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पूरी तरह से सुरक्षित है फाइलेरिया रोधी दवाएं

Updated at : 06 Aug 2024 9:40 PM (IST)
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पूरी तरह से सुरक्षित है फाइलेरिया रोधी दवाएं

जिले से फाइलेरिया बीमारी के उन्मूलन को लेकर वृहद पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है

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बक्सर. जिले से फाइलेरिया बीमारी के उन्मूलन को लेकर वृहद पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. ताकि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 10 अगस्त से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके. इस क्रम में जिले के सभी प्रखंडों में जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों व आम लोगों को फाइलेरिया, इस बीमारी के दुष्प्रभाव व इसके बचाव के लिए जरूरी फाइलेरिया रोधी दवाओं के सेवन की महत्ता की जानकारी दी जा रही है. जिससे लोग जागरूक हो और एमडीए अभियान के दौरान अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें. इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. सुरेश चंद्र सिन्हा ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है. जिसका समय पर प्रबंधन नहीं किया गया तो यह मरीज को दिव्यांग बना देता है. पूरी दुनिया में दीर्घकालिक विकलांगता का दूसरा प्रमुख कारण फाइलेरिया को माना जाता है. जिसके कारण मरीजों को शरीरिक के साथ साथ मानसिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ती है. इसलिए फाइलेरिया से बचाव के लिए हम सभी को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन अनिवार्य रूप से करें. ताकि हम अपने आने वाली पीढ़ियों को इस भयानक बीमारी से बचा सकें. पूरी तरह से सुरक्षित है फाइलेरिया रोधी दवाएं : अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं. रक्तचाप, शुगर, आर्थराइटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं. सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं. अगर किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक है कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं. जो कि दवा खाने के बाद परजीवियों के मरने के कारण उत्पन्न होते हैं. उन्होंने बताया कि 10 अगस्त से शुरू होने वाले कार्यक्रम में दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को ये दवाएं नहीं खिलाई जाएगी. परिवार और समुदाय की सुरक्षा करने का यह अवसर न चूकें पीरामल फाउंडेशन के डिस्ट्रिक्ट लीड अविकल्प मिश्रा ने बताया कि पीरामल फाउंडेशन के द्वारा जिले के सभी प्रखंडों में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का उन्मुखीकरण किया जा रहा है. ताकि वो समुदाय में जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाओं के सेवन के प्रति लोगों को जागरूक कर सकें. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पूर्व के समय में लोगों की अनदेखी व सुविधाओं की कमी के कारण फाइलेरिया का प्रसार हुआ है. वैसी स्थिति अब नहीं है. लेकिन भविष्य में हम स्वयं के साथ अपने परिवार और समाज को फाइलेरिया से बचा सके. इसके लिए फाइलेरिया के संक्रमण प्रसार को रोकना होगा. जिसके लिए एमडीए राउंड में भाग लेना एक महत्वपूर्ण कदम है. हम सभी को इस बात पर ध्यान देना होगा कि इस बीमारी से परिवार और समुदाय की सुरक्षा करने का यह अवसर हमसे न चूकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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