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बदला जीएसटी कानून, अब GST और आयकर दोनों नहीं करेंगे एक ही खाते की जांच

Updated at : 29 Jul 2021 11:05 AM (IST)
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बदला जीएसटी कानून, अब GST और आयकर दोनों नहीं करेंगे एक ही खाते की जांच

अब राज्य के किसी व्यापारी के एक ही खाते की जांच जीएसटी और आयकर दोनों विभाग नहीं करेंगे. इसे लेकर जीएसटी कानून में बदलाव किया गया है. ताकि व्यापारियों को बेवजह अतिरिक्त परेशानी न हो.

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पटना. अब राज्य के किसी व्यापारी के एक ही खाते की जांच जीएसटी और आयकर दोनों विभाग नहीं करेंगे. इसे लेकर जीएसटी कानून में बदलाव किया गया है. ताकि व्यापारियों को बेवजह अतिरिक्त परेशानी न हो. इसे लेकर जीएसटी कानून में केंद्र सरकार के स्तर से किये गये संशोधनों को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा में बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2021 पारित किया गया.

इसे डिप्टी सीएम सह वाणिज्य कर मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि इस नये विधेयक के पास होने से राज्य के व्यापारियों को भी सभी प्रावधानों का लाभ मिलेगा. इसमें आठ मुख्य बदलाव किये गये हैं. इसके तहत अब गलत करने वाले व्यापारियों पर दोगुना जुर्माना लगेगा. व्यापारियों को अपनी ऑनलाइन दर्ज की गयी सभी बिक्री के अनुसार टैक्स देना होगा. इनपुट टैक्स क्रेडिट पर बिना कागजात के क्रेडिट लेने पर रोक रहेगी.

अब किसी क्लब या संस्थान की तरफ से अपने सदस्यों को दिये जाने वाले किसी सामान को सप्लाई मानते हुए इन पर जीएसटी लगेगा. चार्टर्ड एकाउंटेंट से आडिट कराये जाने की अनिवार्यता समाप्त हो जायेगी. विलंब से कर भुगतान करने के कारण व्यवसयियों को क्रेडिट की राशि पर ब्याज नहीं लगेगा. व्यवसायिक द्वारा पोटल पर बिक्री अपलोड कर देने और टैक्स का भुगतान नहीं करने पर रोक लगायी जायेगी.

चालू वित्तीय वर्ष में अधिक कर्ज की छूट

बिहार सरकार को चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में अधिक कर्ज लेने की छूट मिल गयी है. इससे संबंधित बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2021 को विधानसभा से पारित किया गया. डिप्टी सीएम ने इसे प्रस्तुत करते हुए कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के मुकाबले चार प्रतिशत तक ऋण ले सकते हैं.

इसमें साढ़े तीन प्रतिशत ऋण उगाही की सुविधा होगी. शेष 0.5 प्रतिशत राशि उधार सीमा राज्य के लिए निर्धारित पूंजीगत व्यय पर आधारित होगी. 2020-21 में राजकोषीय घाटा 4.62 प्रतिशत है, जो इस वर्ष के लिए केंद्र सरकार के स्तर से निर्धारित पांच प्रतिशत की अधिसीमा से कम है.

विधेयक तर्कसंगत और स्पष्ट नहीं

जीएसटी संशोधन विधेयक पर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राम लाल खेतान ने कहा कि जीएसटी और आयकर पर नियंत्रण केंद्र का है. इसे राज्य सरकार कैसे नियंत्रण कर सकती है. यह विधयेक तर्क संगत और स्पष्ट नहीं है. बिहार राज्य खुदरा विक्रेता महासंघ के महासचिव रमेश चंद्र तलरेजा ने कहा कि इससे जांच का दोहराव नहीं होगा, लेकिन नये कानून से छोटे कारोबारियों में भय पैदा होगा.

लघु उद्योग भारती के महामंत्री सुमन शेखर का कहना है कि संस्थान द्वारा अपने सदस्यों को दिये जाने वाले उपहार पर जीएसटी लगाना गलत होगा. कई बार ग्राहक को आकर्षित करने के लिए ऐसा करना पड़ता है.

Posted by Ashish Jha

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