टैक्स की चोरी कर रहे इओ
Updated at : 23 Apr 2015 6:59 AM (IST)
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नप का खेल : निजी गाड़ी का व्यावसायिक इस्तेमाल रक्सौल : लोगों से टैक्स लेकर नगर सरकार चलाने वाले मौका मिलने पर टैक्स चोरी करते हैं. यदि आमलोग टैक्स चोरी करे तो ये कई तरह के फाइन लगा कर टैक्स वसूलने का काम करते हैं. लेकिन नप के अधिकारी कानून का खुला उल्लंघन करते हैं […]
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नप का खेल : निजी गाड़ी का व्यावसायिक इस्तेमाल
रक्सौल : लोगों से टैक्स लेकर नगर सरकार चलाने वाले मौका मिलने पर टैक्स चोरी करते हैं. यदि आमलोग टैक्स चोरी करे तो ये कई तरह के फाइन लगा कर टैक्स वसूलने का काम करते हैं. लेकिन नप के अधिकारी कानून का खुला उल्लंघन करते हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती.
बात नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की है. वे कानून का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करते आ रहे हैं. अपने पदस्थापना काल से ही नप के कार्यपालक पदाधिकारी जिस किराये के बोलेरो पर पर चलते हैं, वह निजी इस्तेमाल का बता कर निबंधित है. नियम के मुताबिक निजी इस्तेमाल के लिए जो वाहन निबंधित है, उसका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं हो सकता है ़ अब सवाल यह उठता है कि नगर परिषद ने वर्ष 2009 से ही निजी वाहन को किराये पर कैसे ले रखा यदि शुरू या जानकारी के अभाव में यह फैसला लिया गया तो आखिर छह साल में सुधार के प्रयास क्यों नहीं किया गया
कार्यपालक पदाधिकारी के लिए वर्ष 2009 मे नगर परिषद के बोर्ड ने तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी रत्नेश कुमार के लिये किराये पर बोलेरो लेने का निर्णय लिया. जबकि आज तक मुख्य पार्षद के लिये वाहन नहीं है नियम के मुताबिक पहले मुख्य पार्षद के लिये वाहन लिया जाना चाहिये, उसके बाद कार्यपालक पदाधिकारी के लिये.
निजी गाड़ी का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है़ यह कानून गलत है़ निजी गाड़ी का नंबर प्लेट उजला होता है. जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल में आने वाले वाहनों का प्लेट पीले रंग का होता है़
म अफजारूल रहमान, जिला परिवहन पदाधिकारी
सभापति के पास अपना निजी वाहन है़ उन्हें नगर परिषद से गाड़ी नहीं दिया गया है़ मैं जिस गाड़ी पर चलता हूं, वह मेरे आने से पहले से लिया गया है़ गाड़ी का कितना किराया दिया जाता है, यह बड़ा बाबू से पूछना होगा़ निजी गाड़ी का व्यावसायिक इस्तेमाल होगा की नहीं, यह मैं नहीं जानता हूं़ आपको इसके अलावा कोई खबर नहीं मिला है क्या.
विरेंद्र कुमार तरुण, इओ , नप
टैक्स चोरी गलत है और यह गलती नगर परिषद और कार्यपालक पदाधिकारी कर रहे हैं. यह किसी व्यक्ति को लाभ देने जैसा है़ जिस गाड़ी पर कार्यपालक पदाधिकारी चलते है, उसका लॉग बुक अब तक नहीं खुला है़ आखिर तेल कहां से आता है. हमलोग जिलाधिकारी से मिल कर इस विषय की भी जांच की मांग किये हैं
ई जितेंद्र कुमार, पूर्व उप मुख्य पार्षद
बोलेरो गाड़ी का किराया प्रतिमाह 18 हजार रुपया दिया जाता है़ गाड़ी का लॉग बुक खुला है और प्रतिमाह डीजल मद में 16 से 17 हजार का खर्च है़
चंद्रशेखर कुमार, प्रधान सहायक
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