बक्सर: डुमरांव में सड़क बनी मुसीबत, गड्ढों और जलजमाव से रोजाना हो रहे हादसे

Author Vinit Dumroan|Edited by Ragini Sharma
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फोटो कैप्शन : करूअज-रजडिहां जर्जर सड़क पर जमा कीचड़ व पानी | Prabhat Khabar Network

करूअज-रजडिहां जर्जर सड़क पर जमा कीचड़ व पानी

डुमरांव प्रखंड के करूअज गांव की सड़क वर्षों से जर्जर हालत में है. बड़े-बड़े गड्ढों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो रहा है. ग्रामीण अब आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं.

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Buxar News : डुमरांव प्रखंड के कसियां पंचायत स्थित करूअज गांव में टावर से रजडिहां मोड़ तक जाने वाली करीब एक किलोमीटर लंबी सड़क आज ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन चुकी है. वर्षों से जर्जर पड़ी इस सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि अब यहां से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है. हल्की बारिश होते ही सड़क पर जलजमाव हो जाता है और गड्ढे पानी में छिप जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है.

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क अब सिर्फ नाम की रह गई है. जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है. रोजमर्रा के काम के लिए इसी रास्ते का सहारा लेने वाले लोग अब डर-डर कर आवाजाही कर रहे हैं.

छोटे बच्चों और साइकिल सवारों के लिए बना खतरा

गांव के लोगों ने बताया कि इस सड़क पर सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और साइकिल से चलने वालों को होती है. कई बार ऐसा हुआ है जब बच्चे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो गए. स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह रास्ता अब खतरनाक बन चुका है.

बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है. सड़क पर भरे पानी के कारण यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि कहां गड्ढा है और कहां समतल जमीन. ऐसे में आए दिन लोग गिरते हैं और चोटिल हो जाते हैं.

रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही, फिर भी अनदेखी

ग्रामीण वीरेंद्र सिंह मौर्य, मनोज ओझा, रमेश ओझा, गिरधारी ओझा, भरत पासवान और शिवजी राम ने बताया कि इस सड़क से हर दिन सैकड़ों लोग आते-जाते हैं. यह रास्ता गांव के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है, लेकिन इसके बावजूद इसकी हालत सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वे कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं. आवेदन भी दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला. जमीनी स्तर पर कोई काम अब तक शुरू नहीं हुआ है.

लोगों में बढ़ता आक्रोश

लगातार अनदेखी के कारण अब ग्रामीणों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे. उनका आरोप है कि चुनाव के समय वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता.

करूअज गांव की यह सड़क अब विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है. एक तरफ सरकार बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. अब जरूरत है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत या निर्माण कराए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और हादसों पर लगाम लग सके.


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