मुखिया की मनमानी से किसानों को नहीं मिल रहा सिंचाई के लिए पानी

Updated at : 29 Jan 2025 10:09 PM (IST)
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मुखिया की मनमानी से किसानों को नहीं मिल रहा सिंचाई के लिए पानी

कृषि विभाग के माने तो जिले में कुल सरकारी नलकूप कि संख्या 325 है जिसके कुल 3440 हेक्टेयर खेत कि सिचाई होती थी.

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बक्सर.

कृषि विभाग के माने तो जिले में कुल सरकारी नलकूप कि संख्या 325 है जिसके कुल 3440 हेक्टेयर खेत कि सिचाई होती थी. लेकिन कई सालों से छोटे मोटे खराबी के कारण 220 नलकूप बंद पडा है. 220 नलकूप को चालू करने के लिए लघु सिंचाई विभाग के द्वारा पंचायती राज्य विभाग के मुखिया को जीमे दे दिया गया. जिसको लेकर लघु सिचाई विभाग के द्वारा 220 नलकूप को चालू करने के तीन किस्त में राशि पंचायत को देना था. लेकिन पहले किस्त 220 नलकूप को मरम्मत करने के लिए आठ करोड़ 67 लाख आठ हजार 88 रुपये विभाग से आवंटन प्राप्त हुआ था. पंचायती राज्य विभाग के मुखिया को 164 नलकूप को चालू करने के लिए 7 करोड़ 54 लाख 62 हजार 228 रुपये का आवंटन वित्तीय वर्ष 2019-20 में ही आवंटन किया था, लेकिन विभाग को अभी तक 52 लाख 15 हजार 860 रुपये का मुखिया के द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं विभाग को प्राप्त हुआ है. उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को प्राप्त नहीं होने से दूसरे किस्त केवल 131 नलकूप का विभाग के द्वारा राशि का आवंटन 7 करोड़ 18 लाख दो हजार एक सौ 17 रुपये मुखिया को दिया गया. लेकिन दूसरे किस्त 66 का उपयोगिता प्रमाण पत्र 3 करोड़ 63 लाख 72 हजार 928 रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र हुआ. तीन लाख 59 हजार 190 रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है. वहीं तीसरा किस्त 42 नलकूप के लिए 10 करोड़ 73 लाख 2 हजार 81 रुपये दिया गया था. लेकिन अभी तक नौ का उपयोगिता 26 लाख 59 हजार 168 रुपये प्राप्त हुआ था. लेकिन अभी तक लाख 73 हजार 713 रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ. वहीं मुखिया द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के वजह से नलकूप मरम्मत करने का योजना प्रभावित हो रही है. तीनों किस्त को मिलाकर कुल 11 करोड़ 44 लाख 94 हजार 324 रुपये मुखिया जी को आवंटन किया गया था. लेकिन अभी तक चार करोड़ 96 लाख 62 हजार 5 सौ का अभी तक लघु सिंचाई विभाग को उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिला.

मुखिया के मनमानी से किसानों को नहीं मिल रहा है सिंचाई का पानी :

जिले के 220 नलकूप जो छोटे मोटे कारण से बंद पड़े थे. विभाग के गाइड लाइन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में सभी नलकूप को लघु सिंचाई विभाग के द्वारा पंचायती राज्य के प्रतिनिधि मुखिया के जिम्मे दे दिया गया था. जब पंचायती राज्य प्रतिनिधि मुखिया के जिम्मे दिया गया तो उस समय 325 में 220 बंद पड़ा था. उन सभी को चालू करने के लिए 11 करोड़ 44 लाख 94 हजार 324 रुपये दिया गया था. लेकिन मुखिया के मनमानी के कारण अभी तक चार करोड़ 96 लाख 62 हजार 5 सौ का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने से अगले किस्त की राशि लघु सिंचाई विभाग के द्वारा मुखिया को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.

सरकारी नलकूप से 3440 हेक्टेयर में होता है सिंचाई :

जिले में कुल 325 सरकारी नलकूप से 3 हजार 440 हेक्टेयर सिंचाई होता था. मगर 220 ट्यूबवेल खराब होने से 2 हजार 328 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित हो रही है. जिसको लेकर लघु सिंचाई विभाग उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में पंचायत प्रतिनिधि के साथ कई बैठक कर निर्देश दिया गया है. इसके बावजूद उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक विभाग को नहीं मिल पाया है. जिससे सिंचाई की समस्या लगातार बनी हुई है. विभाग का लगातार प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द सभी ट्यूबवेल 325 को चालू किया जा सके. जिससे किसानों को सिंचाई की समस्या न हो.

क्या कहते हैं अधिकारी

उपयोगिता प्रमाण पत्र के लिए उप विकास आयुक्त के अध्यक्षता में कई बार मुखिया और ग्राम सेवक के साथ बैठक किया गया. लेकिन बार-बार बैठक करने के बाद भी ग्राम सेवक और मुखिया उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दे रहे हैं. लेकिन अब उम्मीद है एक माह के अंदर उपयोगिता प्रमाण प्राप्त हो जायेगा तो अगले किस्त का राशि जारी कर दी जायेगी.

रंजीत कुमार, कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग

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