मकर संक्रांति : सजीं तिलकुट की दुकानें, खरीदारी शुरू

Updated at : 12 Jan 2018 4:54 AM (IST)
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मकर संक्रांति : सजीं तिलकुट की दुकानें, खरीदारी शुरू

पर्व को लेकर शहर में सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर तिलकुट की दुकानों पर खरीदारी के लिए उमड़ने लगी लोगों की भीड़ सात साल में दोगुना हो गया तिलकुट का भाव, महंगाई का दिख रहा असर बेतिया : मकर संक्रांति को लेकर शहर में तिलकुट का सीजन शुरू हो गया है. ठंढ़ बढ़ने के साथ ही […]

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पर्व को लेकर शहर में सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर तिलकुट की दुकानों पर खरीदारी के लिए उमड़ने लगी लोगों की भीड़

सात साल में दोगुना हो गया तिलकुट का भाव, महंगाई का दिख रहा असर
बेतिया : मकर संक्रांति को लेकर शहर में तिलकुट का सीजन शुरू हो गया है. ठंढ़ बढ़ने के साथ ही तिलकुट का कारोबार बढ़ने लगा है. पिछले सात-आठ सालों में तिलकुट की कीमत में दोगुना वृद्धि हुई है.
साल 2009 में इसका भाव 100 था, जो 2018 में 200 से 220 रुपये प्रति किलो हो गया है. शहर के अधिकतर दुकानों में 200 और कुछ नामचीन दुकानों में 220 रुपए किलो रेट है. वैसे तो शहर के गली-कूचों में भी तिलकुट बेचने का काम होता है. लेकिन लालबाजार और मीनाबाजार की बात अलग है. तिलकुट की सबसे अधिक दुकानें इसी इलाके में है. लालाबाजार रोड के अलावा सोवाबाबू चौक, समाहरणालय चौक, तीन लालटेन चौक, इत्यादि इलाकों में तिलकुट बनाए और बेचे जा रहे हैं. इस कारोबार से लंबे समय से जुड़े सन्नी कुमार ने बताया कि नहान (कार्तिक पूर्णिमा) के बाद से तिलकुट बनना शुरू हो गया है. इस वक्त प्रतिदिन छोटे दुकानों से 50 और बड़े दुकानों से 100 किलो तिलकुट की बिक्री हो रही है. 12 जनवरी के बाद से बिक्री बढ़ती ही जायेगी. मकर संक्रांति को लेकर लोगो की खरीदारी में तेजी आने की उम्मीद है.
इस बार तिलकुट के भाव
तिलकुट भाव
काला तिलकुट 180 से 200 रुपये प्रति किलो
उजला तिलकुट 200 से 220रुपये प्रति किलो
बादाम पापड़ी 220 से 260 रुपये प्रति किलो
लाल तिलकुट 220 से 250 रुपये प्रति किलो
लाई बंधुई 80 से 95 रुपये प्रति किलो
रेवड़ी 190 से 210 रुपये प्रति किलो
घेवर 140 से 165 रुपये प्रति किलो
बाजार से ही हो रही खरीद
मकर सक्रांति को लेकर शहर के सभी चौक-चौराहों पर तिलकुट व बनी बनाई लाई की दुकानें सजी हुई हैं. बदलते समय के साथ लोग बाजार पर पूरी तरह आश्रित हो चले हैं. तभी तो लोग अब घरों में लाई बनाने के बजाए बाजार पर ही निर्भर हैं. पहले तिलकुट की दुकानों में केवल तिलकुट बिकता था. लेकिन, अब वहां भी तिल व मुढ़ी की लाई भी बिक रही है.
ठेला वाले करते हैं व्यवसाय
ठेला पर लाई बेचने वालों ने बताया कि यह सीजनल धंधा है. दस दिनों से बाजार से तिलकुट, कंसार के यहां से लाइ खरीदते हैं और बेचते हैं. बताया कि बीते साल की अपेक्षा इस बार खूब बिक्री हो रही है. कई लोगों ने तो पहले से ही आर्डर लगा रखा है. उसे ही पूरा करने में वक्त नहीं िमलता है. लोग इसे बहुत चाव से खाते हैं. इसे खरीदने के लिये आसपास के इलाके से लोग आते हैं.
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