शहर में कोरम बन गया पैनोरमा फिल्म महोत्सव

Published at :09 May 2017 1:09 AM (IST)
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शहर में कोरम बन गया पैनोरमा फिल्म महोत्सव

बेतिया : गांधी के विचारों और उनके द्वारा दिये गये संदेश को आमजन तक पहुंचाने की जिस उम्मीद के साथ सरकार की ओर से पैनोरमा फिल्म महोत्सव आयोजित कराने के निर्देश दिये थे, उस उम्मीद की यहां दूसरे दिन ही हवा निकल गयी. कुशल प्रबंधन के अभाव व अधिकारियों के रूचि नहीं लेने से यह […]

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बेतिया : गांधी के विचारों और उनके द्वारा दिये गये संदेश को आमजन तक पहुंचाने की जिस उम्मीद के साथ सरकार की ओर से पैनोरमा फिल्म महोत्सव आयोजित कराने के निर्देश दिये थे, उस उम्मीद की यहां दूसरे दिन ही हवा निकल गयी.

कुशल प्रबंधन के अभाव व अधिकारियों के रूचि नहीं लेने से यह महोत्सव कोरम बन गया. हाल यह रहा कि भारी-भरकम बजट व तैयारी के बाद भी इसका कोई असर नहीं दिख रहा है. फिल्म व वृतचित्र देखने इक्का-दुक्का लोग ही पहुंच रहे हैं. जबकि जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए सभी अधिकारियों को जिम्मेवारी दी गयी थी. इसमें फिल्म देखने के लिए स्कूली छात्रों व शहर के लोगों को बुलाने, पेयजल, बैठने की व्यवस्था करने की जिम्मेवारी अफसरों को दी गयी थी, लेकिन दूसरे दिन भी सभी अफसर गायब दिखे. नतीजा इस पैनोरमा महोत्सव से जुड़े उद्देश्यों की हवा निकलती दिखी.
स्थानीय टाउन हाल में आयोजित इस महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को दो सत्रों में पांच फिल्में दिखाई गयी. पहले सत्र में सेवाग्राम, हम अपनी गंदगी साफ़ नहीं करेंगे तो कौन करेगा, मैंने गांधी को नहीं मारा, गांधी माई फादर का प्रदर्शन किया गया. वहीं दूसरे सत्र में रोड टू संगम दिखाया.
इस अवसर पर मौजूद फ़िल्म फेस्टिवल के एडमिन पियूष मधुकर ने कहा कि गांधी जी आज भी हमारे बीच प्रासंगिक है. आज जरूरत है गांधी जी के विचारों को नए पीढ़ी के बीच पहुंचाने का. इसी क्रम में चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष 2017-18 पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से गांधी पैनोरमा फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया है. साथ ही इस दौरान गांधी पेनोरमा फ़िल्म महोत्सव के चैयरमेन देवेन्द्र खंडेलवाल, कला संस्कृति एवम् युवा विभाग के सहायक निदेशक आनन्दी कुमार,संग्रहालय अध्यक्ष विमल तिवारी और पीआरओ सर्वेश कश्यप आदि लोग उपस्थित थे.
प्रदर्शित पहली फीचर फ़िल्म मैंने गांधी को नहीं मारा में एक ऐसे इंसान की मनोस्थिति को दिखाने की कोशिश की गई, जहां एक व्यक्ति को यह वहम हो जाता है कि उसने ही गांधी जी को मारा. दूसरी फीचर फ़िल्म गांधी माई फादर, महात्मा गांधी और उनके सबसे बड़े पुत्र हरिलाल गांधी का एक अजीब रिश्ता है.
अपने पिता के मानकों पर खरा उतरने में असमर्थ हरिलाल व्याकुल और जीवन में बिखर जाता है. दूसरे सत्र में प्रदर्शित तीसरी फीचर फ़िल्म रोड टू संगम थी. इस फिल्म में एक मुस्लिम मिस्त्री को उस कार की मरम्मत करनी है, जिसमें कभी महात्मा गांधी की अस्थियां रखी थी.
आज प्रदर्शित होनेवाली फिल्में
11 बजे से पहले सत्र में: मेकिंग आफ महात्मा गांधी, साबरमती
3 बजे से दूसरे सत्र में: लगे रहो मुन्ना भाई
विकास व समस्या पर जो दे ध्यान, वहीं हो पार्षद
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