बारिश का सीजन आया, पशुओं को लगवाएं टीके
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Jun 2015 8:38 AM (IST)
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बेतिया : बारिश के सीजन में पशुओं के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है. मॉनसून अपने साथ पशुओं के लिए ढ़ेर सारी बीमारी लेकर आता है. लिहाजा पशुपालक अभी से अलर्ट हो जाएं. गलाघोंटू और खुरपका-मुंहपका का टीका जरूर लगवा लें. इसके लिए पशुपालन विभाग के कर्मी की टीम घर-घर जाकर टीका निश्शुल्क लगा रही […]
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बेतिया : बारिश के सीजन में पशुओं के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है. मॉनसून अपने साथ पशुओं के लिए ढ़ेर सारी बीमारी लेकर आता है. लिहाजा पशुपालक अभी से अलर्ट हो जाएं. गलाघोंटू और खुरपका-मुंहपका का टीका जरूर लगवा लें. इसके लिए पशुपालन विभाग के कर्मी की टीम घर-घर जाकर टीका निश्शुल्क लगा रही है.
बारिश संग फैलता है गलाघोंटू
गलाघोंटू वैक्टीरिया जनित रोग है. मॉनसून आने पर तेजी से फैलता है. इस रोग को घुरखा, घोंटुआ, अषढ़िया, डकहा रोग भी कहते हैं. इससे पशु की अकाल मौत हो जाती है.
खुरपका-मुंहपका भी जानलेवा
गलाघोंटू की टीका लगवाने के बाद पशुपालक खुरपका-मुंहपका का टीका लगवा लें.यह रोग विषाणु जनित रोग है. इस रोग से प्रभावित पशु ठीक होने के बाद भी महीनो हांफते रहते हैं. शरीर के रोएं व खुर बहुत बढ़ जाते हैं. प्रजनन क्षमता कम हो जाती है.
रोग के लक्षण
पशु तेज बुखार से कांपने लगता है
पशु सुस्त हो जाता है, आंखे लाल हो जाती
पशु के मुंह से लार गिरने लगता है
जमीन पर गिरकर छटपटाता है
उपचार की विधि
रोगग्रस्त पशु के पैर यानी रोगग्रस्त स्थान को नीम व पीपल के छाले का काढ़ा बना कर दिन में तीन बार धोना चाहिए. पैरों को फिनायल युक्त पानी से भी धोंयें और मक्खी दूर करने वाली महलम लगा दें. मुंह के छाले को एक ग्राम फिटकरी 100 एमएल पानी में घोलकर दिन में तीन बार धोएं. पशु को सुपाच्य भोजन खिलाएं.
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