बाजारों में बढ़ी रौनक दीपावली व छठ को ले दुकाने सजीं

Updated at : 11 Oct 2017 5:37 AM (IST)
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बाजारों में बढ़ी रौनक दीपावली व छठ को ले दुकाने सजीं

मधुबनी : दीपावली व आस्था का महापर्व सूर्य षष्ठी व्रत के उपयोग में आने वाले सामान से बाजार में रौनक छाने लगी है. व्रत करने वालों द्वारा इसकी खरीदारी भी शुरू कर दी गई है. दीपावली पर्व को लेकर बाजारों में पटाखे, दीप व हुक्का लोली (कपड़ा का बना गोला) का दर्जनों अस्थायी दुकान भी […]

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मधुबनी : दीपावली व आस्था का महापर्व सूर्य षष्ठी व्रत के उपयोग में आने वाले सामान से बाजार में रौनक छाने लगी है. व्रत करने वालों द्वारा इसकी खरीदारी भी शुरू कर दी गई है. दीपावली पर्व को लेकर बाजारों में पटाखे, दीप व हुक्का लोली (कपड़ा का बना गोला) का दर्जनों अस्थायी दुकान भी सज गयी है. बांस के दामों में हो रही वृद्धि व इसकी आपूर्ति में कमी के कारण व्रत के उपयोग में आने वाला ढकिया, डगड़ी, सुपा, डलिया व कोनिया के दामों में भी वृद्धि हुई है.

जुड़ गये हैं कई लोग : बाटा चौक निवासी रंजीत मल्लिक, कैलाश मल्लिक, प्रदीप मल्लिक, कल्लर मल्लिक, हरिश्चंद्र मल्लिक व गुड़िया देवी ने बताया कि पूर्व में बांस द्वारा निर्मित समान पहले महादलित समुदाय का खास तबका व कुछ कुछ जगहो पर मछुआरे जाति के लोग ही इसे बनाते और बेचते थे. लेकिन आज के दिन में इस पेशे में कई जाति के लोग बाहर से खरीदकर पर्व में बेचते हैं. जिससे हम लोगों के सामने बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. इन लोगों ने बताया कि छठ पर्व के अवसर पर बांस निर्मित समानों की औसत न बिक्री प्रति दुकानदार 25 से 30 हजार रुपये की होती है.
इनका यह भी कहना है कि आज के समय में पीतल का ढकिया, कोनिया व अन्य सामान काप्रचलन होने से भी बांस निर्मित सामग्रियों की बिक्री में कमी आयी है. हालांकि व्रत करने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है. इन लोगों ने बताया कि विगत आठ वर्षों से हम लोगों के धंधे को कई अन्य जाति के लोगों द्वारा भी अपनाया गया है. उन्होंने कहा कि हमलोगों के द्वारा भी कई बांस निर्मित समान भड़ाम, लोफा, हरिपुर, लोहट आदि ग्रामीण इलाकों से लाकर बेचना मजबुरी हो गयी है.
क्योंकि बांस हर जगह उपलब्ध नहीं होता है. मुख्यालय में 50-60 के करीब दुकान बांस निर्मित समानों की है. आंकड़ों पर गौर करें तो बांस निर्मित समान की कुल बिक्री छठ के अवसर पर केवल जिला मुख्यालय में 10 से 15 लाख रुपये की होती है. लेकिन इस धंधे में अन्य जाति के प्रवेश करने से महादलित समाज के सामने एक बड़ी चुनौती आ गयी है.
समान वर्तमान दर गत वर्ष की दर
ढकिया 125 रुपये 100 रुपये
डगरी 50 रुपये 40 रुपये
सुपा 70 रुपये 50 रुपये
डलिया 30 रुपये 20 रुपये
कोनिया 30 रुपये 20 रुपये
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