ब्रह्मपुर. प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत हर गरीब को पक्का मकान देने की कवायद अब सख्त जांच के घेरे में है. ब्रह्मपुर प्रखंड में सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब लाभुकों के चयन में पारदर्शिता लाने के लिए तीन स्तरीय (थ्री-लेयर) जांच शुरू की जायेगी. इस नई व्यवस्था से उन लोगों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है, जिन्होंने गलत तरीके से सूची में नाम जुड़वाने की कोशिश की थी. विभागीय निर्देशानुसार, सर्वे में शामिल किए गए लाभुकों की पहली जांच पंचायत स्तर पर शुरू हो गई है. इसके बाद प्रखंड स्तरीय टीम और अंत में जिला स्तरीय टीम रैंडम जांच करेगी. प जांच की इस त्रि-स्तरीय प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य केवल पात्र (योग्य) परिवारों को ही योजना का लाभ दिलाना है. पारदर्शिता के लिए चेकर्स के पंचायत बदले गये : कागजी हेरफेर को रोकने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. जिस आवास सहायक, पीआरएस या पंचायत सचिव ने जिस पंचायत में सर्वे किया था, उन्हें जांच के लिए वहां नहीं भेजा जा रहा है. क्रॉस-वेरिफिकेशन के तहत कर्मियों की पंचायतों को आपस में बदल दिया गया है, ताकि रिपोर्ट निष्पक्ष रहे और कोई भी कर्मी अपने किये गयसर्वे को खुद क्लीन चिट न दे सके. लापरवाह कर्मियों पर होगी सख्त कार्रवाई : ब्रह्मपुर प्रखंड में हजारों की संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं. सर्वे के दौरान कई जगहों से गड़बड़ी और लालच में आकर नाम जोड़ा गया है. अगर जांच में कोई ऐसा परिवार पाया गया जो योजना के मानकों को पूरा नहीं करता, तो न केवल उसका नाम काटा जायेगा, बल्कि गलत सर्वे करने वाले संबंधित कर्मी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी. इन मानकों पर हो रही है छंटनी : जिनके पास पहले से पक्का मकान है,दोपहिया/तिपहिया वाहन या कृषि उपकरण वाले परिवार,सरकारी सेवा में कार्यरत सदस्य,आय के अन्य बड़े स्रोत रखने वाले परिवार पंचायत स्तर पर रैंडम जांच. द्वितीय चरण प्रखंड विकास पदाधिकारी की निगरानी में जांच. जिला मुख्यालय की विशेष टीम द्वारा फाइनल वेरिफिकेशन होगा.
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