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कब होगा मेरे पति का अंतिम संस्कार!

बगहा : प्रखंड बगहा दो के दरदरी गांव में रामनरायण काजी के घर में सोमवार को मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था. दो वर्ष पूर्व इसी दिन चंदेश्वर घर से गया था. उसके बाद लौट कर नहीं आया. बहू गीता देवी के साथ उसकी सास मीना देवी आंगन में बैठी थी. वह अपनी किस्मत पर आंसू […]

बगहा : प्रखंड बगहा दो के दरदरी गांव में रामनरायण काजी के घर में सोमवार को मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था. दो वर्ष पूर्व इसी दिन चंदेश्वर घर से गया था. उसके बाद लौट कर नहीं आया. बहू गीता देवी के साथ उसकी सास मीना देवी आंगन में बैठी थी. वह अपनी किस्मत पर आंसू बहा रही थी. उसे इस बात का मलाल है कि दो वर्ष पूरे हो गये. उसके पुत्र चंदेश्वर का अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ.
मीना का कहना है कि मेरे पुत्र की आत्मा भटक रही होगी. आम तौर पर तो माता पिता का अंतिम संस्कार पुत्र करता है, लेकिन हम ऐसे बदकिस्मत माता-पिता हैं कि अपने पुत्र का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाये. उसका अंतिम संस्कार हो जाता तो शायद उसकी आत्मा को शांति मिलती. लेकिन पुलिस वाले मेरे पुत्र का अंतिम संस्कार भी नहीं करने देते. पिछले वर्ष जून में पुलिस ने पचफेड़वा गांव के समीप भपसा नदी से नर कंकाल बरामद किया था. वहीं नर कंकाल मेरे पुत्र का है. उसे पुलिस मुङो सौंप देती तो हम लोग उसका अंतिम संस्कार कर देते.
पहनती है विधवा का लिबास
रहस्यमय ढंग से गायब चंदेश्वर की पत्नी गीता देवी भी यह मान चुकी है, कि उसके पति की मौत हो चुकी है. 20 वर्ष की अवस्था में गीता विधवा हो गयी . वह विधवा वाली लिबास पहनती है. माथे में सिंदूर और बिंदिया नहीं लगाती है.
उसका कहना है कि मैं तो विधवा हो गयी हूं. पुलिस भले हीं नहीं मान रही है. लेकिन मुङो विश्वास है कि अब तक अगर मेरे पति जिंदा होते तो निश्चित तौर पर वे घर आ गये होते. या फिर मुङो से मोबाइल आदि से भी संपर्क किये होते. पुलिस भले नहीं मानती कि मैं विधवा हूं. लेकिन मैं समझ गयी हूं , मेरे पति की हत्या हो गयी है.
अब वे लौट कर आने वाले नहीं है. इस लिए मैं चाहती हूं कि मेरे पति की अस्थियां दी जाये. उसका हम लोग अंतिम संस्कार करें और मुङो इंसाफ मिले.
ससुराल में भी मातम
15 जून 2013 की देर शाम से रहस्यमय ढंग से चंदेश्वर की शादी दरदरी गांव में हीं हुई थी. उसकी शादी 23 जून 2013 को भागीरथ महतो की पुत्री गीता से हुई थी. इस लिए उसके ससुर भागीरथ महतो के घर में भी मातम का हीं माहौल था. बेटी की शादी करने के बाद चिंता मुक्त होने वाले पिता मायूस थे. बेटी की भविष्य को लेकर माता – पिता की परेशानी स्पष्ट दिख रही थी. भागीरथ महतो का कहना है कि मैं तो अब सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया हूं.
पुलिस से तो भरोसा हीं उठ गया है. अब तक पुलिस ने तो मेरे दामाद को खोजने में कुछ खास दिलचस्पी भी नहीं दिखायी. उन्होंने बताया कि मैंने तो अपनी बेटी की शादी रामनरायण काजी के पुत्र चंदेश्वर से की थी. वह अधिकांश वक्त अपने ससुराल में हीं रहती है. पति की अनुपस्थिति में उसे वहां कोई परेशानी नहीं होती है. उसके सास-ससुर बड़े लाड़ प्यार के साथ रखते हैं. फिर भी अभी गीता की अवस्था 20 वर्ष की है. बगैर पति के उसकी जिंदगी कैसे बीतेगी,यह सोंच कर मैं सिहर जाता हूं.
बोले एसपी
भपसा नदी से जो कंकाल बरामद हुआ था. उसकी जांच करायी गयी. फारेंसी रिपोर्ट आ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक कंकाल चंदेश्वर के नहीं थे. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
शफीउल हक, एसपी बगहा
Prabhat Khabar Digital Desk
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