रेलवे को दहलाने की कोिशश नाकाम
Updated at : 02 Oct 2016 4:47 AM (IST)
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रक्सौल-सीतामढ़ी रेलखंड पर घोड़ासहन स्टेशन के पास लगाया गया था बम टला बड़ा हादसा सुबह दौड़ लगा रहे युवकों ने देखा कुकर बम शोर मचा कर रुकवायी सवारी गाड़ी, ड्राइवर ने लगायी इमरजेंसी ब्रेक दस घंटे तक ट्रैक पर बाधित रहा परिचालन सुबह 5.55 बजे देखा गया ट्रैक पर बम रेलवे व सुरक्षा बल के […]
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रक्सौल-सीतामढ़ी रेलखंड पर घोड़ासहन स्टेशन के पास लगाया गया था बम
टला बड़ा हादसा
सुबह दौड़ लगा रहे युवकों ने देखा कुकर बम
शोर मचा कर रुकवायी सवारी गाड़ी, ड्राइवर ने लगायी इमरजेंसी ब्रेक
दस घंटे तक ट्रैक पर बाधित रहा परिचालन
सुबह 5.55 बजे देखा गया ट्रैक पर बम
रेलवे व सुरक्षा बल के अधिकारी मौके पर पहुंचे
मोतिहारी/घोड़ासहन : रक्सौल-सीतामढ़ी रेलखंड पर कुकर बम बरामद हुआ है. इसे घोड़ासहन स्टेशन व पश्चिमी होम सिंग्नल के बीच ट्रैक पर रखा गया था. इसे माओवादियों की कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन समय रहते बम बरामद होने से बड़ी दुर्घटना होने से टल गयी. बम को स्थानीय युवकों ने देखा और इसकी सूचना रेलवे अधिकारियों व सुरक्षाबलों को दी. बताया जाता है कि इसके निशाने पर सवारी गाड़ी 75228 थी.
जानकारी के मुताबिक सुबह में दौड़ लगाने निकली युवकों की टोली ने बम को रेलवे ट्रैक पर रखा देखा. इस समय 5.55 बजे थे. इसी दौरान दौरान रेलखंड से गुजर रही डीएमयू ट्रेन को युवकों ने
आवाज देकर रोका. ट्रेन को रोकने के लिए युवकों ने चालक की ओर पत्थर फेंका. इस समय ट्रेन की स्पीड लगभग तीस किमी प्रति घंटा के आसपास थी. युवकों की आवाज सुनकर चालक बीके सिंह ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी.
उन्होंने घोड़ासहन स्टेशन को इसकी जानकारी दी. इसके बाद स्टेशन अधीक्षक ने समस्तीपुर रेलवे कंट्रोल को सूचना दी. मौके पर पहुंचे सुरक्षाबलों ने वहां घेराबंदी कर दी. इसके बाद अठमुहान व कुंडवाचैनपुर एसएसबी, सीआरपीएफ बटालियन सहित जिला से एएसपी अभियान राजीव कुमार, रेल एसपी वीरेंद्र नरायण झा,
रक्सौल जीआरपी व आरपीएफ जवान भी पहुंचे गये. बम निरोधक दस्ता की टीम मुजफ्फरपुर से बुलायी गयी. दिन के 11 बजे मौके पर पहुंची टीम को तीन घंटे मशक्कत के बाद बम को डिफ्यूज करने में सफलता मिली. इस बीच रेल खंड के आसपास दूसरे बम की सूचना पर खोजबीन की गयी, लेकिन कुछ नहीं मिला.
रेलवे ट्रैक पर बम मिलने से लगभग दस घंटे तक ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा. इस दौरान तरह-तरह की बातें हो रही थीं. सुरक्षा बल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक माओवादी आम लोगों को निशाना नहीं बनाते हैं. इसके पीछे किसी और का भी हाथ हो सकता है. घोड़ासहन इलाके में पहले माओवादियों का प्रभाव था. साथ ही ये इलाके भारत-नेपाल सीमा के पास भी है. इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रख कर पुलिस की ओर से जांच की जा रही है.
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