रक्सौल-नरकटियागंज रेलखंड का मामला

Updated at : 20 Apr 2018 5:11 AM (IST)
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रक्सौल-नरकटियागंज रेलखंड का मामला

रक्सौल : एक अप्रैल 2014 को रक्सौल से नरकटियागंज के बीच (42 किलोमीटर) रेल लाइन बनाने के लिए रेलवे के द्वारा मेगा ब्लॉक लिया गया. इस दौरान मीटर गेज की ट्रेनों को बंद कर एक साल के अंदर रक्सौल से नरकटियागंज के बीच अमान परिवर्तन का कार्य पूरा करते हुए ट्रेनों को चलाने का सपना […]

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रक्सौल : एक अप्रैल 2014 को रक्सौल से नरकटियागंज के बीच (42 किलोमीटर) रेल लाइन बनाने के लिए रेलवे के द्वारा मेगा ब्लॉक लिया गया. इस दौरान मीटर गेज की ट्रेनों को बंद कर एक साल के अंदर रक्सौल से नरकटियागंज के बीच अमान परिवर्तन का कार्य पूरा करते हुए ट्रेनों को चलाने का सपना रेलवे ने दिखाया था. लेकिन व्यव्स्था का दोष, अधिकारियों की लापरवाही, ठेकेदारों की मनमानी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण 19 अप्रैल 2019 तक भी इस रेल लाइन के अमान परिवर्तन का कार्य पूरा नहीं हो सका है.

रेलवे के द्वारा इस लाइन के निर्माण के लिए मेगा ब्लॉक लिया गया तो किसी ने यह उम्मीद नहीं की थी कि इस लाइन का निर्माण कार्य पूरा होने में इतना वक्त लगेगा. इन सब के बीच परेशानी की बात यह है कि अब भी कितना समय लगेगा इसको लेकर कोई रेलवे के अधिकारी खुल कर बोलने को तैयार नहीं है. इस रेल लाइन बंद होने से सरहदी इलाके के लोगों को काफी परेशानी है. इस रूट में सड़क यातायात की व्यवस्था उतनी अच्छी नहीं है, ट्रेन बंद होने के बाद से भारत के साथ-साथ नेपाल के नागरिक जो इस रूट से यात्रा करते थे, उनकी आशा की किरण अब समाप्त होने लगी है. लोग यहां तक भी कह रहे है कि अब पता नहीं यह रेल लाइन चालू भी हो पायेगी या ऐसे ही रहेगा.
जबकि इस लाइन को लेकर बजट पास है और पूरा पैसा भी मिला हुआ है. जितनी खामियां मिली है उसको देखकर यह नहीं लगता कि वर्ष 2018 में यह लाइन चालू हो पायेगी. लेकिन रेलवे के अधिकारी अब भी जुलाई तक काम पूरा होने की बात कर रहे है. अब देखना है कि जुलाई 18 या जुलाई 19 में ट्रेन चलती है.
लोगों में बढ़ रहा आक्रोश : प्रोजेक्ट में हो रही देरी से लोगों में आक्रोश पनप रहा है. लोग इसके लिए रेलवे के अधिकारियों को दोषी मान रहे है.
रक्सौल निवासी नवमीकांत मणी शूक्ला, मनोज कुमार पांडेय, धीरज कुमार, विरेंद्र प्रसाद, संतोष गिरि आदि ने बताया कि हमलोग जब ट्रेन चलती थी जो रोज पश्चिम चंपारण अपने घर से रक्सौल काम करने के लिए आ जाते थे और रात में फिर वापस चले जाते थे. ट्रेन बंद होने के बाद से हमलोगों के सामने काफी परेशानी आ गयी है. अब रक्सौल में ही रहना पड़ता है. लोगों का मानना है कि यदि अब रेल लाइन चालू होने में देरी होती है तो इसके लिए आंदोलन किया जायेगा.
आखिर क्यों नही हुयी कार्रवाई : इस रेल लाइन को युद्ध स्तर पर काम करते हुए 2017 में ही चालू करने का लक्ष्य रखा गया था. मार्च 2017 से लेकर लोग दिन का इंतजार कर रहे थे कि कब सीआरएस होगा और रेल लाइन को आम लोगों के लिए खोला जायेगा. लेकिन ठेकेदारों की मनमानी व अधिकारियों की लापरवाही से यह डिले प्रोजेक्ट और डिले हो गया. नियम विपरीत ठेकेदारों के द्वारा दो पुल का निर्माण कराया था. मीडिया में खबर आने के बाद रेलवे प्रशासन जागा और लापरवाही की जांच हुयी तो पता चला कि इस रूट पर जितने भी पुल बने में उसमें कुछ ना कुछ खामियां है. वहीं इस रूट के दो बड़े पुल संख्या 51 व 52 तो इस लायक भी नहीं बने थे कि उसपर ट्रेन परिचालन की अनुमति दी जा सके.
नतीजा यह हुआ कि पुल संख्या 51 व 52 को तोड़ कर नये पुल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. ऐसे सवाल यह उठता है कि आखिर गलत काम करने वाले ठेकेदारो व लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर रेलवे के द्वारा कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी.
सरहदी इलाके की लोग परेशान
1997-1998 के बजट में घोषित परियोजना का हाल
रक्सौल-नरकटियागंज रूट पर एक नजर
एक अप्रैल 2014 को लिया गया मेगा ब्लॉक
2015 में लाइन को चालू करने की थी योजना
2018 के अप्रैल तक पूरा नहीं हो सका काम
घटिया निर्माण के चलते दो पुलों को तोड़ कर फिर से हो रहा है निर्माण
लापरवाह अधिकारियों पर नहीं हुयी कोई कार्रवाई
पांच साल के प्रोजेक्ट में लग चुके हैं 20 साल
वर्ष 1997-98 के रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री मधु दंडवते ने इस परियोजना की घोषणा की थी. जयनगर से लेकर दरभंगा-सीतामढ़ी होते हुए रक्सौल-नरकटियागंज व भिखनाठोरी तक अमान परिवर्तन का काम किया जाना था. इस परियोजना को पांच साल में पूरा होना था. उस वक्त इस प्रोजेक्ट के लिए 800 सौ करोड़ रुपये जारी किये गये थे. अब 20 साल का समय बीत चुका है और 294 किलोमीटर के अमान परिवर्तन कार्य में केवल रक्सौल तक ही काम पूरा हो चुका है. अभी रक्सौल-नरकटियागंज व नरकटियागंज-भिखनाठोरी के बीच काम होना बाकी है.
रक्सौल-नरकटियागंज रेलखंड पर ही शीघ्र आमान परिवर्तन शुरू हो जायेगा. इसके लिये ठेकेदारों को समय-समय काम में तेजी लाने का निर्देश दिया जाता है. काम युद्धस्तर पर चल रहा है.
विरेंद्र कुमार, प्रवक्ता सह सीनियर डीसीएम पूमरे समस्तीपुर
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