कुव्यवस्था की भेंट चढ़ गया स्वर्णकार पुस्तकालय

By Prabhat Khabar Digital Desk
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डुमरांव : प्रखंड के नया भोजपुर स्थित स्वर्णकार पुस्तकालय वर्षों से बंद पड़ा है. इस पुस्तकालय का निर्माण सन् 1962 में स्वर्ण समाज के कुछ शिक्षित लोगों ने चंदा के पैसे से किया था. मगर अब इस पुस्तकालय का भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है. यह पुस्तकालय अब पूरी तरह से उपेक्षित हो चुका है.

पुस्तकालय बंद होने के बाद से इसके पुनः चालू कराने की दिशा में कोई खास प्रयास नहीं हुआ. पुस्तकों से पुस्तकालय दूर हो चुका है. प्रवेश द्वार बंद रहता जरूर है, लेकिन इसका एक गेट खुला रहता है. पुस्तकालय में एक संदर्भ कक्ष, ग्रंथागार एवं श्री गजाधर वाचनालय भी है.
जिसका निर्माण शिक्षक महावीर, लक्ष्मी नारायण मुखिया, जगदीश कुमार ने किया था. जिसका संचालन शिवनाथ वर्मा, सिद्धनाथ जायसवाल और अध्यक्ष नारायण कुमार कर रहें थे. फिलहाल इसमें से दो व्यक्ति ही जीवित है. अध्यक्ष नारायण कुमार ने बताया कि जो लाभ पुस्तकालय से मिलनी चाहिए थी, वैसा नहीं हो पा रहा है. पुस्तकालय में कुछ पुस्तकें ऐसी थी, जो इतिहास में वर्णित है.
किताबें रखरखाव के अभाव में सड़ रहीं
स्वर्णकार पुस्तकालय में हाथों से लिखा हुआ रामायण और महाभारत भी उपलब्ध था. जो आज दीमकों का निवाला बन गया है. शाम 5 बजे से रात करीब 7 बजकर 30 मिनट तक खुला रहने वाला पुस्तकालय आज वीरान पड़ा है. अध्यक्ष नारायण कुमार ने बताया कि पुस्तकालय के एक बार फिर से चालू होने की उम्मीद लोग कर रहे हैं.
बता दें कि इस पुस्तकालय में कुल पुस्तकों की संख्या 30 हजार थी, जिसमें 300 से ज्यादा जीवनी, पांच हजार उपन्यास, पत्रिका, उपनिषद सहित अन्य पुस्तक इस पुस्तकालय में उपलब्ध था. जो आज मिट्टी में तब्दील हो चुका है. लोगों को बैठकर पढ़ने के लिए टेबल व कुर्सी था, जो दीमक का निवाला बन चुका है.
-क्या कहते है ग्रामीण
-पुस्तकालय का सही तरीके से संचालन नहीं होने के कारण आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है. 18 जनवरी- फोटो-4- माखन प्रसाद
गांव में कम से कम दो बेहतरीन पुस्तकालय होने चाहिए. बंद पड़े पुस्तकालय को चालू कराने की जरूरत है. 18 जनवरी- फोटो-7,उत्पल यादव
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