चेतें, स्पार्किंग या फाल्ट से निकली चिंगारी, तो भयावह होगा मंजर
Updated at : 07 Mar 2018 4:00 AM (IST)
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सोवाबाबू चौक के समीप स्थित ट्रासफार्मर के नीचे दर्जनों फुटपाथ की दुकानें लगी हैं. सभी दुकानें रेडिमेड कपड़ों की हैं. जिनमें आग आसानी से लग सकता है, लेकिन रोटी की चिंता में जहां दुकानदार मौत की परवाह नहीं कर रहे हैं, वहीं विभाग ने भी आंख मूंद लिया है. मीना बाजार में एक ही कैंपस […]
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सोवाबाबू चौक के समीप स्थित ट्रासफार्मर के नीचे दर्जनों फुटपाथ की दुकानें लगी हैं. सभी दुकानें रेडिमेड कपड़ों की हैं. जिनमें आग आसानी से लग सकता है, लेकिन रोटी की चिंता में जहां दुकानदार मौत की परवाह नहीं कर रहे हैं, वहीं विभाग ने भी आंख मूंद लिया है.
मीना बाजार में एक ही कैंपस में 3600 दुकानें हैं. सभी दुकानें एक-दूसरे से सटी हुई हैं. सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि यहां आग लगी तो मंजर कितना भयावह होगा. लेकिन, यहां भी बेपरवाही दिख रही है. ट्रांसफार्मरों के नीचे दुकानें सजी हुई हैं.
शहर के गुलाबबाग में भी ट्रांसफार्मर के समीप चाय व पान मसाला की दुकानें चलती हैं. लिहाजा यहां पूरे दिन भीड़ लगी रहती है. यहां पर स्थिति ट्रासफार्मर और बिजली तार इतने मकड़ी के जाल के जैसे है कि आये दिन स्पार्किंग होती है.
बेतिया : विभागीय लापरवाही कहें या अपना रोजगार चलाने के लिए फुटपाथों पर खाली पाये गये जगह की जरुरत. शहर में सड़क से सटे हुए लगाये गये ट्रांसफार्मर और उसके सटे संचालित हो रही दुकानें मौत को दावत दे रहे हैं. मार्च अप्रैल के महीने में तेज हवा के झोंके के मौसम में हादसों का खतरा और बढ़ जाता है. बावजूद इसके रोटी की चिंता में जहां दुकानदार बेपरवाह हैं. वहीं प्रशासन भी मौन दिख रहा है. ऐसे में हादसा होता है तो इसकी जिम्मेवार कौन होगा.
यह हाल तब है, जब आये दिन इन ट्रांसफार्मरों से चिंगारी और स्पार्किंग होना आम बात है. न तो इन ट्रांसफार्मरों के आसपास जाली है और न टीपीओ स्विच. जिससे आसपास से निकलते लोगों को करेंट लगने का खतरा तो रहता ही है. साथ ही स्पाकिंर्ग होने से आसपास की दुकानों में आग लगने का खतरा बना हुआ है. इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. शहर में कुछ स्थानों पर तो ट्रांसफार्मर मानक के अनुरूप लगाये गए हैं. लेकिन कई स्थानों पर तो इस हिसाब से लगाये गये है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. प्रभातखबर की टीम ने शहर में बेतरतीब लगाये गये विद्युत ट्रांस्फार्मरों की पड़ताल की तो सबसे अधिक रिहायशी इलाके एवं मीनाबाजार क्षेत्र में इस प्रकार के ट्रांस्फार्मर लगे हुएपाये गये जहां कभी भी कोई बड़ाहादसा हो सकता है.
* पहले भी लग चुकी है आग, हो चुकी है मौत: शहर में बिजली सार्ट-सर्किट से पहले भी आगलगी की घटनाएं हो चुकी है तथा मौत के भी मामले आये हैं. बीते साल लाल बाजार में एक युवक की बिजली सार्ट-सर्किट की वजह से मौत हो गई थी. बावजूद इसके प्रशासन ने इससे सबक नहीं लिया. अभी भी शहर में यह लापरवाही जारी है.
नप की है जिम्मेवारी
विभाग की ओर से चिन्हित जगहों पर ट्रांसफार्मर लगाया गया है. लोग जमीन अतिक्रमित कर दुकान लगा लिये हैं. नगर परिषद की जिम्मेवारी बनती है कि उन स्थानों से अतिक्रमण हटवाये. इन दिनों में आग लगने के मामले बढ़ जाते हैं. ऐसे में यह संवेदनशील है.
दिवाकर लाल, कार्यपालक अभियंता बिजली विभाग
बेपरवाह हैं दुकानदार और प्रशासन
हादसा होने के बाद जगेगा विभाग, पछुआ हवाओं से बढ़ जाते हैं आग लगने के मामले
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