स्वदेशी बनाम विदेशी दीये में छिड़ी जंग

Published at :27 Oct 2016 12:50 AM (IST)
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स्वदेशी बनाम विदेशी दीये में छिड़ी जंग

विरोध चाइनीज सामान का बहिष्कार बाजार में दिखने लगा, मिट्टी के दीये की बढ़ी मांग बक्सर : भारत-पाकिस्तान मतभेद का असर अब स्थानीय बाजारों पर दिखना शुरू हो गया है. इस वर्ष दीपावली पर स्वदेशी बनाम विदेशी यानी चाइनीज लाइट के बीच जंग छिड़ चुकी है. भारत के विरुद्ध चीन के पाकिस्तान का समर्थन करने […]

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विरोध चाइनीज सामान का बहिष्कार बाजार में दिखने लगा, मिट्टी के दीये की बढ़ी मांग

बक्सर : भारत-पाकिस्तान मतभेद का असर अब स्थानीय बाजारों पर दिखना शुरू हो गया है. इस वर्ष दीपावली पर स्वदेशी बनाम विदेशी यानी चाइनीज लाइट के बीच जंग छिड़ चुकी है. भारत के विरुद्ध चीन के पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद, लोगों ने चाइनीज वस्तुओं का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है. शुरुआत में कुछ राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को हवा दी थी, लेकिन अब विरोध का स्वर हर ओर मुखर होता दिख रहा है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जगमग दीपावली मनाने के आदि रहे शहर के लोग भले रुके, पर चाइनीज लाइटों की बिक्री बहुत हद तक कम होगी. स्वदेशी बनाम विदेशी लाइट के बीच छिड़ जंग का परिणाम जो भी हो, फिल्वक्त मिट्टी के दीये बनानेवाले कुंभकारों के दिन बहुरनेवाले हैं.
चाइनीज लाइट के बहिष्कार का जोर पकड़ रहा अभियान : चाइनीज सामान के बहिष्कार का अभियान कुछ राजनीतिक दलों से शुरू होकर आम लोगों तक पहुंच चुका है. सामाजिक संगठनों के अलावा सोशल मीडिया ने हवा देकर लोगों तक इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचा दिया है. खासकर युवाओं के जरिये घर-घर यह बात पहुंच गयी है कि विरोधी देश पाकिस्तान का चीन समर्थन कर रहा है. हर किसी को चीन में बनी वस्तुओं का पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए. इसकी शुरुआत दीवाली से ही होनी चाहिए, क्योंकि दीपावली पर प्राय: हर घर के लोग सजावट में चाइना निर्मित लाइट की लड़ियों, झालड़, बल्ब का इस्तेमाल करते हैं.
बहुत कम हो रही चाइनीज लाइट्स की खरीदारी : नाम नहीं लिखने की शर्त पर शहर के बड़े कारोबारी समेत कई दुकानदारों के अनुसार चाइनीज वस्तुओं के बहिष्कार का काफी हद तक कारोबार पर प्रभाव पड़ रहा है. उनका मानना है कि विगत सालों की तुलना में इस वर्ष दीपावली में चाइनीज सामान की मांग अपेक्षाकृत कम होनेवाली है. आम दिनों में चाइनीज लाइट की लड़ियां, झालर की बिक्री के बराबर होती है. वहीं, दुकान पर आनेवाले ग्राहक चाइनीज लाइट के विकल्प की मांग करते हैं. दीपावली को लेकर सामान का ऑर्डर व पेमेंट पहले ही कर दिया गया है. सामान का बहिष्कार बाद में शुरू हुआ है. इसके कारण काफी परेशानी हो रही है.
विरोध अभियान से सहमे हैं कारोबारी : दीपावली पर चाइनीज लाइट बहिष्कार करने का अभियान जोर पकड़ते देख कारोबारी भी सहमे हुए हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार दुविधा में हैं कि माल मंगाए या नहीं? जिन दुकानदारों ने दीपावली को लेकर सामान का ऑर्डर व पेमेंट कर दिया है, उन्हें काफी परेशानी हो रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदारों की जान सांसत में अटकी हुई है.
यदि दीपावली में चाइनीज सामान की बिक्री नहीं हुई, तो ऐसे दुकानदारों का काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है. दीपावली आने में अब पांच दिन ही शेष रह गये हैं. दीपावली के दो-तीन दिन पहले से ही बिजली बत्ती से घरों की सजावट शुरू हो जाती है. दुकानदारों की आस अब धनतेरस के दिन पर टिकी हुई है.शहर के सोहनीपट्टी, चरित्रवन, मठिया मुहल्ले में बसे कुम्हार परिवार के सदस्य रात-दिन चाक चला रहे हैं. परिवार के किसी सदस्य को दम लेने की भी फुर्सत नहीं है.
बताते चलें कि शहरी इलाकों में कुम्हारों के करीब 40 परिवार हैं. सोहनीपट्टी स्थित कुम्हरटोली में भी उनके अच्छी-खासी आबादी है. दीपावली को लेकर कुम्हार परिवार का हर सदस्य अपने काम में व्यस्त है. कहीं आवा लग रहा है, तो कहीं भट्ठी से पक कर निकले दीये, मिट्टी के चुकिये, बरतन को भंडारित, कच्चे को सुखाया जा रहा है.
मिट्टी के दीयों व खिलौनों को ठेले पर लाद-लाद कर खुदरा कारोबारी को भी पहुंचाया जा रहा है. चाइनिज सामान का विरोध शुरू होने से शहर समेत ग्रामीण इलाकों के कुंभकारों में खुशी है.
दीपावली पर हम तो मिट्टी के दीये ही जलाएंगे :
विरोध का अभियान निश्चित रूप से आंदोलन का रूप ले लिया है. विरोध की आवाज बुलंद करनेवाले कुछ संगठनों ने बक्सर और शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में मिट्टी का दीये, मोमबत्तियां, केरोसिन, रेड़ी के तेल की बोतलें बांटना शुरू किया है. आम लोगों को इसके लिए जागरूक भी किया जा रहा है. इसका यह असर हुआ है कि प्रबुद्ध लोगों ने मिट्टी का दीया ही जलाने का संकल्प ले रखा है. इसके साथ ही छात्र संगठनों ने भी इसबार व्यापक तौर पर चाइनीज सामान का विरोध और देशी वस्तुओं के प्रति लोगों को जागरूक करने की ठानी है.
ढाई से तीन करोड़ का होता है कारोबार
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार दीपावली में सजावटी लाइट, झालड़, रंगीन बल्ब आदि का थोक एवं खुदरा कारोबार एक सप्ताह पूर्व से शुरू हो जाता है. दीपावली पर जिले में लगभग ढाई से तीन करोड़ के बीच कारोबार होता है. विगत कुछ वर्षों में चाइनीज झालड़, रंगीन बल्ब व चाइनीज दीयों की मांग अधिक है.
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