Chhath Puja: सात समंदर पार अमेरिका में छठ करती है बिहार की यह महिला, जानें क्या है इस व्रत की महिमा

Chhath Puja 2022: संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्जिनिया में रहने वाली तपस्या चौबे मायके आकर छठ करती हैं. लेकिन किसी साल जब वह नहीं आ पाती हैं, ताे उन्हें बहुत दुख होता है. परिवार के साथ अपने परिवेश में छठ करने की बात ही कुछ और है. तपस्या कहती हैं कि ससुराल में उन्होंने पहली बाद 2006 में छठ किया था.
मुजफ्फरपुर: देश में रहें या विदेश में, छठ के मौके पर घर लौटना कौन नहीं चाहता. छठ में घर आकर जो खुशी मिलती है, यह वही जानता है जो इस पर्व में शामिल होता है. शहर के काफी लोग विदेश में रहते हैं. इनमें से हर कोई प्रत्येक वर्ष छठ में घर नहीं आ पाता. कभी बच्चे की परीक्षा, तो कभी काम से छुट्टी नहीं. ऐसे ही कुछ लोग हैं, जिन्हें छठ पर घर नहीं आने का मलाल है. परिवार के लोग भी इस बात से उदास हैं कि बेटा या बेटी इस बार छठ में नहीं आ पाओ. यहां ऐसे ही लोगों की यादें साझा की जा रही हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्जिनिया में रहने वाली तपस्या चौबे मायके आकर छठ करती हैं. लेकिन किसी साल जब वह नहीं आ पाती हैं, ताे उन्हें बहुत दुख होता है. परिवार के साथ अपने परिवेश में छठ करने की बात ही कुछ और है. तपस्या कहती हैं कि ससुराल में उन्होंने पहली बाद 2006 में छठ किया था. उस वक्त वर्जिनिया के पोटौमैक नदी पर उन्होंने छठी मइया को पहला अर्घ्य दिया था. इसी वर्ष वहां भारतीय मूल के लोगों ने छठ करना शुरू किया था. छठ का अर्घ्य देते वक्त घर नहीं जाने के गम में आंखों में आंसू आ गये थे. इसके बाद छठी मइया की कृपा हुई, तो छठ में इंडिया आकर छठ करने लगी. 2019 तक घर पर ही जाकर छठ करती थी, लेकिन कोरोना के कारण तीन वर्षों से घर नहीं जा सकी. इस बार भी यहीं छठ कर रही हूं.

किर्गिस्तान के ओश स्टेट यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रही वैभवी प्रियांजलि भी इस बार छठ में घर नहीं आ पा रही हैं. कॉलेज से छुट्टी नहीं मिलने के कारण इस बार वे वहीं रहेंगी. वैभवी प्रियांजलि कहती हैं लॉकडाउन के समय घर पर छठ मनायी थी, लेकिन जब से कॉलेज खुला है, घर जाना नहीं हो पाया. छठ में अपने परिवार को बहुत मिस करती हूं. वैभवी कहती हैं कि आज सपनों की तलाश में घर से दूर हूं, लेकिन अपनी संस्कृति और सभ्यता को कैसे भूल सकती हूं. मेरे लिए छठ पूजा एक पूजा नही, बल्कि एक परिवार का बड़ा उत्सव है. इसमें हम सभी भाई, बहन, मां, पापा, बुआ, फूफा सब एकत्रित होकर आस्था के साथ पूजा में शामिल होते हैं.
सूर्य उपासना तथा छठी मैया की अर्चना का महापर्व छठ पूजा का प्रारंभ आज से नहाय खाय यानी कद्दू भात के साथ शुरू हो रही है. यह व्रत संतान प्राप्ति, संतान की सुरक्षा तथा उसके सुखद जीवन के लिए किया जाता है. छठ पूजा की महिमा अनंत है. पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रियवद को विवाह के काफी समय बीत जाने के बाद भी संतना नहीं हुई. इसके बाद राजा ने महर्षि कश्यप से अपने मन की व्यथा कही. तब जाकर महर्षि कश्यप ने राजा को संतान के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराने का सुझाव दिया. इसके बाद राजा को एक पुत्र तो हुआ, लेकिन बालक की कुछ ही पल में मौत हो गयी. बेटे के वियोग में इतने दुखी थे कि वे भी अपने प्राण त्यागने लगे. तभी ब्रह्म देव की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं, और उनको षष्ठी की पूजा करने की सलाह दी. इसके बाद राजा ने नियम पूर्वक षष्ठी माता का व्रत किया. जिसके बाद राजा प्रियवद को एक स्वस्थ बालक की प्राप्ति हुई. बता दें की छठ को लेकर कई और लोककथाएं प्रचलित हैं.
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