राबड़ी सरकार में मंत्री रहे कांग्रेस नेता रविन्द्र नाथ मिश्र को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा

Updated at : 21 Feb 2023 4:18 PM (IST)
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राबड़ी सरकार में मंत्री रहे कांग्रेस नेता रविन्द्र नाथ मिश्र को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा

बूथ लूट और हत्या के आरोप में दोषी पाये गये कांग्रेस नेता व मांझी के पूर्व मंत्री रविन्द्र नाथ मिश्र को आजीवन कारावास की सजा मिली है. साथ ही विशेष एमपी एमएलए कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद देने के साथ ही 40000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है.

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छपरा. बूथ लूट और हत्या के आरोप में दोषी पाये गये कांग्रेस नेता व मांझी के पूर्व मंत्री रविन्द्र नाथ मिश्र को आजीवन कारावास की सजा मिली है. मंगलवार को अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (तीन) – सह – सांसद एवं विधायक की विशेष अदालत के न्यायाधीश नलीन कुमार पाण्डेय ने रविन्द्र नाथ मिश्र को उम्रकैद की सजा दी. साथ ही विशेष एमपी एमएलए कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद देने के साथ ही 40000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है. रविंद्र मिश्रा वर्ष 2000 में मांझी विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गए थे और राबड़ी देवी के सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री थे.

उमा बीन नामक एक मतदाता की मौत हो गयी थी

मांझी थाना कांड संख्या 28/1990 एवं सत्र वाद संख्या 143/06 के अनुसार 27 फरवरी 1990 को विधानसभा मतदान के दौरान मांझी विधानसभा क्षेत्र के मतदान केन्द्र संख्या 175,176 पर मतदान केंद्र लूट के क्रम में हुई गोलीबारी में मतदान करने आये उमा बीन नामक एक मतदाता की मौत हो गयी थी. कोर्ट ने दफा 302 के तहत उम्रकैद और 40000 का जुर्माना लगाया है. साथ ही दफा 353 में 2 वर्ष और 4000 का जुर्माना लगाया है. वहीं दफा171 एक में 1 वर्ष और एक हजार जुर्माना और दफा 136 के तहत 6 माह की सजा 1000 जुर्माने की सजा सुनाई है. सभी सजा साथ साथ चलेगी.


मांझी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी

इस मामले में मतदान केंद्र संख्या 175 के पीठासीन पदाधिकारी प्रणव कुमार मल्लिक और मतदान केंद्र संख्या 176 के पोलिंग एजेंट महेश प्रसाद यादव ने मांझी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसमें महेश प्रसाद यादव ने रविन्द्र नाथ मिश्र उनके भाई हरेंद्र मिश्र सहित अन्य को अपने प्राथमिकी में अभियुक्त बनाया था. मंगलवार को इसी मामले में रविन्द्र नाथ मिश्र को उम्रकैद की सजा सुनायी है. सजा के बाद इस मामले में सुनवाई करने वाले सहायक लोक अभियोजक ध्रुवदेव सिंह ने पूरी जानकारी दी. बचाव पक्ष से अधिवक्ता चंद्र मोहन तिवारी भी न्यायालय में उपस्थित थे.

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