Chhath Puja: केवल आस्था नहीं वैज्ञानिक कारणों से भी खास है छठ महापर्व, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Oct 2022 5:19 PM
Chhath Puja केवल आस्था और श्रद्धा का पर्व नहीं है. बल्कि इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है. आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ संपूर्णानंद तिवारी बताते हैं कि आस्था का त्योहार छठ को सूर्य पूजन का व्रत कहा जाता है. छठ पर्व त्योहार के दौरान उपवास रखने से स्वास्थ्य की दृष्टि से कई फायदे मिलते हैं.
Chhath Puja केवल आस्था और श्रद्धा का पर्व नहीं है. बल्कि इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है. आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ संपूर्णानंद तिवारी बताते हैं कि आस्था का त्योहार छठ को सूर्य पूजन का व्रत कहा जाता है. छठ पर्व त्योहार के दौरान उपवास रखने से स्वास्थ्य की दृष्टि से कई फायदे मिलते हैं. उगते सूरज को अर्घ्य देने के दौरान व्रतियों के धूप में खड़े रहने से शरीर को पर्याप्त विटामिन डी मिल जाता है. विटामिन डी हड्डियों के लिए फायदेमंद साबित होता है. यही मौका है जब सुबह की धूप मिल जाती है. वहीं आप व्रत रखती हैं, तो इससे आपके शरीर में हार्मोन्स का संतुलन बेहतर होता है. महिलाओं को होने वाली ज्यादातर समस्याओं के पीछे हार्मोनल असंतुलन जिम्मेदार होता है. ऐसे में व्रत रखने से शरीर में घटे-बढ़े हार्मोन्स बैलेंस होते हैं और आपका शरीर स्वस्थ और सेहतमंद रहता है. छठ पूजा का उपवास मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. पूजा प्रक्रिया के दौरान, एक रचनात्मक शांति मन में प्रबल होती है जो नकारात्मक ऊर्जा को शरीर से दूर करती है. यह प्राणिक प्रवाह को नियमित कर ईर्ष्या, क्रोध, और अन्य नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रित करती है. नमक नहीं खाने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. हर वक्त खाते रहने से या फिर ओवर डाइटिंग करने से आंत (बावेल्स ) का काम बढ़ जाता है और उसे आराम नहीं मिलता जिससे शरीर में कई व्याधियां उत्पन्न होती हैं.
आयुर्वेद के अनुसार सूर्य हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग है. माना जाता है सूर्य हमारे अस्तित्व का आधार है. छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देना (सूरज को देखते हुए जल चढ़ाना) जरूरी होता है. जो केवल सुबह और शाम के समय ही संभव हो सकता है. इसलिए यह त्योहार सूर्य के प्रति कृतज्ञता दर्शाने का दिन है. पानी में सूर्य देव को अर्घ्य देकर पंच परिक्रमा करना कठिन शारीरिक आसन की तरह से होता है. घाट पर छठ पूजा करने के दौरान भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही आसन व सूर्य नमस्कार यानी आसन व प्राणायाम दोनों ही हो जाता है. चार दिन तक चलने वाले छठ पूजा में पूरा अष्टांग योग दिखाई देता रहता है. छठ प्रकृति के हर उस अंग की उपासना है जो हठी है. जिसमें कुछ कर गुजरने की, कभी निराश न होने की, कभी हार ना मानने की, डूब कर फिर खिलने की, गिर कर फिर उठने की हठ योग है. जो हठ डूबते व उगते सूर्य में होता है. वही हठ छठ व्रतियों में है.
इस पूजा के समय जब आप अपने हाथों में जल लेते हैं और जल धीरे-धीरे उंगलियों से निकल जाता है, तब तक सूर्य को देखना जरूरी होता है. आयुर्वेद के अनुसार सूर्य को देखने से शरीर को ऊर्जा मिलती है. इसलिए, छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए की जाती है.
छठ पूजा का त्योहार पूरे भारत में मनाया जाता है. छठ पूजा को हिंदुओं का सूर्य देव की उपासना का सबसे प्रसिद्ध त्योहार माना जाता है. क्योंकि यह त्योहार षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है, इसलिए इसे छठ या सूर्य षष्ठी व्रत बोला जाता है. छठी मैया के इस त्योहार को साल में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में. हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले इस त्योहार को चैती छठ कहा जाता है और कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ त्योहार को कार्तिकी छठ कहा जाता है.
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