हाइकोर्ट ने हटाया, बीडीओ ने फिर से शिक्षक बनाया

Updated at : 19 May 2015 7:07 AM (IST)
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हाइकोर्ट ने हटाया, बीडीओ ने फिर से शिक्षक बनाया

रक्सौल : पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर प्रखंड में शिक्षक नियोजन में भारी गड़बड़ी सामने आयी है. बीडीओ ने ऐसे सात लोगों को शिक्षक नियोजन पत्र दे दिया है, जिन्हें 2012 में हाइकोर्ट के आदेश से पद से हटा दिया गया था. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी जांच में उन सात शिक्षकों के अलावा दो […]

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रक्सौल : पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर प्रखंड में शिक्षक नियोजन में भारी गड़बड़ी सामने आयी है. बीडीओ ने ऐसे सात लोगों को शिक्षक नियोजन पत्र दे दिया है, जिन्हें 2012 में हाइकोर्ट के आदेश से पद से हटा दिया गया था.
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी जांच में उन सात शिक्षकों के अलावा दो बीडीओ व दो प्रखंड प्रमुखों को जालसाजी, धोखाधड़ी व साजिश का दोषी पाया था.
इसके बावजूद वर्तमान बीडीओ विनीत कुमार ने उन्हें न सिर्फ नियोजन पत्र दिया है, बल्कि योगदान भी करा दिया है. प्रखंड में 2008 में शिक्षक नियोजन के दौरान फर्जी प्रमाणपत्र पर सोनेलाल साह, प्रेमचंद्र पासवान, प्रमोद कुमार, प्रियंका कुमारी, राजेश कुमार, श्लोक प्रसाद यादव और बच्चू प्रसाद का नियोजन कर लिया गया था. इसके बाद उपेंद्र कुमार, विनोद सिंह आदि ने जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार में अपील की. प्राधिकार ने 20 अक्तूबर, 2011 को अपना फैसला दिया. इसमें सातों के प्रमाणपत्रों को फर्जी करार दिया. साथ ही बीडीओ को नियोजन रद्द करने का पत्र दिया.
इसके बावजूद ये शिक्षक नहीं हटाये गये. इसके बाद इन शिक्षकों ने प्राधिकार के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में सीडब्लूजेसी 19720/2011 दर्ज कराया गया. 11 अप्रैल, 2012 को हाइकोर्ट ने सभी प्रमाणपत्रों को फर्जी बताते हुए प्राधिकार के फैसले को सही ठहराया. इतना ही नहीं, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की जांच की और 31 मई, 2012 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी.
इसमें पूर्व प्रखंड प्रमुख मो असलम, वर्तमान प्रमुख नरूल हसन, तत्कालीन बीडीओ शैलेंद्र कुमार सिंह व अरुण कुमार त्रिपाठी के साथ-साथ सातों शिक्षकों को आपराधिक साजिश रचने, नाजायज लाभ लेने या देने का दोषी पाया गया. हाइकोर्ट के फैसले के बाद सातों शिक्षकों को चयनमुक्त कर दिया गया. उनकी जगह पर योग्य लोगों का चयन कर लिया गया.
बीडीओ ने अनसुनी की शिकायत
लेकिन, योग्य लोगों के चयन के तीन साल बाद गोपनीय तरीके से उन्हीं सातों शिक्षकों का नियोजन कर लिया गया, जिनके प्रमाणपत्र को हाइ कोर्ट ने जाली बताया था. बीडीओ की ओर से उनलोगों को नियोजन पत्र भी दे दिया गया. कहा तो यह भी जा रहा है कि सभी शिक्षक योगदान भी दे चुके हैं.
हद तो यह है कि नियोजन प्रक्रिया शुरू होने के दौरान ही उपेंद्र कुमार ने बीडीओ को चार मार्च, 2015 को आवेदन दिया. इसमें उसने अवगत कराया कि हाइकोर्ट के आदेश पर हटाये गये उन सात शिक्षकों का पुन: नियोजन किये जाने की चर्चा है. इसके बावजूद बीडीओ विनीत कुमार ने उन फर्जी प्रमाणपत्र वाले लोगों को बीते 28 मार्च को नियोजन पत्र दे दिया.
आदापुर के बीडीओ विनीत कुमार ने कहा कि हमारे आने से पूर्व विधि प्रशाखा से मंतव्य मांगा गया था. मंतव्य आने के बाद हमने शिक्षकों का नियोजन किया है.
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