पटाखा दुकान के लिए लाइसेंस जरूरी

Published at :21 Oct 2016 2:40 AM (IST)
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पटाखा दुकान के लिए लाइसेंस जरूरी

सख्ती. लाइसेंस के लिए स्टेट बैंक के मुख्य ब्रांच में छह सौ रुपये का जमा करना होगा चालान बक्सर : दीपावली आते ही शहर में पटखों की दुकानें दिखने लगी हैं, लेकिन इन्हें ऐसे ही नहीं लगाना है. बल्कि इसके लिए अनुमंडल कार्यालय से लाइसेंस लेना पड़ेगा. जिले में पटाखों का कारोबार करीब एक करोड़ […]

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सख्ती. लाइसेंस के लिए स्टेट बैंक के मुख्य ब्रांच में छह सौ रुपये का जमा करना होगा चालान

बक्सर : दीपावली आते ही शहर में पटखों की दुकानें दिखने लगी हैं, लेकिन इन्हें ऐसे ही नहीं लगाना है. बल्कि इसके लिए अनुमंडल कार्यालय से लाइसेंस लेना पड़ेगा. जिले में पटाखों का कारोबार करीब एक करोड़ से अधिक का होता है. यह व्यवसाय महज दो दिनों में होता है. इसमें 30 फीसदी सिर्फ शहर का आंकड़ा है. शहर व अनुमंडल क्षेत्र के प्रखंडों से अनुमंडल विभाग में पटाखा विक्रेताओं ने लाइसेंस लेने के लिए आवेदन जमा किये हैं, जिनके आवेदन पर सीओ द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद इन्हें लाइसेंस निर्गत कर दिया जायेगा. फिलहाल, बक्सर अनुमंडल में कुल 94 आवेदन लाइसेंस के लिए आये हैं.
लाइसेंस पाने का क्या है नियम
लाइसेंस पाने के लिए आवेदक को सबसे पहले सरकार के शीर्ष हेड में R0070601030001 में छह सौ रुपये का चालान स्टेट बैंक के मुख्य ब्रांच में जमा करना होगा, जिसके बाद अनुमंडल कार्यालय में दुकानदार अपने नाम से आवेदन देगा. सीओ के स्तर पर दुकान खोले जाने का भौतिक सत्यापन होगा. फिर लाइसेंस मिल जायेगा.
ये होता है असर : अधिकांश पटाखे मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही हैं. इन पर रोक के लिए नियम तो है, परंतु प्रशासन की लापरवाही के कारण तेज आवाजवाले पटाखों की बिक्री पर रोक नहीं लग पाती है. ऐसे में मानक मात्रा से ज्यादा डेसिबल की आवाजवाले पटाखों की बिक्री भी खूब होती है. इससे सामान्य व्यक्ति की सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. अस्थमा पीड़ित को प्रदूषण से अस्थमा का अटैक आ सकता है और छोटे बच्चों की सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. वहीं, तेज पटाखों से बच्चों, वृद्ध और गर्भवती महिला को दूर रखना चाहिए. तेज आवाज कई बार हृदयगति को असामान्य कर देती है.
दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल होनी चाहिए आवाज : नियमों के मुताबिक शोर का मानक शहरी क्षेत्र में सुबह छह से रात 10 बजे तक 55 डेसिबल और रात 10 से सुबह छह बजे तक 45 डेसिबल रहना चाहिए. इसे ज्यादा ध्वनि या शोर कुछ समय बाद मानव को बेचैन करते हैं. 95 डेसिबल की आवाज कान को प्रभावित करती है और 110 डेसिबल से ज्यादा आवाज हो, तो कान का पर्दा फटने का डर रहता है. बाजार में बिकने वाले अधिकतर पटाखे की ध्वनि क्षमता 120 डेसिबल या उससे ज्यादा होती है.
क्या है नियम : भारत सरकार के विस्फोटक अधिनियम 1984 और विस्फोटक विनियम 2008 के अध्याय सात में आतिशबाजी की स्थायी व अस्थायी दुकानों के लिए नियम हैं. होलसेल लाइसेंसधारक इनका पालन करने के लिए बाध्य हैं. भले ही उन्होंने स्थायी या अस्थायी लाइसेंस लिया है. नियम 83 के अनुसार पटाखा बिक्री की स्थायी दुकान कांक्रीट से बनी हुई हो. आकार नौ वर्गमीटर से ज्यादा और 25 वर्गमीटर से कम होनी चाहिए. दुकान में कोई बिजली उपकरण, लैंप, बैटरी या चिंगारी पैदा करनेवाला सामान नहीं होना चाहिए. जगह एेसी हो, जहां अग्निशमन वाहन तत्काल पहुंच सके.
नियम का पालन हर हाल में करना होगा
बिना अनुमति के विफोस्टक बेचने पर दुकानदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. हर दुकानदार को नियमों का पालन करना होगा. भौतिक सत्यापन के बाद लाइसेंस दिया जायेगा.
गौतम कुमार,अनुमंडलाधिकारी,बक्सर
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