प्रधान डाकघर में 20 लाख का पीएलआई फर्जीवाड़ा

Updated at : 14 Apr 2018 4:56 AM (IST)
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प्रधान डाकघर में 20 लाख का पीएलआई फर्जीवाड़ा

मोतिहारी : प्रधान डाकघर मोतिहारी में 52 लाख के एलटीसी फर्जीवाड़ा के बाद सीबीआई के हत्थे रिश्वत लेते पोस्टमास्टर सुनिल कुमार की गिरफ्तारी के बाद विभाग ने गलत कार्यों के परत दर परत पोल खुलने लगा है. सीबीआई टीम करीब छह घंटे तक घर के जांच के बाद गायत्री नगर स्थित अलीशान मकान सहित कई […]

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मोतिहारी : प्रधान डाकघर मोतिहारी में 52 लाख के एलटीसी फर्जीवाड़ा के बाद सीबीआई के हत्थे रिश्वत लेते पोस्टमास्टर सुनिल कुमार की गिरफ्तारी के बाद विभाग ने गलत कार्यों के परत दर परत पोल खुलने लगा है.

सीबीआई टीम करीब छह घंटे तक घर के जांच के बाद गायत्री नगर स्थित अलीशान मकान सहित कई जमीनों के कागजात भी साथ ले गये हैं. फर्जी प्रमाणपत्र पर करीब तीन दर्जन कर्मियों के निलंबन के बाद कर्मी तो न्यायालय की शरण में है. बावजूद इसके फर्जी कार्यों का गोरखधंधा डाकघर में नहीं रुक रहा है. पीएलआई (पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस) में पदस्थापित कर्मी अशोक श्रीवास्तव की जगह अपने रिश्तेदार को रख करीब 20 लाख रुपये की हेराफेरी की गयी है. पकड़े जाने पर अशोक श्रीवास्तव निलंबित हुए और कार्य करनेवाला युवक अब भी पुलिस पकड़ से बाहर है. जानकारी के अनुसार अशोक श्रीवास्तव को कंप्यूटर का पूर्ण ज्ञान नहीं था.
ऐसे में एक प्रशिक्षित रिश्तेदार युवक को रख कर पीएलआई का काम किया गया. गड़बड़ी यह थी कि पीएलआई जमा करने आये लोगों को रशीद तो सही दिया जाता था लेकिन ग्राहक के जाने के बाद कंप्यूटर में जमा राशि को कैंसिल कर दिया जाता था. इस तरह के दर्जनों मामले है. कहते हैं कि कैंसिल राशि में से 50-50 का शेयर भी होता था. यह सब गलत कार्य और युवक से कार्य कराना सीसीटीवी कैमरे की नजर में था. मैच्युरिटी के बाद जब एक ग्राहक जमा राशि का रशीद लेकर आया तो उनके खाते में राशि ही जमा न थी. जांच के लिए डाक अधीक्षक सत्यनारायण प्रसाद के नेतृत्व में टीम बनी और मामला उजागर हुआ. अशोक श्रीवास्तव को करीब तीन लाख मैच्युरिटी राशि देनी पड़ी और निलंबन के शिकार भी हुए. ऐसे में सवाल उठता है कि वह युवक कौन था जो डाक कर्मी के जगह पर बैठकर पीएलआई का कार्य करता था.
डाककर्मी अशोक निलंबित, चल रही है जांच
पीएलआई काम के लिए रखा गया था रिश्तेदार
ट्रेन परिचालन के बाद भी वाहन राशि का उठाव
पोस्टमास्टर की गिरफ्तारी के बाद खुली पोल
वगैर टेंडर हो रहा वाहनों का परिचालन
डाक विभाग में वगैर टेंडर के प्रधान डाकघर में दो वाहनों का परिचालन हो रहा है. नियमानुसार टेंडर के बाद ही किसी वाहन का परिचालन करना है. सूत्रों के अनुसार कार्य एक ही वाहन द्वारा लिया जाता है और पैसा दो वाहन का भुगतान होता है. यथा अगर कैश लेकर एक ही ढाका व पचपकड़ी जाती है तो उसे दो गाड़ी का परिचालन दिखाया जाता है. यही नहीं ट्रेन बंद होने के समय घोड़ासहन से प्रतिदिन 900 रुपये का भुगतान पर वाहन रिजर्व रखा गया, जो ट्रेन परिचालन शुरू होने के बाद अब भी परिचालित हो रहा है,
जबकि काम ट्रेन से लिया जाता है.
टेंडर के लिए विभाग को भेजा गया है. घोड़ासहन से ट्रेन और विभाग का शेड्यूल अलग है. इस कारण विभाग की गाड़ी चल रही है. ढाई या तीन लाख का मामला था, जो भुगतान कर दिया गया है. कर्मी निलंबित है. युवक कौन था, शिकायत आती है, तो जांच की जायेगी.
सत्यनारायण प्रसाद, डाक अधीक्षक, चंपारण प्रमंडल
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