डॉ मनोज की जगह ड्यूटी कर रहे थे अरुणोश

Published at :14 Mar 2015 7:37 AM (IST)
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डॉ मनोज की जगह ड्यूटी कर रहे थे अरुणोश

बेतिया : घड़ी में शुक्रवार की दोपहर के 12.05 बजे थे. ओपीडी के पंजीयन काउंटर पर लोगों की भीड़ जमा थी. कतार में खड़े होकर लोग पुरजा कटवा रहे थे. पास में ही सूअर(स्वाइन फ्लू के वायरस एच1एन1 का वाहक) का झुंड विचरण करते दिखा. पूछने पर पता चला कि यहां यह आम बात है. […]

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बेतिया : घड़ी में शुक्रवार की दोपहर के 12.05 बजे थे. ओपीडी के पंजीयन काउंटर पर लोगों की भीड़ जमा थी. कतार में खड़े होकर लोग पुरजा कटवा रहे थे. पास में ही सूअर(स्वाइन फ्लू के वायरस एच1एन1 का वाहक) का झुंड विचरण करते दिखा. पूछने पर पता चला कि यहां यह आम बात है. परिसर तो दूर कभी-कभार सूअर वार्डो में भी दिख जाते हैं.
ओपीडी के मेडिसीन विभाग में मरीजों की सर्वाधिक भीड़ जमा थी. सजिर्कल, शिशु विभाग, स्त्री रोग विभाग में भी मरीजों की जांच हो रही थी. जबकि साढ़े 12 बजे तक इएनटी, ऑर्थो विभाग में ताला लटका हुआ था. पूछने पर बताया कि डॉक्टर साहब नहीं है. आयेंगे तो कक्ष खुल जायेगा, जबकि इन कमरों के बाहर भी मरीज जमा थे. इमरजेंसी वार्ड में हालात इससे भी बदतर मिला. अस्पताल की चार्ट में इमरजेंसी डय़ूटी के लिये मेडिकल कॉलेज के डॉ मनोज कुमार गुप्ता का नाम अंकित था,
लेकिन इनके स्थान पर एक बाहरी व्यक्ति इमरजेंसी डय़ूटी पर तैनात मिला. वह बेरोक-टोक आपातकालीन चिकित्सा के लिये आने वाले मरीजों का इलाज कर रहा था. पूछने पर अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि इस बाहरी व्यक्ति का मौजूदा समय में अस्पताल से कोई सरोकार नहीं है. नाम न छापने के शर्त के एक कर्मी ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर इस बाहरी व्यक्ति को अपने स्थान पर डय़ूटी में लगा देते हैं. इमरजेंसी डय़ूटी करते मिले डॉ. अरूणोश श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें डय़ूटी के एवज में अस्पताल से कोई भुगतान नहीं मिलता है. अस्पताल में वह फ्री में डय़ूटी करते हैं.
पेड़ की छांव में बेड
बेतिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी कमी मिली. पीएचसी के पीपी वार्ड में आने वाले लोगों का बंध्याकरण करने के बाद उन्हें परिसर में पेड़ के नीचे लिटा दिया गया था. बेड भी पेड़ के नीचे ही लगाये गये थे. पूछने पर पता चला कि रात में भी मरीज पेड़ के नीचे ही लेटे थे. भवन की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण ऐसा किया गया. जबकि मरीजों से पूछने पर उन्होंने बताया कि अंदर बेड खाली हैं. फिर भी उन्हें रात भर और अब दिन में पेड़ के नीचे रखा गया.
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