बक्सर
. सदर अस्पताल में दंत विभाग में एक मात्र पदस्थापित दंत चिकित्सक के अन्यत्र स्थानांतरण होे जाने के कारण विभाग पूरी तरह से खाली हो गया है. जिससे सदर अस्पताल में दंत विभाग में मिलने वाली चिकित्सकीय सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है. जिसके कारण मरीजों को प्रतिदिन लौटना पड़ जाता है. वहीं दूर दराज से आने वाले मरीजों को इस भीषण गर्मी में परेशानी झेलनी पड़ रही है. वहीं मरीजों को इलाज भी नहीं मिल पा रहा है. इसके साथ ही मौमस में परिवर्तन व गर्मी में काफी इजाफा होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मौसम में काफी तल्खी के बाद मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. फिलहाल 800 से 900 की संख्या में मरीज प्रतिदिन सदर अस्पताल में पहुंचते है. जहां सामान्य ओपीडी में इलाज कराने के लिए आधे से अधिक मरीज पहुंचते है. सोमवार को भी सामान्य ओपीडी में मरीजों की काफी संख्या में भीड़ लगी रही. जिन्हें अपनी बारी का घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. ज्ञात हो कि पूर्व में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों को रजिस्ट्रेशन के लिए भीड़ लगती थी. फिलहाल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होने के कारण अब भीड़ डॉक्टर से इलाज के कारण हो रही है. जहां सामान्य ओपीडी में एक ही मरीज इलाज करते है. जिससे मरीजों को इलाज कराने में घंटो समय लग रहा है. जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है. वहीं डॉक्टर से इलाज के लिए मरीज आपस में धक्का मुक्की करते रहे. जिससे डॉक्टर चैंबर के समक्ष काफी अव्यवस्था बनी रही. जिसे सांसद प्रतिनिधि के रूप मे पहुंची श्वेता पाठक ने मरीजाें को काफी मशक्कत के बाद पंक्तिबद्ध करवाया. सदर अस्पताल में दवा एवं जांच की पर्याप्त व्यवस्था है. इसके बावजूद चिकित्सकों द्धारा बाहर की अनावश्यक जांच लिखा जा रहा है. वहीं अस्पताल के ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे डॉ एससी मिश्रा ने बताया कि फिलहाल बीपी पीड़ित मरीजों के साथ ही मौसमी मरीज काफी पहुंच रहे है. एक डॉक्टर को करना पड़ता है 450 के करीब मरीजों का इलाजदोनो पालियों में सदर अस्पताल में ओपीडी के सामान्य विभाग में एक ही डॉक्टर को 450 मरीजों का प्रतिदिन इलाज करना पड़ता है. जिससे डॉक्टर के साथ ही मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में प्रथम पाली की समय सीमा समाप्त होने के बाद डॉक्टर चाय पानी के लिए चैंबर छोड़कर चले जाते है. वहीं लाइन में लगे व दूर दराज के क्षेत्रों से पहुंचे मरीजों को दूसरी पाली में इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में मरीजों को परेशानी हो रही है. दंत विभाग हो गया है खाली, मरीज परेशानसदर अस्पताल में पूर्व से तैनात एक मात्र डॉक्टर अरूण कुमार सिंह का अन्यत्र स्थानांतरण हो जाने के कारण विभाग खाली हो गया है. जिसके कारण मरीजों कोे फिलहाल दंत विभाग में सुविधा नहीं मिल पा रही है. जहां इलाज के लिए आने वाले मरीज प्रतिदिन बिना इलाज कराये ही लौट जाते है. इस क्रम में सदर अस्पताल में दांत में कीड़ा लगने तथा दांत में लगातार दर्द होने का इलाज के लिए चौसा से पहुंचे हरेंद्र कुमार को बिना इलाज के ही लौट जाना पड़ा. ज्ञात हो कि प्रतिदिन 30 से 50 तक की संख्या दांत की समस्या से पीड़ित मरीज सदर अस्पताल पहुंचते है. जिन्हें बिना इलाज कराये ही लौट जाना पड़ता है.बाहरी लोगों की सक्रियता काफी बढ़ीसदर अस्पताल में इन दिनों बाहरी लोगों की सक्रियता विशेषकर ओपीडी के दौरान काफी बढ़ गई है. जो डॉक्टर के चैंबर से लेकर सदर अस्पताल परिसर में काफी सक्रिय दिख रहे है. बाहरी जांच को लेकर उनके चंगुल में फंस जा रहे है. इस मामले में सदर अस्पताल प्रबंधन काफी मृत साबित हो रहा है. जिसके कारण मरीजों को परेशानी हो रही है. इसपर अंकुश लगाने के लिए सिविल सर्जन के द्धारा एक गेट को भी बंद करा दिया गया. इसके बाद भी इसपर अंकुश नहीं लगा है.
ओपीडी के दौरान मरीजों के लिए सक्रिय दिखी सांसद प्रतिनिधिसदर अस्पताल में ओपीडी की अव्यवस्था देख सांसद प्रतिनिधि श्वेता पाठक ने कमान पहुंचतेे ही संभाल लिया. उन्होंने सामान्य ओपीडी में गेट के समक्ष धक्का मुक्की से मरीजों को परेशान देखा. जिसके बाद स्वयं कमान संभाल पुरूष एवं महिला मरीजों को अलग-अलग पंक्तिबद्ध कराया. जिसके बाद गेट पर कायम अव्यवस्था समाप्त हुई. इस दौरान उन्होंने सामान्य मरीजों को शांति से अपना पंक्तिबद्ध व अपनी बारी के अनुसार इलाज कराने की नसीहत दी. वहीं उन्होंने मरीजों को समझाया कि आपकी धक्का मुक्की व्यवस्था से इमजेंसी मरीजों को परेशानी हो सकती है.कहते है सिविल सर्जनसदर अस्पताल की व्यवस्था में अगले एक में बदलाव दिखेगा. इसको लेकर सीनियर डॉक्टर को सदर अस्पताल के उपाधीक्षक का पदभार सौंपा गया है. इसके साथ ही दंत विभाग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. जिससे दंत विभाग सुचारू रूप से संचालित हो सके. शिव कुमार प्रसाद सिंहा सिविल सर्जन बक्सर.
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