मॉडल स्टेशन पर सुविधाएं नगण्य
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Dec 2014 8:52 AM (IST)
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बेतिया: कहने को बेतिया रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन है. इस स्टेशन को दर्जा मिले कई वर्ष बीत गये हैं. यहां देश के लगभग हर कोने के लिए गाड़ियां आती जाती है. प्रतिदिन करीब दो हजार की संख्या में यात्री आते-जाते हैं. रेलवे को हर माह एक करोड़ 30 लाख रुपये से ज्यादा राजस्व की […]
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बेतिया: कहने को बेतिया रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन है. इस स्टेशन को दर्जा मिले कई वर्ष बीत गये हैं. यहां देश के लगभग हर कोने के लिए गाड़ियां आती जाती है. प्रतिदिन करीब दो हजार की संख्या में यात्री आते-जाते हैं.
रेलवे को हर माह एक करोड़ 30 लाख रुपये से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति भी होती है, लेकिन यात्रियों की सुविधा के खातिर कोई बेहतर व्यवस्था नहीं की गयी है. एक आरक्षण काउंटर के सहारे ही आरक्षित टिकट बुक किया जाता है. टिकट के मारा-मारी में यात्री हलकान रहते हैं. लाख परेशानी के बावजूद भी यात्र करने की मजबूर यात्री जैसे-तैसे टिकट प्राप्त कर यात्र करते हैं.
प्रथम श्रेणी का विश्रमालय का नहीं है व्यवस्था
स्टेशन पर प्रथम श्रेणी का विश्रमालय की व्यवस्था नहीं है. व्यवस्था नहीं होने के कारण रात्रि में गाड़ी पकड़ने में यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है. सबसे ज्यादा परेशान रात्रि में दूरी का सफर तय कर आये यात्रियों को होता है. गाड़ी से उतने के बाद या तो उन्हें निजी होटलों में रात गुजारनी पड़ती है, नहीं तो स्टेशन पर रात काटनी पड़ती है.
सुरक्षा का नहीं है कोई मानक
बेतिया रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई मानक नहीं है. ऐसे में तो दो मेन गेट हैं, लेकिन स्टेशन खुला होने के कारण कहीं से भी लोग आ-जा सकते हैं. जबकि इंडो-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण जिले में नक्सली व आतंकी हमला को लेकर हाई एलर्ट जारी है. फिर भी रेल प्रशासन की ओर से इस सुरक्षा को लेकर कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है. हालांकि हाल में ही सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है.
यात्री शेड का है अभाव
प्लेटफॉर्म संख्या-एक हो या संख्या-दो. दोनों पर पूरा यात्री शेड नहीं है. गरमी हो, ठंड हो या बरसात का मौसम हो. हर मौसम में यात्रियों को खुले में बैठना पड़ता है. जबकि इस स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा मिला हुआ है. इतना ही ठंडे पानी के लिए लगाये गये मशीन शोभा की वस्तु बनी हुई है.
रैक प्वांइट भी बना जी का जंजाल
मॉडल स्टेशन होने के बावजूद भी माल ट्रेनों से माल लाया व उतारा जाता है. जिससे सबसे ज्यादा परेशानी प्लेटफॉर्म संख्या-दो के यात्रियों को उठानी पड़ती है.
कहते हैं अधिकारी
मॉडल स्टेशन का दर्जा मिल गया है. लेकिन यात्रियों के सुविधा के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है. बेहतर व्यवस्था के खातिर कई बार विभाग को लिखा गया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
बच्च राम
स्टेशन अधीक्षक
बेतिया.
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