कुष्ठ पीड़ित के साथ नहीं रहना चाहते कैदी

Published at :24 Jun 2015 8:53 AM (IST)
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कुष्ठ पीड़ित के साथ नहीं रहना चाहते कैदी

बगहा जेल प्रशासन के सामने आयी समस्या, करनी पड़ी अलग व्यवस्था बगहा : 19 जून को वाल्मीकिनगर थाने की पुलिस ने एक संदिग्ध को जेल भेजा था. गंडक बराज एसएसबी के ई कंपनी के जवानों ने संदिग्ध हालत में घूमते हुए संदिग्ध युवक को पुलिस को पकड़ कर दिया था. पकड़ा गया युवक मध्यप्रदेश के […]

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बगहा जेल प्रशासन के सामने आयी समस्या, करनी पड़ी अलग व्यवस्था

बगहा : 19 जून को वाल्मीकिनगर थाने की पुलिस ने एक संदिग्ध को जेल भेजा था. गंडक बराज एसएसबी के ई कंपनी के जवानों ने संदिग्ध हालत में घूमते हुए संदिग्ध युवक को पुलिस को पकड़ कर दिया था. पकड़ा गया युवक मध्यप्रदेश के रीवा जिले के अमहिया का है. दो-तीन दिनों तक तो संदिग्ध कैदी जेल के वार्ड में रहा, लेकिन बाद में उस वार्ड में रहने वाले अन्य कैदियों ने इसका विरोध किया. दरअसल, वह कैदी कुष्ठ रोग से ग्रसित है.

वार्ड के अन्य कैदियों को जब पता चला तो उन लोगों ने इसकी शिकायत जेल प्रशासन से की. जेलर अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि कैदी को कुष्ठ रोग है. उसके पैर में यह रोग है. स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी गयी है. उसके रहने के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था की गयी है.

कैदी का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

मंगलवार को जेल में चिकित्सक डा. मोहरम अंसारी ने कुष्ठ पीड़ित कैदी की स्वास्थ्य जांच की. उन्होंने बताया कि इस कैदी को वर्षो से यह रोग है. इसका उपचार नहीं हुआ है. कैदी को आवश्यक दवा एवं बचाव का तरीका बताया गया है. जिला में इसकी रिपोर्ट भेजी जायेगी.

हालांकि अन्य कैदियों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है. साफ – सफाई रहनी चाहिए. बगहा एक अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा एस एन महतो ने बताया कि कुष्ठ रोग से ग्रसित एक कैदी जेल में आया है. इसकी सूचना जेल प्रशासन ने दी थी. इस आलोक में प्रथम दृष्ट्या कैदी के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सक को भेजा गया था.

पकड़ा था वाल्मीकिनगर पुलिस ने

जून के प्रथम सप्ताह में इस संदिग्ध को वाल्मीकिनगर थाने की पुलिस ने पकड़ा था. दो दिनों तक थाने में पूछताछ भी हुई थी.

लेकिन पुलिस ने जब देखा कि उसके पैर में कुष्ठ है और उसके अपराधी होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले तो थाने से ही छोड़ दिया, लेकिन जब एसएसबी ने पकड़ा तो पुलिस वालों ने उसे धारा 190 के तहत एसडीएम कोर्ट में पेश किया और वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उल्लेखनीय है कि जब उसे पकड़ा गया था तो उसके पास से मात्र 20 रुपया व एक कंबल बरामद किया गया था.

.. और मैं घर से भाग आया

पीड़ित कैदी ने बताया कि मुङो यह रोग करीब दो वर्ष पूर्व हुआ था. उससे पहले इंदौर के श्री मौर चौक पर अपने पिता की कपड़ा सिलाई (टेलरिंग) की दुकान में काम करता था. दुकान अच्छा भला चल रही थी. अचानक यह रोग हो गया. लोग मुझसे नफरत करने लगे. सो, मैं घर छोड़ कर भाग गया

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