भवन तैयार, उद्घाटन का है इंतजार
Updated at : 17 May 2017 3:39 AM (IST)
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अनदेखी. सौ साल पुराने जर्जर भवन में हो रहा पोस्टमार्टम, उपकरण का भी है अभाव बक्सर : पोस्टमार्टम हाउस. जहां शवों का परीक्षण किया जाता है. किसी केस को सुलझाने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है. पर बक्सर जिले में पोस्टमार्टम हाउस में शवों के परीक्षण करने के लिए उपकरणों का अभाव है. आप को […]
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अनदेखी. सौ साल पुराने जर्जर भवन में हो रहा पोस्टमार्टम, उपकरण का भी है अभाव
बक्सर : पोस्टमार्टम हाउस. जहां शवों का परीक्षण किया जाता है. किसी केस को सुलझाने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है. पर बक्सर जिले में पोस्टमार्टम हाउस में शवों के परीक्षण करने के लिए उपकरणों का अभाव है. आप को यह सुन कर आश्चर्य होगा कि सदर अस्पताल परिसर स्थित पोस्टमार्टम हाउस लगभग एक सौ दस साल पुराना हो चुका है. हालत यह है कि डॉक्टरों ने भी पोस्टमार्टम करने से हाथ खड़े कर दिये हैं. सोचने वाली बात यह कि पोस्टमार्टम का नया भवन बन चुका है,
लेकिन शायद महकमा अभी तक इसके उद्घाटन की तारीख पक्की नहीं कर सका है. लेकिन खामियाजा तो डॉक्टरों को भुगतना पड़ रहा है. जिस भवन में अभी पोस्टमार्टम हो रहा है, वहां विद्युत व्यवस्था का अभाव है. एक्स-रे मशीन भी नहीं है. सबसे अधिक परेशानी अज्ञात शव को रखने को लेकर है. जिससे शव की स्थिति अत्यंत खराब हो जाती है.
खुले में शव रखने की विवशता: जिले में आये दिन सड़क दुर्घटनाओं व आपराधिक वारदात में किसी न किसी की मौत हो ही जाती है. वैसी परिस्थिति में मौत के कारण जानने के लिए शवों का पोस्टमार्टम कराया जाता है. लेकिन, पुराने पोस्टमार्टम रूम में इतनी जगह नहीं है कि उसमें एक साथ दो या तीन पोस्टमार्टम किया जा सके. जिससे शवों को खुले आसमान तले धूप में रखने की विवशता है. मंगलवार को भी ऐसा ही नजारा दिखा. सोमवार को सड़क दुर्घटना में मृत मामा-भांजे का शव पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा था तभी मुफस्सिल थाने में चाकू से गोद कर हत्या के बाद एक किसान का शव भी आ गया. ऐसे में शव को बाहर रखकर ही इंतजार करना पड़ा.
अंगरेजों के जमाने का बना है पोस्टमार्टम हाउस : अंगरेजी हुकूमत के समय वर्ष 1908 में निर्मित पोस्टमार्टम रूम के दिनों में पूरी तरह जर्जर हो चुका है. उसी जर्जर रूम में किसी प्रकार चिकित्सक द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया जाता है. पुराने सदर अस्पताल में ब्लड बैंक के सामने एक कमरे में शव के परीक्षण करने की व्यवस्था है. सदर अस्पताल में यह भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त एवं जर्जर स्थिति में है. पोस्टमार्टम भवन के इस कमरे में न तो कोई दरवाजा था और न ही खिड़की. हालांकि डॉक्टरों की शिकायत पर दरवाजे को दुरुस्त करा लिया गया है. साथ ही पोस्टमार्टम करने में परेशानी के साथ-साथ असुरक्षित भी था. पोस्टमार्टम में विसरा सुरक्षित रखने के लिए उपयोग किया जाने वाला नमक और पोस्टमार्टम के बाद शवों को ढंकने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पीवीसी शीट काफी समय से खत्म हो गया है.
संसाधन विहीन है पोस्टमार्टम भवन: पोस्टमार्टम भवन पूरी तरह संसाधन विहीन है. उपकरणों की व्यवस्था के लिए चिकित्सकों ने कई बार स्वास्थ्य प्रशासन से उपलब्ध कराने की बात कही है. लेकिन अब तक इसे उपलब्ध नहीं कराया गया है. जिस कारण डाॅक्टर अब पोस्टमार्टम करने से हिचकने लगे हैं. विद्युत की व्यवस्था भी बहुत बढ़िया उपलब्ध नहीं करायी गयी है. जबकि कई बार रात के वक्त भी पोस्टमार्टम करने का आदेश जिलाधिकारी से मिलता है. इस समय टार्च जला कर भी पोस्टमार्टम कार्य किया जाता है. पोस्टमार्टम भवन इतना छोटा है कि इसमें एक शव से अधिक का पोस्टमार्टम करना संभव नहीं है. इस कारण पोस्टमार्टम करने में घंटों देरी लगती है. परिजन कड़ी धूप व बारिश के समय पोस्टमार्टम हाउस के आसपास लगे पेड़ों के नीचे बैठ कर सिर छिपाते हैं. पीने के पानी का भी कोई इंतजाम नहीं है. धूप में पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते हैं.
नये भवन में सभी आधुनिक सुविधाएं: पुराने सदर अस्पताल परिसर में करोड़ों की लागत से बनकर तैयार नये पोस्टमार्टम हाउस में डॉक्टर रूम, स्टाफ रूम, शव रखने के लिए वातानुकूलित रूम, एनर्जी रूम आदि शामिल है. लावारिस शवों को रखने के लिए पोस्टमार्टम रूम भी बनाया गया है. जिसमें तीन डीप फ्रीजर रखने की व्यवस्था होगी. लावारिस शवों को 72 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकेगा.
इनमें एसी व सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे.
नये भवन में शिफ्ट होगा पोस्टमार्टम हाउस
नये पोस्टमार्टम भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है. जल्द ही नये भवन में पोस्टमार्टम कार्य शुरू हो जायेगा. इसके बाद शव के अंत्यपरीक्षण की बेहतर व्यवस्था रहेगी.
डॉ ब्रज कुमार सिंह, सिविल सर्जन, बक्सर
उपकरण आवश्यकता उपलब्ध
स्पॉट लाइट 2 0
रबड़ सीट 5 0
ग्लॉब्स 10 0
एपरॉन 10 0
वजन मशीन 2 0
मारचूअरी टेबल 2 1
मेजरिंग ग्लास 3 1
पीएम इक्यूपमेंट 4 1
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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