Buxar News: कलशस्थापन के साथ शुरू हुई देवी दुर्गा की उपासना
Published by : RAVIRANJAN KUMAR SINGH Updated At : 22 Sep 2025 9:14 PM
शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार को हो गया
बक्सर
. शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार को हो गया. पहले दिन कलश स्थापन के साथ माता रानी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की गई तथा दुर्गा सप्तशती के पाठ शुरू किए गए. नवरात्र का समापन नवमी को हवन-पूजन के साथ 1 अक्टूबर को होगा. वैदिक मंत्रोचार के बीच हुए पूजा-पाठ के कारण शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. आचार्यों ने मंत्रों के साथ कलश स्थापन तथा मां दुर्गा की विधि-विधान के साथ पूजा कराई. इसके बाद दुर्गा सप्शती एवं दुर्गा चालीसा आदि के पारयण किए गए. इसअवसर पर देवी उपासकों ने उपवास व्रत के साथ नौ दिवसीय उपासना का संकल्प लिया एवं पूजन-अर्चन कर मां भगवती की कृपा की कामनाएं कीं. देवी मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़नवरात्र शुरू होने के साथ ही मां दुर्गा के दर्शन-पूजन के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ गई. देवी भक्त मंदिरों में जाकर माता रानी को गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित किए तथा मत्था टेक उनसे मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगें. इसके चलते सुबह से लेकर दोपहर बाद तक मंदिरों में श्रद्धालुओं के जमघट लगे रहे. देर शाम मंदिरों में मां भगवती की महाआरती की गई.
देवी गीतों से गुलजार हुए पूजा पंडालनवरात्र प्रारंभ होते ही पूजा पंडालों के पास चहल-पहल बढ़ गए हैं. पंडालों से देवी मइया के भक्ति गीत गूंजने लगे हैं. इसी के साथ पूजा समितियों की तैयारियां तेज हो गई हैं. प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने के लिए मूर्तिकारों की व्यस्तता बढ़ गई है, तो पंडालों को आकर्षक रूप देने तथा लाइट-बत्ती लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है.इस बार दस दिनों का है नवरात्रआश्विन शुक्ल चतुर्थी तिथि की वृद्धि के कारण इस बार शारदीय नवरात्र दस दिनों का हो रहा है. महाष्टमी एवं महानवमी व्रत 30 सितंबर को किया जाएगा, जबकि नवमी एक अक्टूबर को हो रहा है. पंडालों में स्थापित माता रानी का पट सप्तमी तिथि को मूल नक्षत्र में खोला जाएगा. ज्योतिषाचार्य पं.मुन्ना जी चौबे के मुताबिक सप्तमी तिथि 28 सितंबर को दिन में 10.44 बजे से शुरू होकर 29 सितंबर को दोपहर 12.26 बजे तक रह रही है, जबकि मूल नक्षत्र 28 सितंबर की रात 1.29 बजे से 29 सितंबर की रात 3.33 बजे तक भोग कर रही है.
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