Buxar News: गंगा दशहरा के पावन माैके पर नदी में लगायी आस्था की डुबकी

Published by : RAVIRANJAN KUMAR SINGH Updated At : 05 Jun 2025 10:11 PM

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जिले में गंगा दशहरा का पर्व गुरुवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया. इस अवसर पर यहां के उतरायणी गंगा में स्नान के लिए स्नानार्थियों का सैलाब उमड़ गया.

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बक्सर

. जिले में गंगा दशहरा का पर्व गुरुवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया. इस अवसर पर यहां के उतरायणी गंगा में स्नान के लिए स्नानार्थियों का सैलाब उमड़ गया. गंगा घाटों पर पहुंच श्रद्धालु सुबह से ही गंगा में डुबकी लगाने लगे. पावन स्नान का यह सिलसिला दोपहर बाद तक चला. स्नान के बाद श्रद्धालु विधि-विधान के साथ पतित पावनी मां गंगा की आराधना किए और मंदिरों में देवी-देवताओं के पूजन-अर्चन के बाद दान-पुण्य किए. स्नानार्थियों का जमावड़ा यहां के हर गंगा घाटों पर लगा था, लेकिन पौराणिक रामरेखाघाट पर भीड़ इतनी ज्यादा थी कि उसका आंकलन मुश्किल था. वहां बिहार के सुदूरवर्ती जिलों के अलावा उतर प्रदेश व झारखंड आदि जगहों से स्नानार्थी पहुंचे थे. इसका नतीजा यह हुआ कि गंगा तट तक जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही थी. जमघट के कारण रामरेखाघाट पर तिल रखने की जगह नहीं बची थी.

गंगा दशहरा के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों के मुंडन संस्कार की रस्म भी पूरी कराए. जिससे भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही थी. भीड़ को नियंत्रित करने व सुरक्षा को लेकर पुलिस बल की तैनात की गई थी. किसी तरह की अनहोनी से निबटने के लिए घाट पर नावों के साथ नाविक व गोताखोर मुस्तैद किए गए थे. स्नान व मुंडन को लेकर भीड़ के चलते पंडों-पुजारियों व नाविकों की भी आमद बढ़ गई थी. मुंडन के लिए नाई खोजे नहीं मिल रहे थे. दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों के तांता लगे रहे. जिससे व्यवसायियों की भी चांदी कटी. ट्रैफिक नियंत्रण को लेकर पुलिस बल के जवान हांफते रहे. गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक आख्यानों के अनुसार इसी तिथि को पतिप पावनी मां गंगा का अवतरण धरा पर हुआ था. ऐसे इस दिन गंगा में स्नान एवं गंगा पूजन का विशेष महत्व होता है. इस दिन स्नान, दान व पूजा-पाठ आदि धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होता है. गंगा दशहरा का महत्व बताते हुए ज्योतिषाचार्य पं.मुन्ना जी चौबे ने कहा कि इस दिन गंगा स्नान से मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है और समस्त पाप दोष का निवारण हो जाता है. विधि-विधान से हुई गंगा महाआरती दशहरा के अवसर पर गुरुवार की देर शाम गंगा मइया की महाआरती की गई. सबसे पहले वैदिक विधि से मां गंगा की पूजा की गई. इसके बाद गुगुल धूप, घी बत्ती व कपूर आदि सामग्रियों से सस्वर गायन के बीच आरती की गई. आरती के दौरान घंटे-घड़ियाल एवं शंख ध्वनि से रामरेखाघाट गुंजायमान हो गया. इस अलौकिक नजारा की साक्षी बनने के लिए वहां लोगों की भीड़ उमड़ गई थी. इस अवसर पर जिला प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन के पदाधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे.

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