शाम ढलते ही आशा बन जातीं डॉक्टर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Dec 2017 5:11 AM
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सदर अस्पताल. हाल चिकित्सा व्यवस्था का, परिजनों को खुद देनी पड़ती है सूई डॉक्टर के फोन की घंटी बज कर हो जाती है बंद ऑपरेशन का टांका कटने का नहीं है इंतजाम 12 घंटों में हुई दो मरीजों की मौत से आक्रोश मोतिहारी : सदर अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था पर एक बार फिर सवालों के […]
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सदर अस्पताल. हाल चिकित्सा व्यवस्था का, परिजनों को खुद देनी पड़ती है सूई
डॉक्टर के फोन की घंटी बज कर हो जाती है बंद
ऑपरेशन का टांका कटने का नहीं है इंतजाम
12 घंटों में हुई दो मरीजों की मौत से आक्रोश
मोतिहारी : सदर अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था पर एक बार फिर सवालों के कटघरे में है. भले ही स्वच्छता व अन्य कार्य के लिए सदर अस्पताल में प्रमाण-पत्र की संचिका बन गयी हो, लेकिन गरीब मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने की चिकित्सीय संचिका कागज पर संधारित हो रही है. अगर महिला महिला चिकित्सक रहती या मौजूद पुरुष चिकित्सक पहुंच जाते तो शिक्षिका किरण की जान बच जाती. ग्यारह वर्षों के बाद किरण को दूसरा बच्चा प्राप्त हुआ. जो बच्चे को गोद लेने पूर्व स्वर्ग सिधार गयी. गोखुला निवासी किरण बंजरिया प्रखंड के झखिया मध्य विद्यालय में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं.
मंगलवार की संध्या परिजनों ने प्रसूता किरण को प्रसव-पीड़ा होने पर बच्चा इश्यू के लिए सदर अस्पताल लाये. अस्पताल में इलाज के दौरान रात्रि करीब दस बजे किरण ने पुत्र को जन्म दिया. अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती के पांच घंटे बाद भी कोई चिकित्सक देखने नहीं आये. बच्चा भी आशा ने इश्यू करायी. परिजनों ने बताया कि देर रात्रि किरण को असहनीय दर्द शुरू हुआ. परेशान परिजनों ने अस्पताल में चिकित्सक को खोजा, यहां तक कि सीएस, डीएस तक को फोन की, लेकिन फोन की घंटी तो बजी लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया. किरण की वेदना की बैचेनी देख परिजनों ने सदर अस्पताल से रहमानीय अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सक ने उसे मृत बताया. इसी रात अस्पताल में एक शंभू राम ने भी दम तोड़ दिया. वह पश्चिमी चंपारण के पखनहीया गांव का रहने वाला है. तीन दिन पहले एड्स पीडि़त शंभू को परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया. परिजनों ने बताया कि चिकित्सीय अभाव में दवा नहीं मिलने के कारण मंगलवार की रात्रि शंभु की मौत हो गयी है. 12 घंटे के भीतर हुई दो मरीज की मौत चिकित्सीय लापरवाही मानी जा रही है. इस घटना में चिकित्सक व नर्स के ड्यूटी से नदारद रहने की पोल खोल दी है. रात्रि में चिकित्सक व नर्स ड्यूटी से गायब रहते हैं. आशा कार्यकर्ता चिकित्सक बन मरीज का ईलाज करती हैं.
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