कई जिलों को जोड़ता है पुल

Updated at : 01 Feb 2018 3:42 AM (IST)
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कई जिलों को जोड़ता है पुल

अनदेखी.13 वर्षों में पूरा नहीं हो सका डुमरियाघाट पुल का निर्माण डुमरियाघाट : इस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को जोड़ने वाली सड़क पर एनएच 28 के डुमरियाघाट पुल का निर्माण कार्य एक दशक से ज्यादा होने के बाद भी अधूरा है. कितने सरकारें बनीं, लेकिन पुल की स्थिति जस-की-तस है. परिवहन मंत्री नंदकिशोर यादव ने एक कार्यक्रम में […]

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अनदेखी.13 वर्षों में पूरा नहीं हो सका डुमरियाघाट पुल का निर्माण

डुमरियाघाट : इस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को जोड़ने वाली सड़क पर एनएच 28 के डुमरियाघाट पुल का निर्माण कार्य एक दशक से ज्यादा होने के बाद भी अधूरा है. कितने सरकारें बनीं, लेकिन पुल की स्थिति जस-की-तस है. परिवहन मंत्री नंदकिशोर यादव ने एक कार्यक्रम में उक्त पुल निर्माण की घोषणा भी की थी. इस कार्य का प्रारूप धरातल पर नहीं आया है. राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के तहत चार महानगरों को सड़क मार्ग से जोड़ने वाली स्वनिर्माण चतुर्भुज योजना के तहत पुल का निर्माण करना है.

राजमार्ग 28 पर लगभग 300 करोड़ की लागत से बनने वाले 900 मीटर लंबाई के इस पुल के साथ 38 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण भी अधूरा है. कंपनी काम बंद कर चार वर्षों से बेस कैंप को गार्ड के हवाले कर गायब हो गयी.

डुमरियाघाट पुल कई जिलों से जोड़ता है. पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, नेपाल, गोपालगंज, सीवान समेत यूपी आने जाने का मुख्य मार्ग है. जर्जर पुल का निर्माण नहीं होने पर विभिन्न जिलों की लाइफ-लाइन कभी ठप हो सकती है.

दूसरी कंपनी भी काम छोड़ हो गयी गायब

वर्ष 2014 में अधूरे पुल निर्माण को पूरा करने के लिए पायोनियर मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर लि. कंपनी ने पेटी कांटेक्ट कर पुल निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया. इस कंपनी ने भी 100 मीटर तक पुल का निर्माण कार्य किया. लेकिन, कंपनी द्वारा बेहतर कार्य नहीं होने के कारण निर्माण पुल का आधे हिस्से में दरार आ गया. उसके बाद यह कंपनी भी काम छोड़ कर गायब हो गयी. इधर, पुल निर्माण नहीं होने से 1965 में निर्मित पुराने पुल पर वाहनों के लगतार दबाव से पुराने पुल भी जर्जर हो चुका है.

2005 से है निर्माणाधीन : वर्ष 2005 से पुल नदी पर बन रहे इस पुल का निर्माण मात्र 60 प्रतिशत हो सका है. सरकार ने पुल व सड़क निर्माण कार्य प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन लि. कंपनी को सौंप था. कंपनी ने वर्ष 2005 में सेमुआपुर में अपना कैंप बनाया.

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