बक्सर. शहर के किला मैदान के पश्चिम उत्तर कोने से दक्षिण पश्चिम कोने तक 39 लाख 50 हजार 993 रुपये की लागत से साल 2018 में सौंदर्यीकरण कराए गए पार्क बदहाल है. इस पार्क का निर्माण मुख्यमंत्री नगर विकास योजना से कराया गया था. मगर रखरखाव के अभाव में पार्क बदसूरत हो गया है. यह अलग बात है पार्क के ठीक पश्चिम महज दो सौ गज की दूरी पर सदर अनुमंडलाधिकारी, पूरब दिशा में मात्र 50 फलांग की दूरी पर उपविकास आयुक्त और पांच सौ मीटर की दूरी पर जिलाधिकारी का आवास है. मगर प्रशासनिक अधिकारियों को शायद पार्क की बदहाली नजर नहीं आती है. पार्क में लोगों के बैठने के लिए गई ईंट की कुर्सी जर्जर होकर टूट गयी हैँ. सभी स्ट्रीट लाइटें बेकार हो गयी हैं. यहीं नहीं पार्क में जगह-जगह गंदगी का अंबार है. मुख्य द्वार के बाहर की जगह को लोगों ने मूत्रालय का प्रयोग कर गंदा कर दिया है. इस कारण टहलने वालों को गंदगी से उठ रही दुर्गंध के कारण परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है. पार्क में लगे फव्वारे खराब हो गये है. नगर परिषद की लापरवाही से लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. क्या कहते हैं अधिकारी यह मामला संज्ञान में आया है. यदि इस तरह की बात है, तो उसे जेइ से दिखवा कर उसके बारे में निर्णय लिया जायेगा. रवि सिंह, स्वच्छता पदाधिकारी, नगर परिषद बक्सर क्या कहते हैं लोग पार्क की बदहाली लगातार बढ़ती जा रही है. पार्क में बैठने के लिए लगी कुर्सियां टूटी हुई हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीं बच्चों के लिए लगाया गया झूला भी खराब अवस्था में है. सुविधाओं के अभाव में यह पार्क लोगों के उपयोग के लायक नहीं रह गया है. -सतीश कुमार ठाकुर पार्क में लगा फव्वारा लंबे समय से खराब पड़ा हुआ है. फव्वारा में पानी नहीं चलने के कारण उसमें गंदगी फैल गयी है, जिससे दुर्गंध भी उठने लगी है. रखरखाव के अभाव में पार्क की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है. -विकास कुमार गुप्ता पार्क का मुख्य गेट टूट चुका है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है. इसके अलावा गेट के आसपास काफी गंदगी फैली हुई है, जिससे तेज दुर्गंध आती है. उन्होंने कहा कि इस अव्यवस्था के कारण पार्क में आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. -छोटू कुमार पार्क की स्थिति बेहद खराब है. पार्क में लगा फर्श जगह-जगह से टूटा हुआ है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है. इसके अलावा पार्क की लाइटें भी खराब पड़ी हैं, जिससे शाम होते ही अंधेरा छा जाता है. यह पार्क सिर्फ नाम का पार्क बनकर रह गया है, यहां न तो साफ-सफाई है और न ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं. -गोलू कुमार
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