क्रिसमस कल, सज गए शहर के सभी चर्च, छपरा के दो चर्चों में होगी प्रार्थना सभा, पास्टर देंगे मोटिवेशनल स्पीच

Christmas: गिरिजाघर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की जायेगी, वहीं युवाओं के मोटिवेशनल प्रोग्राम, ग्रुप सांग इत्यादि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा. डाकबंगला रोड स्थित एजी चर्च भी क्रिसमस के अवसर पर सजधज कर तैयार हो चुका है.
छपरा. क्रिसमस (Christmas) को लेकर गिरिजाघरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. ईसा मसीह के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए शहर के विभिन्न गिरिजाघरों में विशेष इंतजाम किये जा रहे हैं. पिछले एक सप्ताह से ही ईसाई धर्म के लोग अपने घरों में इशु के आगमन के उपलक्ष्य में कैरोल सिंगिंग कर रहे हैं. गिरिजाघरों की सजावट को अंतिम रूप दिया जा रहा है. शहर के मिशन रोड स्थित जार्ज चंद्रा मेमोरियल चर्च के पास्टर नीलमणि सिंह ने बताया कि पिछले 15 दिनों से ही क्रिसमस को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है.
गिरिजाघर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की जायेगी, वहीं युवाओं के मोटिवेशनल प्रोग्राम, ग्रुप सांग इत्यादि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा. डाकबंगला रोड स्थित एजी चर्च भी क्रिसमस के अवसर पर सजधज कर तैयार हो चुका है. इस चर्च के पास्टर एडी मसीह ने बताया कि ईसा मसीह का जन्मदिन पूरे उत्साह के साथ सेलिब्रेट किया जायेगा. चर्च में कल्चरल प्रोग्राम आयोजित होंगे. जीवन के प्रतीक क्रिसमस ट्री को भी आकर्षक रूप दिया जा रहा है. जो आज शाम तक बनकर तैयार हो जायेगा. छोटे बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, डांस और थीम सांग की प्रस्तुति के लिए भी तैयारियां की जा रही हैं.
शहर के डाकबंगला रोड स्थित कॉक्स मेमोरियल चर्च लगभग 100 वर्ष पुराना है. चर्च के संरक्षक प्रो एडी मसीह ने बताया कि अमेरिका के एजी मिशन ने इसकी स्थापना करायी थी जिसमें विधिवत रूप से 1914 में प्रार्थना सभा की शुरुआत हुई थी. प्रोटेस्टेंट को फॉलो करने वाले इस चर्च में पहले सिर्फ ईसाई धर्म के लोग ही आते थे पर अब धीरे-धीरे सभी धर्म के लोग यहां आकर प्रार्थना में शामिल होते हैं. चर्च के अंतर्गत एक स्कूल का भी संचालन होता है.
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मिशन रोड स्थित जार्ज चंद्रा मेमोरियल चर्च का अस्तित्व 1824 से है. इस चर्च की स्थापना जर्मन मिशन द्वारा करायी गयी थी. हालांकि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यहां रहने वाले इसाई समुदाय के लोग पलायन कर गये जिसके बाद यहां आरबीएमयू इंग्लिश मिशन आया जिसमे पुनः यहां प्रार्थना सभा की शुरुआत करायी और मिशन के कार्यों को गति मिलनी शुरू हुई.
पंद्रह वर्ष पहले तक मिशन रोड में ईसाई समुदाय की जनसंख्या काफी अधिक थी. हालांकि अधिकतर लोग दूसरे राज्यों में पलायन कर गये जिसके बाद इस कैम्पस में दो-तीन परिवार ही बचे हैं. मिशन की अधिकतर जमीन बिक चुकी है और अन्य समुदाय के लोग भी अब यहां रहने लगे हैं. कुछ दिन पूर्व तक अंग्रेजों का बनाया एक अस्पताल, पोस्टऑफिस व स्कूल यहां चलता था जो अब बंद हो चुका है.
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