यहां पेयजल की भी व्यवस्था नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jun 2017 4:38 AM (IST)
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जेके कॉलेज. खराब पड़े हैं सात में से पांच चापाकल, सुविधाओं का अभाव बिरौल : अनुमंडल क्षेत्र का इकलौता जेके कॉलेज में छात्र-छात्राओं को बुनियादी सुविधा तक मयस्सर नहीं है. आलम यह है कि बच्चों के लिए यहां पेयजल का भी समुचित प्रबंध नहीं है. इस भीषण गर्मी में पेयजल संकट से छात्र-छात्राओं के साथ […]
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जेके कॉलेज. खराब पड़े हैं सात में से पांच चापाकल, सुविधाओं का अभाव
बिरौल : अनुमंडल क्षेत्र का इकलौता जेके कॉलेज में छात्र-छात्राओं को बुनियादी सुविधा तक मयस्सर नहीं है. आलम यह है कि बच्चों के लिए यहां पेयजल का भी समुचित प्रबंध नहीं है. इस
भीषण गर्मी में पेयजल संकट से छात्र-छात्राओं के साथ ही कॉलेज कर्मी जूझ रहे हैं. पेयजल कोई सुविधा नहीं रहने से छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी हो रही है.
मालूम हो कि इस कॉलेज में सात चापाकल में से पांच चापाकल खराब पड़े हैं. बताया जाता है कि पिछले करीब चार महीने से ये चापाकल पानी नहीं दे रहे. वैसे बांकी दो चापाकल भी खराब ही कहा जायेगा. कारण कुछ ही देर में इन दोनों चापाकलों से पानी निकलना बंद हो जाता है. कहीं से पानी लाकर इसे दुबारा चालू करना पड़ता है.
सूचना के बावजूद नहीं दूर हुई समस्या : कॉलेज में चापाकल खराब रहने से इस प्रचंड गर्मी में पानी पीने के लिये छात्र-छात्राओं से लेकर कर्मी तक को भटकना पड़ रहा है. पीएचइडी विभाग को इस समस्या के निदान के लिये कई बार कॉलेज प्रशासन द्वारा शिकायत की गयी, बावजूद पीएचडी विभाग इस समस्या के निदान के लिये कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. इसका खमियाजा छात्र-छात्राओं एवं कॉलेज कर्मी को भुगतना पड़ रहा है.
महिला शौचालय के समीप भी चापाकल खराब : कॉलेज में सात चापाकल हैं. इसमें पांच चापाकल खराब हैं. कॉलेज के प्राचार्य कार्यालय के समीप, परीक्षा नियंत्रण कक्ष के समीप, महिला शौचालय के समीप, स्वास्थ्य सदन के समीप एवं दूरस्थ शिक्षा केन्द्र के समीप का चापाकल खराब पड़ा है. वहीं दो चापाकल किसी तरह चल पा रहा है. इन दोनों चापाकल की स्थिति भी दयनीय ही है.
समस्या से जूझ रहे हाजारों विद्यार्थी : इस कॉलेज में सुदूर क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राएं पठन-पाठन के लिये आते हैं. इस कॉलेज में लगभग पांच हजार छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इतनी संख्या में नामांकन के बावजूद इस उमस भरी गर्मी में पेयजल का महासंकट बना हुआ है. हालांकि इस कॉलेज को नैक की ओर से ग्रेड बी प्रदान किया जा चुका है. फिर भी आज तक इस बुनियादी समस्या को समाप्त करने की दिशा में परिणादायी पहलकदमी नहीं हो रही है.
कॉलेजकर्मी भी नाकाम : परीक्षा विभाग के कर्मी अर्जुन झा का कहाना है कि करीब चार महीने से कॉलेज में चापाकल खराब है. इस समस्या के निदान के लिये कई बार पीएचडी विभाग को कहा गया, पर आज तक कोई पहल नहीं की गयी है.
लेखापाल क्रांति कुमार चौधरी ने बताया कि चापाकल खराब रहने से पानी पीने के लिये छात्र-छात्राओं से लेकर कॉलेज कर्मी को भटकना पड़ रहा है. बच्चों के साथ कॉलेजकर्मी अपने घर से पानी का बोतल लेकर आते हैं, लेकिन वह नाकाफी साबित होता है.
पानी के लिए भटकती रहतीं छात्राएं
श्रेया दीप बीए पार्ट थ्री की छात्रा है. वह कहती है, चापाकल खराब रहने के कारण इस भीषण गर्मी में कॉलेज आनेवाले छात्र-छात्राओं को अपनी प्यास बुझाने के लिये इस चिलचिलाती धूप में इधर से उधर भटकना पड़ता है. अविलंब चापाकल की मरम्मत होनी चाहिये.
छात्रा सुहासी कुमारी का कहना है कि खराब पड़े चापाकल के कारण अपने घर से बोतल में पानी भर कर लाती हूं. प्यास लगने पर इसी पानी से अपनी प्यास बुझाती हूं. यह सबसे बड़ी समस्या है.
वहीं सीमा कुमारी बताती है कि पेयजल की यहां घोर समस्या है. प्यास लगने से कंठ सूखने लगता है. किसी तरह समय पास करती हूं.
बी ए पार्ट थ्री का प्रैटिकल की परीक्षा देने पहुंची छात्रा रंजन कुमारी कहती है कि प्यास प्यास बुझाने के लिए पेयजल की कोई सुविधा नहीं रहने कारण चक्कर एवं उल्टी जैसे लगने लगता है. इस मौसम में प्यास भी ज्यादा लगती है. इसलिए कॉलेज प्रशासन को इस दिशा में तुरंत ठोस पहल करनी होगी.
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