदहाल स्थिति पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने कड़ा रूख अख्तियार किया है. रिपोर्ट में एमसीआई ने अन्य कमियों के अलावा आईसीयू की बदहाल स्थिति पर तीखी टिप्पणी के साथ एमबीबीएस की मान्यता पर भी प्रश्न खड़े किये हैं.
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